नई दिल्ली | प्रतिभा सिंह
कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के भविष्य को लेकर वर्ष 2026 में आयोजित अंतरराष्ट्रीय एआई शिखर सम्मेलन में भारत की पहल को बड़ी सफलता मिली है। भारत द्वारा प्रस्तुत एआई घोषणापत्र को दुनिया के 88 देशों और कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने समर्थन देते हुए हस्ताक्षर किए। इसे सुरक्षित और जिम्मेदार एआई विकास की दिशा में ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।
🌍 मानव हितों पर केंद्रित होगा एआई विकास
सम्मेलन में शामिल देशों ने सहमति जताई कि एआई तकनीक का उपयोग केवल आर्थिक लाभ तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और सुशासन जैसे क्षेत्रों में आम लोगों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए किया जाएगा।
भारत ने अपने प्रस्ताव में पारदर्शिता, जवाबदेही और डेटा सुरक्षा को एआई विकास की मूल शर्त बताया।
📌 घोषणापत्र की मुख्य बातें
घोषणापत्र में कई महत्वपूर्ण बिंदुओं को शामिल किया गया है —
- एआई तकनीक का नैतिक और जिम्मेदार उपयोग
- नागरिकों की निजता और डेटा सुरक्षा सुनिश्चित करना
- विकासशील देशों को तकनीक तक समान पहुंच देना
- एआई से जुड़े जोखिमों को कम करने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग
- युवाओं को एआई कौशल प्रशिक्षण देकर रोजगार के अवसर बढ़ाना
🚜 गांव, किसान और छात्रों तक पहुंचेगा एआई
भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि एआई का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचाना जरूरी है। खासतौर पर ग्रामीण क्षेत्रों, किसानों, छात्रों और छोटे व्यवसायों को डिजिटल तकनीक से जोड़ने पर जोर दिया गया।
🔮 आगे क्या होगा?
इस घोषणापत्र के बाद सदस्य देशों द्वारा एक संयुक्त कार्ययोजना तैयार किए जाने की उम्मीद है। इसके जरिए एआई के दुरुपयोग पर नियंत्रण और सकारात्मक उपयोग को बढ़ावा दिया जाएगा।
विशेषज्ञ मानते हैं कि यह समझौता आने वाले दशक में वैश्विक डिजिटल शासन और तकनीकी सहयोग की दिशा तय कर सकता है।









