प्रतिभा 6/12/25

एजुकेशन फॉर भारत कॉन्क्लेव का शनिवार को सुबह 11 बजे शुभारंभ हुआ। इसके तीसरे सत्र में पूर्व दिग्गज क्रिकेटर वीरेंद्र सहवाग ने शिक्षा जगत से जुड़े अपने अनुभव साझा किए और बताया कि बच्चों में कौशल विकसित करना बेहद जरूरी है। इसके अलावा अलग-अलग क्षेत्रों के शिक्षाविदों ने शैक्षिक जगत के बदलते परिदृश्यों, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का बढ़ता इस्तेमाल, नए पाठ्यक्रमों की शुरुआत और डिजिटल दूरी को कम करने से जुड़े विचारों को साझा किया।
पहला सत्र- ब्रिजिंग द डिजिटल गैप: भारत-फर्स्ट एडटेक मॉडल्स पर चर्चा
इसके पहले सत्र में डिजिटल गैप और एडटेक मॉडल पर गंभीर चर्चा हुई। चर्चा के लिए Uolo के सीईओ पल्लव पांडेय, डीपीएस (मथुरा रोड) के प्रिंसिपल और रायन इंटरनेशनल की प्रिंसिपल सुधा सिंह शामिल हुईं। सभी वक्ताओं ने इस मुद्दे पर अपने विचार साझा किए।रायन इंटरनेशनल की प्रिंसिपल सुधा सिंह ने कहा, “भारत के लिए हम शिक्षा के क्षेत्र में इफार्ट करते रहेंगे और आगे बढ़ेंगे। देश में कई सारे चेंज आए हैं। हम काफी आगे बढ़ चुके हैं। बहुत कुछ अचीव करना है और हम बहुत कुछ अचीव कर चुके हैं। तकनीक के साथ हम बहुत आगे बढ़ चुके हैं।”
डीपीएस मथुरा रोड के प्रिंसिपल डॉ. राम सिंह ने सत्र के दौरान कहा, “तकनीक एकमात्र समाधान है जिससे हम बहुत ऊंचाई पर पहुंच सकते हैं। जहां दिक्कत है वहां अगर हम तकनीक पहुंचा सकें तो टीचिंग और लर्निंग बहुत प्रभावी होगी। इसके लिए पब्लिक और प्राइवेट पार्टनरशिप की जरूरत है। इसके लिए हमें रेडिनेस का माहौल बनाना होगा।”
दूसरा सत्र- शिक्षा क्षेत्र का बदलता परिदृश्य
दूसरे सत्र में जम्मू यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. उमेश राय ने अपने विचार रखे। उन्होंने बताया कि जम्मू यूनिवर्सिटी डिजाइन योर डिग्री कोर्स शुरू करने वाला पहला विश्वविद्यालय है। इसमें किसी भी विषय का छात्र में भाग ले सकता है। इसमें किसी के लिए कोई रोक नहीं है इस कोर्स की खास बात यह है कि इसमें छात्रों का पैशन ही उनकी डिग्री तय करेगा। उन्होंने कहा, “पूरा सिस्टम इसे सफल बनाने के लिए काम कर रहा है। जम्मू कश्मीर पूरे देश को शिक्षा के मामले रोशनी दिखा रहा है।”
तीसरा सत्र- सहवाग ने बताया शिक्षा जगत से जुड़ा अनुभव
तीसरे सत्र में दिग्गज क्रिकेटर वीरेंद्र सहवाग कॉन्क्लेव में चर्चा में जुड़े। क्रिकेट के मैदान से क्लासरूम तक: अनुशासन, लचीलापन और हाई-परफॉर्मेंस लर्नर्स तैयार करने के विषय से जुड़े इस सत्र में सहवाग ने कहा, “बच्चा रह सके, पढ़ सके और खेल सके ऐसा पिता का सपना था। अब वो सपना पूरा हो सका है। विश्व कप जीतने के बाद सहवाग इंटरनेशनल स्कूल शुरू हुआ। कई बच्चों ने नाम किया है। मनु भाकर भी हमारे स्कूल से हैं। मैं अपने पिता का सपना पूरा कर रहा हूं। जरूरतमंद बच्चों को फ्री एजुकेशन दे रहा है सहवाग इंटरनेशनल स्कूल।”
