
कमला नेहरू कॉलेज में तीन दिवसीय राष्ट्रीय युवा संवाद का शुभारंभ, न्यायमूर्ति ए.के. गोयल ने कहा – “संविधान जीवन का दर्शन है”
नई दिल्ली, 7 नवम्बर 2025:
वर्षा चमोली
दिल्ली विश्वविद्यालय के कमला नेहरू कॉलेज में शुक्रवार को “युवा” संगठन द्वारा आयोजित तीन दिवसीय वार्षिक युवा संवाद “विमर्श 2025” का भव्य उद्घाटन हुआ। इस वर्ष विमर्श का विषय रखा गया — “संविधान: भारत की आत्मा (Samvidhan – The Soul of Bharat)”, जिसमें देशभर से आए युवा, शिक्षाविद् और विचारक एक मंच पर जुटे ताकि संविधान के मूल्यों और उसकी जीवंतता पर सार्थक विमर्श किया जा सके।
कार्यक्रम का शुभारंभ दक्षिण भारत की पारंपरिक नृत्य प्रस्तुति से हुआ, जिसने भारतीय संस्कृति की विविधता और एकता का संदेश दिया। इसके बाद महाराष्ट्र के लोकनृत्य ने पूरे सभागार को उत्साह से भर दिया। प्रारंभिक सत्र में प्री-विमर्श प्रतियोगिताओं के विजेताओं को सम्मानित भी किया गया।
विचारों की श्रृंखला की शुरुआत करते हुए ‘युवा’ के प्रतिनिधि कविंदर तालियान ने संगठन के उद्देश्य और उसकी यात्रा का परिचय दिया। उन्होंने कहा, “जैसी दिशा युवाओं को मिलेगी, वैसी ही देश की दशा होगी।”
विमर्श की संयोजक डॉ. प्रतिभा त्यागी ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए बताया कि यह संवाद युवाओं में संवैधानिक मूल्यों को आत्मसात करने का माध्यम बनेगा। इसी अवसर पर कैंपस क्रॉनिकल की वार्षिक पत्रिका “संविधान – द सोल ऑफ भारत” का लोकार्पण किया गया।
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि प्रो. अशोक कुमार नागावत (कुलपति, डीएसईयू) ने अपने उद्बोधन में कहा कि संविधान केवल शासन का दस्तावेज नहीं, बल्कि यह समाज को दिशा देने वाला जीवंत सिद्धांत है। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे संविधान की भावना को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं।
कमला नेहरू कॉलेज की प्राचार्या प्रो. डॉ. पवित्रा भारद्वाज ने कहा, “संविधान केवल एक कानूनी दस्तावेज नहीं, बल्कि हमारे देश की आत्मा है। इसकी रक्षा और पालन करना हम सभी नागरिकों का कर्तव्य है।”
दिल्ली विश्वविद्यालय के डीन ऑफ कॉलेजेज प्रो. बालाराम पाणी ने विमर्श जैसे आयोजनों को युवाओं के लिए प्रेरणादायक बताया। उनके अनुसार, ऐसे मंच युवा पीढ़ी में संवाद, चिंतन और जिम्मेदारी की भावना को प्रोत्साहित करते हैं।
मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता पूर्व न्यायधीश, न्यायमूर्ति ए.के. गोयल ने अपने विचार साझा करते हुए कहा,
“भारत का संविधान विश्व के सबसे जीवंत संविधानों में से एक है। इसमें केवल शासन की संरचना नहीं, बल्कि जीवन का दर्शन भी निहित है। संविधान के मूल्यों को हम अपने आचरण में उतारें — यही सच्ची श्रद्धांजलि होगी।”
समापन सत्र में डॉ. प्रतिभा त्रिपाठी ने सभी अतिथियों, शिक्षकों और विद्यार्थियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि “विमर्श 2025” युवाओं के विचारों का ऐसा संगम है जो भारत के भविष्य की दिशा तय करेगा।






