शारदीय नवरात्रि में 17 अक्टूबर, शनिवार को मां दुर्गा के सातवें स्वरूप मां कालरात्रि की पूजा की जाएगी। इस दिन भक्त देवी की आराधना के साथ मंत्र जाप, भोग और आरती करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कालरात्रि की उपासना साहस, मानसिक शांति और नकारात्मकता से मुक्ति की कामना के साथ की जाती है।
मां कालरात्रि का स्वरूप भले ही उग्र माना जाता है, लेकिन भक्तों के लिए वे कल्याणकारी हैं। इसी वजह से उन्हें ‘शुभंकरी’ भी कहा जाता है। सप्तमी के दिन पूजा करने की तैयारी कर रहे हैं, तो यहां जानिए पूजन विधि, शुभ मुहूर्त, प्रिय भोग, मंत्र और देवी से जुड़ी पौराणिक कथा।
मां कालरात्रि की पूजा कब है?
पंडित नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार, शारदीय नवरात्रि की सप्तमी 17 अक्टूबर 2026, शनिवार को मनाई जाएगी। धार्मिक मान्यता है कि कठिन परिस्थितियों में मां कालरात्रि का स्मरण करने से मन को शांति मिलती है और विपरीत हालात का सामना करने का साहस मिलता है।
मां कालरात्रि की पूजा के शुभ मुहूर्त
17 अक्टूबर को पूजा के लिए बताए गए प्रमुख मुहूर्त इस प्रकार हैं:
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:59 बजे से 5:47 बजे तक
- अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:43 बजे से दोपहर 12:28 बजे तक
- अपराह्न पूजा मुहूर्त: दोपहर 3:54 बजे से शाम 6:14 बजे तक
पूजा का समय तय करते हुए अपने स्थानीय पंचांग में तिथि और मुहूर्त की पुष्टि कर लेना उचित रहेगा।
कैसे करें मां कालरात्रि की पूजा?
सप्तमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें। इसके बाद पूजा स्थल की सफाई करके गंगाजल से शुद्ध करें और मां कालरात्रि की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।देवी को रोली, कुमकुम, अक्षत और फूल अर्पित करें। इसके बाद धूप-दीप जलाकर श्रद्धापूर्वक पूजा करें। मां के मंत्रों का जाप करें और अंत में आरती उतारकर सुख-समृद्धि और परिवार के कल्याण की प्रार्थना करें।पूजा में विधि से अधिक श्रद्धा और मन की एकाग्रता को महत्व दिया जाता है। अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार पूजन सामग्री और विधि में बदलाव भी हो सकता है।
मां कालरात्रि के मंत्र
मां कालरात्रि की आराधना के दौरान इन मंत्रों का जाप किया जा सकता है।
सामान्य मंत्र:
ॐ कालरात्र्यै नमः।
बीज मंत्र:
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं कालरात्र्यै नमः।
देवी मंत्र:
ॐ देवी कालरात्र्यै नमः॥
प्रार्थना मंत्र:
या देवी सर्वभूतेषु माँ कालरात्रि रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक मंत्र जाप करने से मन को स्थिरता मिलती है और भक्त देवी का आशीर्वाद प्राप्त करने की कामना करते हैं।सप्तमी पर कौन-सा रंग और फूल शुभ माना जाता है?मां कालरात्रि की पूजा में नीले रंग को शुभ माना जाता है। इस दिन नीले रंग के वस्त्र पहनना देवी की आराधना से जुड़ी परंपराओं में शामिल है।फूलों में रातरानी या चमेली जैसे सुगंधित फूल अर्पित किए जाते हैं। कुछ परंपराओं में गुड़हल के फूल भी चढ़ाए जाते हैं। पूजा में उपलब्ध और ताजे फूल श्रद्धापूर्वक अर्पित किए जा सकते हैं।
मां कालरात्रि को क्या भोग लगाएं?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कालरात्रि को गुड़ और गुड़ से बनी मिठाइयों का भोग प्रिय माना जाता है। भक्त गुड़ का हलवा, गुड़ की खीर या मालपुआ अर्पित कर सकते हैं।भोग लगाने के बाद उसे प्रसाद के रूप में बांटने की परंपरा है। राहु दोष की शांति और संकटों से रक्षा जैसी मान्यताएं भी देवी की पूजा से जुड़ी हैं, हालांकि इन्हें धार्मिक विश्वास के रूप में ही देखना चाहिए।
मां कालरात्रि की पौराणिक कथा
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब शुंभ-निशुंभ और रक्तबीज जैसे असुरों के अत्याचार बढ़ने लगे, तब देवता उनकी शक्ति से परेशान हो गए। कथा के अनुसार, देवी ने असुरों का संहार कर देवताओं और भक्तों की रक्षा की।रक्तबीज को मारना विशेष रूप से कठिन था। मान्यता है कि उसके रक्त की हर बूंद धरती पर गिरने से एक नया रक्तबीज पैदा हो जाता था। ऐसे में उसका वध करना आसान नहीं था।कथा के मुताबिक, देवी ने कालरात्रि का उग्र रूप धारण किया और रक्तबीज के रक्त को धरती पर गिरने से पहले ही अपने मुख में समेट लिया। इस तरह रक्तबीज का अंत हुआ। मां कालरात्रि का यह स्वरूप बुराई पर शक्ति की विजय और संकट के समय साहस का प्रतीक माना जाता है।
मां कालरात्रि की आरती
कालरात्रि जय जय महाकाली।
काल के मुंह से बचाने वाली॥
दुष्ट संघारक नाम तुम्हारा।
महाचंडी तेरा अवतारा॥
पृथ्वी और आकाश पे सारा।
महाकाली है तेरा पसारा॥
खड्ग खप्पर रखने वाली।
दुष्टों का लहू चखने वाली॥
कलकत्ता स्थान तुम्हारा।
सब जगह देखूं तेरा नजारा॥
सभी देवता सब नर-नारी।
गावें स्तुति सभी तुम्हारी॥
रक्तदन्ता और अन्नपूर्णा।
कृपा करे तो कोई भी दुःख ना॥
ना कोई चिंता रहे ना बीमारी।
ना कोई गम ना संकट भारी॥
उस पर कभी कष्ट ना आवे।
महाकाली मां जिसे बचावे॥
तू भी भक्त प्रेम से कह।
कालरात्रि मां तेरी जय॥
सप्तमी पर रखें इन बातों का ध्यान
नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा के साथ मंत्र जाप, भोग और आरती की जाती है। पूजा का समय तय करने से पहले स्थानीय पंचांग देख लें, क्योंकि तिथि और मुहूर्त की गणना स्थान के अनुसार अलग हो सकती है। भक्त इस दिन देवी से साहस, शांति और परिवार की खुशहाली की प्रार्थना करते हैं।









