नई दिल्ली/ 07 December 2025
By Varsha Chamoli
GSST/ डेस्क: देश के राष्ट्रगीत वंदे मातरम् को लेकर केंद्र की राजनीति फिर उबाल पर है। 150 वर्ष पूरे होने के मौके पर संसद में होने वाली विशेष चर्चा से पहले ही BJP, TMC और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। यह मुद्दा सिर्फ सांस्कृतिक बहस नहीं रह गया, बल्कि सीधा इतिहास, पहचान और राजनीतिक ध्रुवीकरण से जुड़ गया है।
BJP का कांग्रेस व नेहरू पर हमला
नेहरू को लेकर भी सियासत गर्म
भारतीय जनता पार्टी ने एक बार फिर 1937 में कांग्रेस द्वारा वंदे मातरम् के कुछ अंशों को हटाए जाने के फैसले को विवाद का केंद्र बनाया है।
BJP नेताओं का कहना है कि जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व में बैठक में गीत के उन हिस्सों को हटा दिया गया था, जिनमें देवी-स्तुति वाले श्लोक शामिल थे।
पार्टी का आरोप है कि यह निर्णय “धार्मिक appeasement” और “राष्ट्रगीत की आत्मा से छेड़छाड़” था।
BJP इसे इतिहास के “सुधार” का मुद्दा बताकर उठाने में लगी है और आने वाली चर्चा में इसे जोरदार तरीके से रखने की तैयारी कर रही है।
कांग्रेस का पलटवार
कांग्रेस ने BJP पर “चुनावी राजनीति के लिए इतिहास को तोड़ने-मरोड़ने” का आरोप लगाया है।
पार्टी का कहना है कि BJP सिर्फ वही बातें उठाती है जिससे समाज में विभाजन गहरा हो।
कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि राष्ट्रवाद पर भाषण देने वाले RSS-BJP ने स्वतंत्रता संग्राम के समय वंदे मातरम् के साथ कोई संबंध नहीं दिखाया, जबकि अब वे खुद को राष्ट्रगीत के सबसे बड़े संरक्षक के रूप में पेश कर रहे हैं।
TMC बनाम BJP: बंगाल की पहचान की लड़ाई
पश्चिम बंगाल में यह विवाद अलग ही रूप ले चुका है।
TMC का कहना है कि BJP वंदे मातरम् को राजनीतिक हथियार बनाकर बंगाली सांस्कृतिक पहचान को चुनौती दे रही है।
BJP बंगाल में इस मुद्दे को “राष्ट्रवाद” से जोड़कर जोर पकड़ने की कोशिश में है, जबकि TMC “बांग्ला अस्मिता” और क्षेत्रीय संस्कृति की बात कर रही है।
इससे दोनों दलों में तीखा टकराव बन गया है।
कल संसद में हो सकती है बड़ी बहस
सोमवार को संसद के दोनों सदनों में वंदे मातरम् पर विशेष चर्चा होनी है।
चर्चा लगभग 10 घंटों तक चलने की संभावना है।
प्रधानमंत्री चर्चा की शुरुआत करेंगे।
विपक्ष के कई बड़े नेता जवाब देंगे।
राजनीतिक हलकों में माना जा रहा है कि यह बहस 150 साल पूरे होने पर सम्मान से ज्यादा, आने वाले राज्यों और राष्ट्रीय राजनीति की दिशा तय करने वाली बहस बन सकती है।
क्यों बढ़ रहा है वंदे मातरम् का विवाद?
विशेषज्ञों के अनुसार—
चुनावी मौसम में सांस्कृतिक मुद्दे राजनीति को नई दिशा देते हैं।
राष्ट्रगीत जैसे प्रतीक भावनात्मक होते हैं, इसलिए दल इन्हें अपनी कथा गढ़ने के लिए उपयोग करते हैं।
बंगाल, असम और उत्तरी भारत में पहचान-आधारित राजनीति इन विषयों को और संवेदनशील बनाती है।
नतीजा: सांस्कृतिक गीत, सियासत के केंद्र में
एक ओर देश वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने का जश्न मना रहा है, दूसरी ओर इसे लेकर नई राजनीतिक लड़ाई खड़ी हो गई है।
कल संसद में इसका सीधा असर दिखाई देगा कि यह बहस –
सांस्कृतिक सम्मान की होगी, या राजनीतिक टकराव की









