PatanjaliGhee
वर्षा चमोली

दिल्ली/ एनसीआर 29 November 2025
उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में साल 2020 में लिए गए पतंजलि देसी गाय घी के सैंपल की जांच रिपोर्ट अब चर्चा में है। उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश की दो अलग-अलग लैब में यह सैंपल मानकों पर खरा नहीं उतर पाया। इसी आधार पर जिला प्रशासन की अदालत ने पतंजलि पर 1.40 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।
लेकिन पतंजलि की ओर से जारी स्पष्टीकरण इस कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े करता है। कंपनी का दावा है कि यह पूरा आदेश त्रुटिपूर्ण और कानून के खिलाफ है। पतंजलि का कहना है कि जांच और कार्रवाई में गंभीर खामियां हैं,
कंपनी ने आदेश पर आपत्ति जताते हुए तीन बड़े बिंदु उठाए हैं:
- जिस रेफरल लैब ने परीक्षण किया, वह NABL से घी परीक्षण के लिए मान्यता प्राप्त नहीं थी
पतंजलि का आरोप है कि जिस लैब ने उनके घी को “सब-स्टैंडर्ड” बताया, वही खुद मानकों पर खरी नहीं उतरती। इसलिए उसकी रिपोर्ट को कानूनी रूप से स्वीकार नहीं किया जा सकता।
- जिन पैरामीटरों के आधार पर नमूना असफल घोषित किया गया, वे उस समय लागू ही नहीं थे
कंपनी का दावा है कि जिन नियमों को आधार बनाकर घी को फेल घोषित किया गया, वे उस अवधि में प्रभावी ही नहीं थे। इसलिए यह निर्णय तकनीकी और कानूनी रूप से गलत है।
- घी की एक्सपायरी डेट बीतने के बाद पुनः परीक्षण किया गया
पतंजलि का कहना है कि एक्सपायरी खत्म होने के बाद सैंपल का परीक्षण कानूनन अमान्य होता है। ऐसे सैंपल पर कोई निर्णय लेना नियमों का सीधा उल्लंघन है।
इस मामले से क्या नुकसान हो सकता है?
- उपभोक्ताओं के भरोसे पर चोट
पतंजलि आयुर्वेद का दावा हमेशा “शुद्धता” और “परंपरागत आयुर्वेद” पर आधारित रहा है। घी जैसे मुख्य उत्पाद पर सवाल उठना ब्रांड की विश्वसनीयता के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
- आयुर्वेदिक उत्पादों की छवि को भी नुकसान
पतंजलि खुद को आयुर्वेद का सबसे बड़ा ब्रांड बताता है। जब उसी के उत्पाद पर मिलावट या मानक-विहीनता का आरोप लगता है, तो सामान्य उपभोक्ता आयुर्वेदिक उत्पादों पर भी संदेह करने लगता है। इससे पूरे क्षेत्र की साख को नुकसान पहुँचना संभव है।
- बाबा रामदेव की व्यक्तिगत छवि पर असर
कभी योग और आयुर्वेद के प्रचारक के रूप में माने जाने वाले बाबा रामदेव पर अब “शुद्धता” की बजाय “व्यापारिक लाभ” को प्राथमिकता देने के आरोप लग रहे हैं।
लोग कह रहे हैं कि—
“रामदेव अब योगी से ज्यादा बिजनेसमैन बन गए हैं।”
- बाजार में प्रतिस्पर्धियों को बड़ा अवसर
घी और FMCG सेक्टर में अमूल, गोवर्धन, ऑर्गेनिक ब्रांड जैसे कई खिलाड़ी हैं। पतंजलि पर लगे आरोप इन कंपनियों को अपने मार्केटिंग और बिक्री को मजबूती देने का मौका देते हैं।
पतंजलि घी के सैंपल फेल होने का मामला सिर्फ एक उत्पाद की गुणवत्ता तक सीमित नहीं है। यह कंपनी की पारदर्शिता, जिम्मेदारियों और आयुर्वेद के नाम पर किए जाने वाले दावों की विश्वसनीयता से भी जुड़ा हुआ है।
कंपनी ने अदालत के आदेश को गलत बताया है, लेकिन उपभोक्ता अब स्पष्टीकरण से ज्यादा तथ्य और विश्वसनीय रिपोर्टिंग चाहेंगे।