सहवाग ने बताया कि हम अपने स्कूल में कोशिश करते हैं कि बच्चों को एक स्किल जरूर सीखाएं, जो उसके भविष्य में काम आए। उन्होंने कहा, बच्चों से सफलता के बजाय स्किल्स पर बात करना जरूरी है। हमें ध्यान रखना होगा कि हम बच्चों को फेल्योर हैंडल करना सिखाएं। मेरी कोशिश होती है कि बच्चे मेरे साथ में अपनी क्रिकेट स्किल्स निखार सकें। बच्चों को पढ़ना भी जरूरी है। इसलिए उनके लिए पहले सीखना जरूरी है।
सहवाग ने कहा, “मेरी खुद से उम्मीद हैं और मैं खुद की उम्मीदों पर ही काम करता हूं। अगर मैने अपनी उम्मीदों से खुद को खुश कर दिया तो लोग अपने आप ही खुश हो जाएंगे। मैं क्रिकेट टीम से ड्रॉप हुआ था, लेकिन मैं निराश नहीं हुआ। यही सलाह मैं लोगों को भी देता हूं।”
‘हरमनप्रीत कौर से कहा था, हो सकता है तुम कप्तान बनो’
दिग्गज क्रिकेटर ने महिला क्रिकेट टीम के साथ अपनी एक पुरानी चर्चा को भी साझा किया। उन्होंने कहा, “मैं हरमनप्रीत कौर से मिला था। मैंने उनसे कहा था हो सकता है तुम एक दिन कप्तान बनो। और वो बनीं। जब वो टीम लीडर बनीं तो उन्होंने मुझे कॉल किया और कहा हमारे कोच बन जाइए। मैंने हमेशा उन्हें मोटिवेट किया और कहा एक दिन रिजल्ट बदलेंगे। और रिजल्ट बदला उन्होंने कर दिखाया।
उन्होंने कहा, “अगर हमें खेल से प्यार है तो हम डिप्रेशन में कभी नहीं जा सकते हैं। इसलिए हमें अपने काम से प्यार करना चाहिए। हमें उसमें पैसा नहीं देखना चाहिए। इसके लिए मैं विराट का उदाहरण देता हूं।”
‘साल में सिर्फ 70 दिन काम करता हूं’
सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है खुश रहना। इसलिए मैं साल में सिर्फ 70 दिन काम करता हूं। सहवाग ने सत्र के दौरान चला जाता हूं किसी के धुन में गाना भी गुनगुनाया।
सचिन ने कहा था- घरवालों को एक घंटा टीवी पर दिख जा
अपना एक पुराना किस्सा याद करते हुए सहवाग बोले- सचिन ने मेरे से कहा था कि तू रन बनाने पर ध्यान न दे, बस एक घंटा पिच पर रह, जिससे तेरे घर वाले तुझे एक घंटा टीवी पर देख सकें। और एक घंटा रुका तो रन बन ही जाएंगे।चौथा सत्र- टीचर्स 2.0: टेक-एआई सक्षम मेंटर
चौथे सत्र में लोटस वैली स्कूल की प्रिंसिपल इंदु यादव ने कहा, “हम ऐसे विद्यार्थियों की तलाश करते हैं, जो सच में इनोवेशन और डिस्कवर करना चाहते है। हमारे लिए यह जानना जरूरी है कि स्टूडेंट का लेवल क्या है । सबकी क्षमताएं अलग-अलग होती है। इसलिए हम तकनीक का उपयोग करके उन्हें गहराई से जानते हैं।”
उन्होंने कहा, “हमारे लिए यह जरूरी है कि हमारे स्टूडेंट की लेवल क्या है, सबके पास एक जैसी क्षमता नहीं होती है । बच्चों में अवेयरनेस बहुत जरूरी है।
दूसरी तरफ भारत में गूगल फॉर एजुकेशन के क्षेत्रीय प्रबंधक हेमंत भल्ला ने कहा, “लोगों को यह लगता है एआई लोगों को डंब बना रहा है, लेकिन ऐसा नहीं है। एआई हमें वही बताता है जो हमारी किताब में लिखा होता है।” उन्होंने आगे कहा, “जेमिनी और नोटबुक एलएम पढ़ाई की दुनिया में कई बदलाव लेकर आए हैं। आप बुक अपलोड कर उससे जुड़े सवाल पूछ सकते है। वह बुक के अनुसार जवाब दे सकता है। ये सुविधाएं शिक्षा की दुनिया में बड़े बदलाव ला सकती हैं।”
