प्रतिभा सिंह नई दिल्ली 2026
पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग द्वारा प्रस्तावित SIR (Special Intensive Revision – विशेष गहन पुनरीक्षण) को लेकर राजनीतिक विवाद गहराता जा रहा है। इस प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची की दोबारा जांच और सत्यापन किया जाना है, लेकिन विपक्षी दलों ने इसे लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने आरोप लगाया है कि SIR के नाम पर बड़ी संख्या में वैध मतदाताओं के नाम हटाए जा सकते हैं। पार्टी नेताओं का कहना है कि इससे आम लोगों, खासकर अल्पसंख्यकों और प्रवासी मजदूरों को मतदान के अधिकार से वंचित किया जा सकता है। TMC ने इसे “लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कमजोर करने की साजिश” करार दिया है।
वहीं भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने SIR का समर्थन करते हुए कहा कि मतदाता सूची को शुद्ध और पारदर्शी बनाना बेहद जरूरी है। पार्टी का दावा है कि बंगाल में फर्जी और दोहरे मतदाताओं की संख्या बढ़ी है, जिसे रोकने के लिए SIR जरूरी कदम है।
चुनाव आयोग की ओर से स्पष्ट किया गया है कि SIR प्रक्रिया पूरी तरह नियमों के तहत होगी और किसी भी पात्र मतदाता का नाम बिना जांच के नहीं हटाया जाएगा। आयोग ने जनता से अपील की है कि वे अपने दस्तावेज समय पर जमा कर सत्यापन प्रक्रिया में सहयोग करें।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी चुनावों को देखते हुए SIR का मुद्दा बड़ा राजनीतिक हथियार बन सकता है। एक ओर इसे पारदर्शिता से जोड़ा जा रहा है, तो दूसरी ओर इसे राजनीतिक लाभ-हानि से भी जोड़ा जा रहा है।
फिलहाल राज्य में SIR को लेकर चर्चाओं और विरोध प्रदर्शनों का दौर जारी है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा पश्चिम बंगाल की राजनीति में और अधिक गर्माने की संभावना जताई जा रही है।









