छत्तीसगढ़ में भीषण ट्रेन हादसा: बिलासपुर के पास 11 की मौत, कई घायल

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तारीख: 5 नवंबर 2025
स्थान: बिलासपुर, छत्तीसगढ़

मंगलवार की शाम लगभग 4 बजे छत्तीसगढ़ के बिलासपुर ज़िले के कोटा–गेवरा रेल खंड में एक दर्दनाक रेल दुर्घटना हुई। एक लोकल पैसेंजर ट्रेन ने मालगाड़ी को पीछे से टक्कर मार दी, जिससे ट्रेन की कई बोगियां पटरी से उतर गईं।
हादसे के तुरंत बाद आसपास के ग्रामीण और रेलवे कर्मचारी मौके पर पहुँचे और राहत-बचाव कार्य शुरू किया। देर शाम तक 11 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी थी, जबकि 20 से ज़्यादा यात्री घायल पाए गए।
प्रारंभिक जांच के अनुसार, पैसेंजर ट्रेन ने लाल सिग्नल पार (signal overshoot) कर लिया था। उस समय आगे खड़ी मालगाड़ी पहले से ट्रैक पर मौजूद थी। तेज़ रफ़्तार के कारण टक्कर इतनी ज़ोरदार हुई कि पैसेंजर ट्रेन की अग्रिम डिब्बा मालगाड़ी पर चढ़ गया।
रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, चालक (लोको पायलट) और सहायक चालक दोनों को भी गंभीर चोटें आई हैं। सिग्नलिंग सिस्टम, ब्रेकिंग दूरी और मानव त्रुटि , इन तीनों पहलुओं की जांच के लिए रेलवे सुरक्षा आयुक्त (CRS) की टीम गठित की गई है।
घटना के तुरंत बाद NDRF और रेलवे की आपदा प्रबंधन टीम ने मोर्चा संभाला। स्थानीय प्रशासन ने एम्बुलेंस और मेडिकल टीमों को पास के अस्पतालों में भेजा।
• गंभीर घायलों को बिलासपुर के CIMS अस्पताल में भर्ती कराया गया।
• हल्के घायलों का इलाज कोटा और जयरामनगर के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में किया जा रहा है।
राज्य सरकार ने मृतकों के परिजनों को ₹10 लाख, गंभीर रूप से घायलों को ₹5 लाख, और अन्य घायल यात्रियों को ₹1 लाख की सहायता राशि देने की घोषणा की है।

“मुख्यमंत्री ने ट्वीट कर दुख व्यक्त किया और रेलवे से सुरक्षा मानकों की समीक्षा करने की अपील की।”

घटना के कारण बिलासपुर–कोरबा रेल मार्ग कुछ घंटों तक बाधित रहा। देर रात ट्रैक को खाली कर ट्रेनों का आवागमन आंशिक रूप से बहाल किया गया। रेलवे इंजीनियरिंग टीम ने ट्रैक की मरम्मत कर बुधवार सुबह तक पूरा संचालन शुरू करने की उम्मीद जताई है।

“एक यात्री ने बताया, “हम ट्रेन में बैठे थे तभी अचानक ज़ोरदार झटका लगा, सब लोग गिर पड़े। बाहर निकलते ही देखा कि आगे की बोगी पूरी तरह मुरझा चुकी थी।”

यह हादसा एक बार फिर भारतीय रेल की सुरक्षा प्रणालियों पर सवाल उठाता है। आधुनिक एंटी-कोलिजन सिस्टम (Kavach) अभी तक कई सेक्टरों में लागू नहीं हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह तकनीक इस रूट पर सक्रिय होती, तो यह टक्कर रोकी जा सकती थी।

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