प्रतिभा सिंह 24/12/25
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने आज केंद्रीय कैबिनेट बैठक में हुए फैसलों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि दिल्ली मेट्रो विस्तार परियोजना को मंजूरी दी गई है। वैष्णव ने बताय कि केंद्र सरकार ने इसके लिए 12,015 करोड़ रुपये की परियोजना को स्वीकृति दी हैराष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) की लाइफलाइन कही जाने वाली दिल्ली मेट्रो के विस्तार को लेकर केंद्र सरकार ने आज एक बड़ा और अहम फैसला लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में ‘दिल्ली मेट्रो फेज-5 (A)’ के विस्तार प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है। इस परियोजना के लिए ₹12,015 करोड़ के भारी-भरकम बजट को हरी झंडी दिखाई गई है, जो दिल्ली की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था में एक नए अध्याय की शुरुआत करेगा।
देश में हाईवे के लिए 1,97,644 करोड़ रुपये को मंजूरी
इन्फ्रास्ट्रक्चर को नई रफ्तार देने के मकसद से सरकार ने सड़क, रेल और पोर्ट नेटवर्क के विस्तार के लिए अपना खजाना खोला है। कैबिनेट ने सबसे बड़ा दांव हाईवे सेक्टर पर लगाया है। इसके लिए 1,97,644 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि मंजूर की गई है। इसके तहत 8 नेशनल हाई-स्पीड रोड प्रोजेक्ट्स (936 किमी) के साथ-साथ सीमावर्ती इलाकों और पूर्वोत्तर (शिलॉन्ग-सिलचर) से लेकर बिहार (पटना-आरा-सासाराम) और दक्षिण भारत तक लास्ट-माइल कनेक्टिविटी को सुधारा जाएगा। वहीं, लॉजिस्टिक्स लागत घटाने के लिए रेलवे के 43 प्रोजेक्ट्स (1,52,583 करोड़ रुपये) और पोर्ट्स व शिपिंग (1,45,945 करोड़ रुपये) पर भी बड़ा निवेश किया जाएगा, इसमें महाराष्ट्र का वधावन पोर्ट अहम है। इसके अलावा, हवाई संपर्क बढ़ाने के लिए बागडोगरा, बिहटा, वाराणसी व कोटा समेत नए एयरपोर्ट टर्मिनल्स के लिए भी 7,339 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैंदिल्ली मेट्रो से जुड़ा फैसला न केवल दिल्लीवासियों के लिए राहत की खबर है, बल्कि यह इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है।
क्या है फेज-5 (A) विस्तार योजना?
कैबिनेट की ओर से मंजूर की गई इस परियोजना के तहत दिल्ली मेट्रो नेटवर्क में तीन नए कॉरिडोर जोड़े जाएंगे। इस विस्तार की प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैं:
कुल लागत: परियोजना पर ₹12,015 करोड़ खर्च किए जाएंगे।
नया कवरेज: मेट्रो नेटवर्क में 16 किलोमीटर की नई लाइनें जुड़ेंगी।
नए स्टेशन: इस विस्तार के तहत 13 नए स्टेशनों का निर्माण किया जाएगा।
समय सीमा: सरकार का लक्ष्य अगले तीन वर्षों के भीतर इस विस्तार को पूरा करना है।
इस विस्तार का मुख्य उद्देश्य ‘लास्ट-माइल कनेक्टिविटी’ (अंतिम छोर तक जुड़ाव) को मजबूत करना और शहर के सबसे व्यस्त मार्गों पर भीड़भाड़ को कम करना है।
400 किलोमीटर का आंकड़ा पार करेगा नेटवर्क
इस मंजूरी के साथ ही दिल्ली मेट्रो दुनिया के सबसे बड़े शहरी रेल नेटवर्क में अपनी स्थिति और मजबूत करने जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, अगले तीन वर्षों में इन नए कॉरिडोर्स के पूरा होने पर दिल्ली मेट्रो का कुल परिचालन नेटवर्क 400 किलोमीटर के आंकड़े को पार कर जाएगा। यह एक बड़ी उपलब्धि होगी, जो दिल्ली मेट्रो को लंदन और न्यूयॉर्क जैसे शहरों की मेट्रो प्रणालियों के समकक्ष खड़ा करती है।
कनेक्टिविटी और कमर्शियल हब को मिलेगा बढ़ावा
इस विस्तार को रणनीतिक रूप से डिजाइन किया गया है ताकि प्रमुख आवासीय क्षेत्रों, कमर्शियल डिस्ट्रिक्ट्स और ट्रांजिट इंटरचेंज पॉइंट्स को आपस में बेहतर तरीके से जोड़ा जा सके। बिजनेस के नजरिए से देखें तो, कनेक्टिविटी बढ़ने से रियल एस्टेट और स्थानीय व्यापार को भी गति मिलने की उम्मीद है। जिन इलाकों में नए स्टेशन बनेंगे, वहां प्रॉपर्टी की कीमतों और आर्थिक गतिविधियों में तेजी आना तय माना जा रहा है।
क्या कहा केंद्रीय मंत्री ने?
कैबिनेट ब्रीफिंग के दौरान केंद्रीय रेल और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस फैसले को ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा, “दिल्ली मेट्रो के विस्तार के संबंध में एक बहुत ही महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। हम सभी जानते हैं कि दिल्ली मेट्रो ने दिल्ली के निवासियों और शहर में आने-जाने वाले हर व्यक्ति के जीवन को कैसे सकारात्मक रूप से बदला है। इस विस्तार के साथ, दिल्ली मेट्रो में एक नया अध्याय जुड़ जाएगा। इसी उद्देश्य के लिए ₹12,015 करोड़ की परियोजना स्वीकृत की गई है।”
दिल्ली मेट्रो के विस्तार की यह खबर ऐसे समय में सामने आई है जब राजधानी में प्रदूषण और ट्रैफिक जाम एक बड़ी चुनौती बने हुए हैं। सार्वजनिक परिवहन को सुदृढ़ करने वाला यह कदम न केवल यात्रियों की सुविधा बढ़ाएगा बल्कि पर्यावरण के अनुकूल शहरी विकास की दिशा में भी एक मील का पत्थर साबित होगा। अब सभी की निगाहें दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन पर होंगी कि वे इस महत्वाकांक्षी परियोजना को निर्धारित तीन साल की समय सीमा में कैसे पूरा करते हैं।









