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फिर आमने-सामने आए तेजस्वी-तेज प्रताप, खामोशी ने गहराई रिश्तों की दरार

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दिल्ली/ 9 जनवरी
रिपोर्ट: वर्षा चमोली

GSST/ डेस्क: दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में जमीन के बदले नौकरी मामले की सुनवाई के दौरान एक बार फिर राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के भीतर चल रही पारिवारिक और राजनीतिक खींचतान सामने आ गई। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव और उनके बड़े भाई तेज प्रताप यादव अदालत परिसर में आमने-सामने तो हुए, लेकिन दोनों के बीच किसी भी तरह की बातचीत नहीं हुई।

यह पहला मौका नहीं था जब दोनों भाइयों के बीच यह दूरी दिखी हो। इससे पहले बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान पटना एयरपोर्ट पर भी ऐसा ही दृश्य सामने आया था, जब तेज प्रताप यादव खरीदारी कर रहे थे और अचानक तेजस्वी यादव वहां पहुंचे, लेकिन तेज प्रताप ने छोटे भाई से कोई संवाद नहीं किया।

कोर्ट में कौन-कौन रहा मौजूद

अदालत के निर्देश पर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव, उनकी बहन और राज्यसभा सांसद मीसा भारती तथा बड़े भाई तेज प्रताप यादव व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में उपस्थित हुए। वहीं, राष्ट्रीय जनता दल सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी स्वास्थ्य कारणों के चलते वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सुनवाई से जुड़े।

तेजस्वी के साथ दिखे संजय यादव, बढ़ी सियासी चर्चा

कोर्ट परिसर में तेजस्वी यादव के साथ उनके करीबी और भरोसेमंद माने जाने वाले संजय यादव भी नजर आए। पार्टी और राजनीतिक हलकों में संजय यादव को तेजस्वी की रणनीतिक टीम का अहम हिस्सा माना जाता है। हालांकि, तेज प्रताप यादव की नाराजगी संजय यादव को लेकर जगजाहिर रही है।

राजनीतिक जानकारों के अनुसार, तेज प्रताप यादव के कई बयानों में इस्तेमाल किया गया “जयचंद” शब्द दरअसल संजय यादव पर ही परोक्ष हमला माना जाता है। यही वजह है कि परिवार और पार्टी के भीतर यह असहजता और गहरी होती नजर आ रही है।

पार्टी से बाहर, परिवार से भी दूरी

गौरतलब है कि लालू प्रसाद यादव पहले ही तेज प्रताप यादव को छह वर्षों के लिए पार्टी और परिवार दोनों से अलग करने का फैसला ले चुके हैं। यह निर्णय राजद की राजनीति में एक बड़े मोड़ के तौर पर देखा गया था, जिसने पारिवारिक विवाद को पूरी तरह सार्वजनिक कर दिया।

मीसा भारती की चुप्पी भी बनी चर्चा का विषय

इस पूरे घटनाक्रम के दौरान मीसा भारती काफी शांत नजर आईं। उन्होंने न तो मीडिया से कोई बातचीत की और न ही परिवार के किसी सदस्य से सार्वजनिक रूप से संवाद किया। राजनीतिक विश्लेषक इसे परिवार के भीतर संतुलन बनाए रखने की रणनीति के रूप में देख रहे हैं।

राजद के लिए संदेश

कोर्ट परिसर में दिखी यह खामोशी केवल एक पारिवारिक घटना नहीं, बल्कि राजद की भविष्य की राजनीति से जुड़ा संकेत मानी जा रही है। पार्टी के भीतर नेतृत्व, रणनीति और उत्तराधिकार को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच यह दृश्य विपक्ष को सवाल उठाने का मौका देता है।

अब यह देखना अहम होगा कि आने वाले समय में यह दूरी और गहराती है या राजनीतिक मजबूरियां यादव परिवार को फिर एक मंच पर लाने की कोशिश करेंगी।

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