By Varsha Chamoli
Published : November 30, 2025

GSST/डेस्क: चुनाव आयोग ने देश के 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) प्रक्रिया की अवधि एक हफ्ते के लिए बढ़ा दी है। आयोग ने शनिवार को बताया कि अब अंतिम मतदाता सूची 14 फरवरी 2026 को जारी की जाएगी।
पहले तय कार्यक्रम के अनुसार वोटर सत्यापन यानी एन्यूमरेशन पीरियड 4 दिसंबर तक खत्म होना था, लेकिन अब यह 11 दिसंबर तक जारी रहेगा। इसी तरह, ड्राफ्ट वोटर लिस्ट, जिसे 9 दिसंबर को प्रकाशित किया जाना था, अब 16 दिसंबर को जारी की जाएगी।
SIR की यह कवायद 28 अक्टूबर से शुरू हुई थी, जिसके तहत नए वोटरों के नाम जोड़ना, गलतियाँ सुधारना और मृत या स्थानांतरित वोटरों के नाम हटाना शामिल है।
फॉर्मों का 99.53% वितरण पूरा
चुनाव आयोग के अनुसार, SIR के तहत उपयोग किए जा रहे लगभग 51 करोड़ फॉर्मों में से 99.53% फॉर्म घर-घर जाकर लोगों तक पहुंचा दिए गए हैं। इनमें से करीब 79% फॉर्मों का डिजिटल एंट्री कार्य भी पूरा कर लिया गया है।
यानी BLO द्वारा घरों से जुटाई गई जानकारी—नाम, पता और अन्य विवरण—ऑनलाइन सिस्टम में दर्ज किए जा चुके हैं।
कांग्रेस का आरोप: BLO की मौतें ‘हत्या जैसी परिस्थितियाँ
इस प्रक्रिया को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है। कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने आरोप लगाया कि SIR के दौरान काम के अत्यधिक बोझ के चलते जिन BLO की मौत हुई, वह “सिर्फ दुर्घटनाएँ नहीं बल्कि दिनदहाड़े हुई हत्याओं जैसी” हैं।
उनके अनुसार, पिछले 20 दिनों में 26 BLO की मौतें हुई हैं।
उन्होंने गोंडा जिले के BLO विपिन यादव का मामला भी उठाया और दावा किया कि परिवार के मुताबिक उन पर ‘पिछड़े वर्ग के लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटाने’ का दबाव था। सुप्रिया ने कहा कि SIR जैसी बड़ी प्रक्रिया को जल्दबाज़ी में करना खुद लोकतंत्र के लिए नुकसानदेह है और “वोटर लिस्ट में हेरफेर करने का सबसे आसान तरीका” बन सकता है।
मामला सुप्रीम कोर्ट में, 2 दिसंबर को अगली सुनवाई
SIR को लेकर दायर याचिकाएँ सुप्रीम कोर्ट में भी पहुँची हैं। तमिलनाडु, केरल और पश्चिम बंगाल सरकारों ने इस प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए याचिकाएँ दायर की हैं।
सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग ने कोर्ट को बताया कि “राजनीतिक पार्टियाँ SIR को लेकर अनावश्यक डर फैला रही हैं।”
चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग से 1 दिसंबर तक जवाब माँगा है।
• केरल की याचिका पर अगली सुनवाई — 2 दिसंबर
• तमिलनाडु की याचिका पर सुनवाई — 4 दिसंबर
• पश्चिम बंगाल की याचिका पर सुनवाई — 9 दिसंबर (इसी दिन राज्य की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट भी जारी की जाएगी)
पीठ ने यह भी कहा कि यदि राज्यों के पास मजबूत तर्क होंगे, तो कोर्ट तारीख बढ़ाने पर विचार कर सकता है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि पहली बार SIR होने मात्र से इसे चुनौती देना उचित आधार नहीं बन जाता।
