हल्द्वानी/देहरादून:
उत्तराखंड के कुमाऊं मंडल में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आगमन और उनकी विशाल जनसभा ने राज्य की राजनीतिक फिजाओं में हलचल पैदा कर दी है। एक तरफ जहां कांग्रेस इसे कुमाऊं में अपनी ‘शक्ति प्रदर्शन’ के रूप में देख रही है, वहीं दूसरी तरफ मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस दौरे को लेकर विपक्षी दल पर तीखे सियासी तीर छोड़े हैं।
“जनता को पांच साल तक क्यों भूला?”
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने खरगे के दौरे पर तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी को उत्तराखंड की जनता की याद केवल चुनाव आते ही क्यों आती है? उन्होंने आगे कहा, “यदि कांग्रेस को वास्तव में राज्य के नागरिकों और उनके भविष्य की चिंता होती, तो वे पिछले पांच वर्षों के दौरान सक्रिय रहे होते। सत्ता में रहने के दौरान या विपक्ष में रहते हुए भी उन्होंने कभी जनता के हितों की सुध नहीं ली। अब चुनाव नजदीक देख इन्हें जनता की परवाह होने का नाटक करना पड़ रहा है, जो कि पूरी तरह से राजनीतिक अवसरवादिता है।”
मुख्यमंत्री ने आगे स्पष्ट किया कि भाजपा सरकार प्रदेश में निरंतर विकास की योजनाओं को धरातल पर उतार रही है और राज्य की जनता इन विकास कार्यों और विपक्षी दलों की ‘चुनावी पर्यटन’ वाली राजनीति के बीच का अंतर बखूबी समझती है।
रामलीला मैदान में कांग्रेस का महा-मंथन
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे का हल्द्वानी दौरा पार्टी के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। रामलीला मैदान में आयोजित इस जनसभा के लिए कांग्रेस ने व्यापक स्तर पर तैयारियां की थीं। सुरक्षा और व्यवस्था को देखते हुए पूरे मैदान को वॉटरप्रूफ ‘जर्मन हैंगर’ टेंट से कवर किया गया था, ताकि किसी भी विपरीत मौसम का असर रैली पर न पड़े।
आयोजकों का दावा है कि इस सभा में कुमाऊं के नैनीताल, ऊधम सिंह नगर समेत विभिन्न जिलों से करीब 20 हजार से अधिक कार्यकर्ता और समर्थक शामिल हुए। प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल और नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य समेत पार्टी के तमाम वरिष्ठ नेताओं ने इस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए पिछले कई दिनों से हल्द्वानी में डेरा डाला हुआ था।
सियासी समीकरणों पर नज़र
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि खरगे का यह दौरा केवल एक जनसभा नहीं, बल्कि आगामी चुनावों के लिए कांग्रेस का ‘मिशन कुमाऊं’ है। जहां भाजपा इसे केवल एक ‘चुनावी दिखावा’ बताकर खारिज कर रही है, वहीं कांग्रेस इसे जनता के बीच अपनी पैठ बनाने का एक माध्यम मान रही है। बहरहाल, राज्य की जनता अब इन आरोप-प्रत्यारोप के बीच अपना अगला कदम तय करने के लिए तैयार है।









