पश्चिम एशिया में बढ़ता टकराव, विश्व युद्ध की संभावना को लेकर दुनिया की बढ़ी चिंता
नई दिल्ली ( Varsha )-
विगत कुछ समय से पश्चिम एशिया में युद्ध के हालात लगातार तेजी से बिगड़ते जा रहे हैं। इस्राइल और अमेरिका की संयुक्त सैन्य कार्रवाई के बाद ईरान की ओर से जवाबी हमले में मिसाइल और ड्रोन हमलों ने क्षेत्र को युद्ध जैसी स्थिति में ला खड़ा किया है। जवाबी हमलों के कारण कई इलाकों में भारी नुकसान और जनहानि की खबरें भी सामने आई हैं। आरोप यह भी लग रहे हैं कि यदि ईरान पर हमला नही किया गया होता तो वह अपने परमाणु कार्यक्रम में सफल हो जाता।
इसी बीच Benjamin Netanyahu ने बड़ा बयान देते हुए कहा कि ईरान का परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम सिर्फ इस्राइल ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए गंभीर खतरा है। नेतन्याहू ने स्पष्ट किया कि इस्राइल की सैन्य कार्रवाई का उद्देश्य केवल अपनी सीमाओं की रक्षा करना ही नहीं है बल्कि वैश्विक सुरक्षा को सुनिश्चित करना भी है।
नेतन्याहू ने बताया कि “ऑपरेशन रोअरिंग लायन” का तीसरा दिन चल रहा है, जिसे अमेरिका के सहयोग से शुरू किया गया है। और इस अभियान में उसे अप्रत्याशित सफलता भी प्राप्त हुई है।उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump का समर्थन और सहयोग के लिए आभार जताया।
बेइत शेमेश में मिसाइल हमला
प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने यह बयान उस समय दिया जब वे बेइत शेमेश शहर के दौरे पर थे। और उसी दौरान यहां ईरान की एक बैलिस्टिक मिसाइल रिहायशी इलाके में आ गिरी, जिसमें 9 लोगों की मौत और 20 से अधिक लोग घायल हो गए। यह शहर यरुशलम के करीब स्थित है।
‘ खतरा सिर्फ इस्राइल तक सीमित नहीं’
नेतन्याहू ने बताया कि ईरान खुले तौर पर इस्राइल और अमेरिका के खिलाफ बयानबाजी करता है, लेकिन उसका खतरा यूरोप तक भी फैल सकता है, जिससे पूरी दुनिया के लिए खतरा बन सकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ईरान परमाणु हथियार और लंबी दूरी की मिसाइलें हासिल कर लेता है, तो यह पूरी मानवता के लिए बड़ा संकट बन सकता है।
हालात उस समय और बिगड़ गए जब संयुक्त कार्रवाई में ईरान के सर्वोच्च नेता Ali Khamenei की मौत की खबर सामने आई। इसके बाद ईरान ने इस्राइल पर कई हमले किए, जिनमें लगभग 10 लोगों की जान गई और कई अन्य घायल हुए।
फिलहाल पश्चिम एशिया की स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें आने वाले घटनाक्रम पर टिकी हैं।
इस गंभीर तनाव की स्थिति में भारत अपनी पैनी नज़र गड़ाए हुए है। जहां सरकार अपने नागरिकों की सुरक्षा की चिंता कर रही है वहीं पेट्रोलियम पदार्थों के व्यापार पर भी ध्यान दिए हुए है। विदित हो कि यदि युद्ध के हालात लंबी अवधि तक चलते हैं तो खाड़ी देशों, ईरान इराक से आने वाले तेल उत्पादों पर असर पड़ेगा।









