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झारखंड भर्ती विवाद: रांची की सड़कों पर छात्र, तेजस्वी यादव की ‘चुप्पी’ से सियासी गलियारों में हलचल

Jharkhand Protest image created by Chat GPT
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रांची/पटना: झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित धांधली को लेकर चल रहा छात्र आंदोलन अब एक बड़ा राजनीतिक मोड़ ले चुका है। राजधानी रांची में जेपीएससी (JPSC) और जेएसएससी (JSSC) की परीक्षाओं में अनियमितताओं के विरोध में हजारों छात्र सड़कों पर उतर आए हैं। इस बीच, बिहार की राजनीति में खुद को ‘छात्रों का मसीहा’ बताने वाले नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की इस मुद्दे पर खामोशी अब सवाल खड़े कर रही है।
क्या है पूरा मामला?
रांची के मोरहाबादी मैदान और परीक्षा केंद्रों के बाहर पिछले कई दिनों से प्रदर्शन जारी है। छात्रों की मुख्य मांगें स्पष्ट हैं:
परीक्षा रद्द करने की मांग: छात्रों का आरोप है कि 14वीं जेपीएससी परीक्षा में बड़े पैमाने पर धांधली हुई है।
CBI जांच का दबाव: प्रदर्शनकारी स्पष्ट कह रहे हैं कि राज्य स्तरीय एजेंसियां निष्पक्ष जांच करने में सक्षम नहीं हैं, इसलिए मामले की जांच सीबीआई (CBI) को सौंपी जाए।
भूक हड़ताल: अपनी मांगों को लेकर कई छात्र स्वास्थ्य जोखिम उठाते हुए अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं, जिससे स्थिति संवेदनशील बनी हुई है।
तेजस्वी यादव की चुप्पी: राजनीतिक विरोधाभास या मजबूरी?
बिहार में जब भी पेपर लीक या भर्ती का मामला सामने आता है, तो राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और तेजस्वी यादव सरकार पर तीखे हमले करते हैं। युवाओं के बीच उनकी छवि एक ऐसे नेता की है जो रोजगार और शिक्षा के मुद्दों को प्रमुखता से उठाते हैं। लेकिन झारखंड में उनकी चुप्पी ने सबको चौंका दिया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इसके पीछे ‘गठबंधन धर्म’ की मजबूरी है। झारखंड में ‘इंडिया’ गठबंधन की सरकार है, जिसमें राजद (RJD) एक सहयोगी दल के रूप में शामिल है। यदि तेजस्वी इस मामले पर खुलकर सरकार के खिलाफ जाते हैं, तो यह सीधे तौर पर उनकी अपनी गठबंधन सरकार पर सवाल उठाएगा। यही कारण है कि वे इस ज्वलंत मुद्दे पर कोई भी प्रतिक्रिया देने से बचते नजर आ रहे हैं।
सत्ता का सुख बनाम छात्र का भविष्य
आंदोलनरत छात्रों का कहना है कि जब हम सत्ता से बाहर होते हैं, तब नेता हमारे साथ होते हैं, लेकिन जैसे ही वे सत्ता में आते हैं, छात्रों की समस्याएं उन्हें ‘विपक्ष का प्रोपेगेंडा’ लगने लगती हैं। झारखंड के युवा अब यह सवाल उठा रहे हैं कि क्या न्याय केवल राजनीतिक सुविधा के अनुसार तय होगा?
रांची की सड़कों पर जारी यह संघर्ष केवल एक परीक्षा का नहीं, बल्कि राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था की विश्वसनीयता का है। यदि सरकार समय रहते उचित कार्रवाई नहीं करती, तो यह आंदोलन आगामी चुनावों में सत्ता पक्ष के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।
आपकी क्या राय है?
क्या राजनीतिक गठबंधन छात्रों की जायज मांगों के आड़े आना चाहिए? तेजस्वी यादव की इस चुप्पी को आप कैसे देखते हैं? अपनी राय नीचे कमेंट बॉक्स में साझा करें।

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