डोमा परिसंघ का संविधान बचाओ संकल्प समारोह: पुलिस की कड़ी निगरानी के बीच हज़ारों लोगों की भागीदारी

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नई दिल्ली, 30 नवंबर 2025।
वर्षा चमोली

दलित, ओबीसी, अल्पसंख्यक और आदिवासी संगठनों के महासंघ डोमा परिसंघ द्वारा राजधानी के अंबेडकर भवन में आज विशाल संकल्प सभा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में हज़ारों लोगों ने डॉ. भीमराव अंबेडकर का मुखौटा पहनकर संविधान संरक्षण और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा का संकल्प लिया।

रामलीला मैदान में रैली की अनुमति न मिलने के बाद बदला कार्यक्रम स्थल

डोमा परिसंघ की रैली मूल रूप से रामलीला मैदान में आयोजित की जानी थी, मगर संगठन के अनुसार एक भाजपा नेता की शिकायत के बाद प्रशासन ने कार्यक्रम के लिए एनओसी जारी करने से इनकार कर दिया। कार्यक्रम स्थल बदले जाने के बावजूद बड़ी संख्या में लोग रामलीला मैदान पहुँच गए, जहाँ भीड़ को लौटाए जाने के दौरान पुलिस ने सख्त रवैया अपनाया।

कार्यक्रम में शामिल लोगों ने आरोप लगाया कि जुलाई से चल रहे प्रचार के बाद अचानक अनुमति रद्द की गई, जिससे लोगों में असंतोष रहा। बाद में अंबेडकर भवन में संकल्प सभा आयोजित की गई, लेकिन वहाँ भी भारी पुलिस बल तैनात रहा और किसी भी प्रकार की रैली या मार्च की अनुमति नहीं दी गई।

डोमा परिसंघ के राष्ट्रीय चेयरमैन डॉ. उदित राज का संबोधन

डोमा परिसंघ के राष्ट्रीय चेयरमैन डॉ. उदित राज ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि “संविधान और लोकतंत्र को बचाने की जिम्मेदारी अब सिर्फ राजनीतिक दलों पर नहीं छोड़ी जा सकती। संवैधानिक संस्थाओं के कमजोर होने से जन आंदोलन ही एकमात्र विकल्प बचा है।”

उन्होंने आरोप लगाया कि
• अल्पसंख्यकों की धार्मिक स्वतंत्रता खतरे में है,
• मुस्लिम समाज के साथ भेदभाव बढ़ रहा है,
• ईसाई समुदाय को प्रार्थना के दौरान धर्मांतरण के आरोपों में प्रताड़ित किया जाता है।

डॉ. उदित राज ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में दलित, पिछड़ा, आदिवासी, मुस्लिम और ईसाई समुदायों के बीच मजबूत सामाजिक नेटवर्किंग ही लोकतंत्र और संविधान की रक्षा का रास्ता है।

सत्ताधारी दल से टकराव का आरोप

डोमा परिसंघ ने सवाल उठाया कि जब यह एक सामाजिक और सांस्कृतिक संगठन है, तब भी कार्यक्रम को रोकने की कोशिश क्यों की गई? संगठन ने कहा कि दिल्ली में बड़े कार्यक्रमों का प्रभाव सीमित रहता है, इसलिए साथियों को गांव-गांव जाकर संगठन को मजबूत करना होगा।

उन्होंने कहा कि बढ़ती पाखंड संस्कृति, धर्मांधता और अंधविश्वास का प्रसार विज्ञान एवं तकनीक आधारित सोच को कमजोर कर रहा है, जिससे देश के विकास पर प्रतिकूल असर पड़ेगा।

मुख्य मांगें और राष्ट्रव्यापी अभियान की घोषणा

सभा में हजारों प्रतिभागियों ने डॉ. अंबेडकर के मुखौटे पहनकर संविधान को बचाने और संगठन की प्रमुख मांगों को जन-जन तक पहुँचाने का संकल्प लिया। प्रमुख मांगों में शामिल हैं—
• संविधान संरक्षण
• आरक्षण सीमा को 50% से बढ़ाना
• बैलट पेपर से चुनाव की वापसी
• वोट चोरी रोकने के उपाय
• जाति जनगणना
• वक्फ़ बोर्ड में हस्तक्षेप रोकना
• निजीकरण पर रोक और उसमें आरक्षण लागू
• उच्च न्यायपालिका में आरक्षण
• रिक्त पदों पर भर्ती
• भूमि आवंटन और समान शिक्षा
• ठेकेदारी प्रथा समाप्त करना
• धार्मिक स्वतंत्रता की गारंटी
• सरकारी परियोजनाओं में आरक्षण
• किसानों को एमएसपी की कानूनी गारंटी
• आदिवासियों के जल-जंगल-जमीन पर हमले रोकना
• पुरानी पेंशन योजना की बहाली

डोमा परिसंघ ने घोषणा की कि इन मुद्दों पर देशभर में अभियान और संघर्ष तेज किया जाएगा।

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