पांचवां सत्र- कैंपस टू करियर: स्किल्स, एआई एंड एंप्लॉयबिलिटी
डीपीएस की पूर्व प्रिंसिपल पद्मा श्रीनिवासन ने सत्र के दौरान कहा, “आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए जीवन को आसान बनाने की दिशा में काम होना चाहिए। इसे केवल एक एप्लीकेशन के तरह इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।” उन्होंने कोरोनावायरस महामारी के समय का जिक्र करते हुए कहा, “कोविड दौरान हम हर तरह की लर्निंग को ऑनलाइन लेकर आए। यह हमारी उपलब्धि थी। टीचर्स ने उस दौरान नई तकनीक का बेहतर इस्तेमाल सीखा। हमें कोविड के दौरान मिली सीख को आगे इस्तेमाल करते हुए आगे बढ़ना चाहिए।”
शिक्षा व्यवस्था के बदलते तरीकों को लेकर पद्मा ने कहा, “छात्रों को रटने पर नहीं व्यावहारिक तौर पर उसे सीखने पर ध्यान देना चाहिए। टीचर की मदद लेकर चीजों को बेहतर समझना चाहिए। पैरेंट्स की जिम्मेदारी है कि दुनिया में क्या चल रहा है वे उससे अवगत रहें और अपने बच्चे को उस दिशा में बढ़ने के लिए प्रेरित करते रहें।”
दूसरी तरफ सुजलॉन ग्रुप के राजेंद्र मेहता ने कहा कि डिजिटल चीजों के एडॉप्ट किया जाना चाहिए। शिक्षा के क्षेत्र में चीजों को ऑटोमेशन की ओर ले जाना चाहिए।
रेवेन्यू इंटरनेशनल स्किल यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. जवाहर सुरिसेट्टी ने कहा, “21वीं सदी के बच्चों को 20वीं सदी के टीचर पढ़ा रहे है। यहां AI बड़ी भूमिका बढ़ा सकता है। इंडस्ट्री को सरकार ने शिक्षा के लिए जो डिलीवर करने को कहा है, उसे अमल में लाने की कोशिश होनी चाहिए।” उन्होंने आगे कहा, “छात्र यदि कैपेबल नहीं हुए तो दिक्कत होगी, हमें इसका ध्यान रखना होगा। बच्चा कंटेंट को कैसे कंज्यूम कर रहा है, उसका इस्तेमाल कैसे कर रहा है यह मायने रखता है।”
छठा सत्र- नई शिक्षा नीति लागू करने और इसके भविष्य पर यूजीसी के पूर्व प्रमुख ने दिया ब्योरा
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के पूर्व चेयरमैन प्रो. एम जगदीश कुमार ने इस सत्र में नई शिक्षा नीति (एनईपी) को लागू करने से जुड़ी चुनौतियों और इसके भविष्य को लेकर अहम बातें साझा कीं। उन्होंने विवेकानंद के वक्तव्य को याद करते हुए कहा कि शिक्षा का लक्ष्य खुद को ढूंढना होना चाहिए। उन्होंने बताया कि 1800 में ऐसे कई स्कूल थे, जो लिखना-पढ़ना और दूसरे कौशल सिखाते थे। हमें आज के दौर में भी ऐसे स्कूलों की जरूरत है। हमें वेद और उपनिषद को आधार बना कर शिक्षा को बेहतर बनाना चाहिए। शिक्षा क्षेत्र रूप में डिजाइन हो जो हमारी संस्कृति से जुड़ा रहे साथ आधुनिक बदलावों को भी अपनाकर नई दुनिया में हमें आगे ले जाए।






