नई दिल्ली, 13 दिसंबर 2025
By: Varsha Chamoli
(Census 2027) देश के विकास की दिशा निर्धारित करने वाला एक नया कंपास (निर्देशक संकेत) साबित होगी। उन्होंने कहा कि इस जनगणना के परिणामों से सरकार को देश के प्रत्येक हिस्से की जनसांख्यिकीय तथ्य-और-आंकड़े मिलेंगे, जो भविष्य की विकास योजनाओं और नीतियों को अधिक सटीक रूप से आकार देंगे।
अमित शाह ने कहा कि जनगणना 2027 से प्राप्त डेटा “मोदी सरकार के विकास दृष्टिकोण को तेज गति देगा” और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘सबका साथ, सबका विकास’ के सूत्र को साकार करने में मदद करेगा। 
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इस विशाल जनगणना के लिए ₹11,718.24 करोड़ रुपये का बजट मंजूर किया है, जो इसे प्रशासनिक और सांख्यिकीय दृष्टि से दुनिया की सबसे बड़ी कवायद बनाता है। 
इस बार यह प्रक्रिया पहली बार डिजिटल रूप में संचालित होगी — यानी डेटा संग्रहण और विवरणीकरण मोबाइल ऐप्स और डिजिटल उपकरणों से किया जायेगा, जिससे जानकारी के संकलन में समय, संसाधन और सटीकता के सभी पहलू सुधरेंगे। 
पहले से अलग क्या?
डिजिटल-प्राथमिकता
जनगणना का यह संस्करण देश का पहला डिजिटल-फर्स्ट सेंसस होगा, जहाँ अधिकांश जानकारी इलेक्ट्रॉनिक रूप से एकत्र की जाएगी। 
जाति-गणना
इस बार जातिगत आंकड़ों का भी संग्रह किया जायेगा, ताकि सामाजिक-आर्थिक योजनाओं को बेहतर रूप से तैयार किया जा सके। 
दो चरणों में पूरा होगा कार्य
पहला चरण — हाउस-लिस्टिंग और हाउसिंग जनगणना — 2026 में अप्रैल से सितंबर के बीच होगा, जबकि दूसरा चरण — जनसंख्या की गिनती — मुख्यतः फरवरी 2027 में संचालित होगा। 
कर्क तकरीबन 30 लाख गणनाकर्ता
लगभग 30 लाख enumerators (गणनाकर्ताओं) को नियुक्त किया जाएगा, जो हर घर का दौरा करेंगे और घर-घर जाकर आवश्यक जानकारियाँ इकट्ठा करेंगे। 
क्यों महत्वपूर्ण है ये जनगणना
• पिछले दशक में हुई जनगणना 2011 में हुई थी। कोविड-19 महामारी के कारण 2021 की जनगणना स्थगित हो गयी थी, इसलिए अब 2027 की यह प्रक्रिया और भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। 
• देश के सामाजिक और आर्थिक ढांचे में बड़े बदलाव के मद्देनज़र ताज़ा डेटा उपलब्ध कराना आवश्यक है, जिससे सरकार योजनाओं को अधिक सूक्ष्म और स्पष्ट रूप से लागू कर सके।
सरकार का मानना है कि Census 2027 सिर्फ़ आंकड़ों का संग्रह नहीं, बल्कि एक रणनीतिक उपकरण है — जिसके सहारे विकास, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और जनसंख्या से सम्बंधित नीतियों की रीढ़ बनाई जाएगी। अमित शाह का यह बयान इस प्रतिज्ञा को प्रतिबिंबित करता है कि योजनाएं अब और भी वास्तविक, व्यापक और लक्षित होंगी।









