प्रतिभा सिंह 1/12/25

यह कहना अभी जल्दी होगा कि वे इसी ढर्रे पर आगे बढ़ेंगे या नहीं, लेकिन अगर यह बदलाव स्थायी है तो शायद इतिहास इस मैच को उस मैच के रूप में याद रखेगा, जहां विराट कोहली ने अपने वनडे करियर का अंतिम रूप चुना।रांची के मैदान पर रविवार, 30 नवंबर को कुछ असाधारण हुआ। विराट कोहली, जिन्हें उनकी नियंत्रित बल्लेबाजी, रनिंग बिटवीन द विकेट्स और धैर्यपूर्ण बिल्ड-अप के लिए जाना जाता है, अचानक एक नए किरदार में नजर आए। उनकी पारी की शुरुआत ही दो दमदार छक्कों से हुई, कुछ ऐसा जो कोहली शायद ही कभी अपने शुरुआती ओवरों में करते हैं, लेकिन इसी बदलाव ने चर्चा को जन्म दिया कि क्या विराट अपने खेल को बदल रहे हैं? और क्या ये बदलाव 2027 वनडे विश्व कप की तैयारी का हिस्सा है?
पारी की शुरुआत: एंकर नहीं, अटैकर
यशस्वी जायसवाल के जल्दी आउट होने के बाद आमतौर पर कोहली पारी को संभालने की जिम्मेदारी उठाते हैं, लेकिन इस बार उन्होंने शुरू से ही आक्रामक रुख अपनाया। उन्होंने दक्षिण अफ्रीकी पेसर्स को बैकफुट और फ्रन्टफुट दोनों पर चुनौती दी और पिच के व्यवहार को देखते हुए तुरंत अपने गियर बदल लिए। यह कोहली का वही अंदाज था जिसे उन्होंने बहुत कम मौकों पर अपनाया है, लेकिन हर बार क्रिकेट जगत को हैरान किया है।क्या ये रणनीति का बदलाव?
यह सवाल इस पारी को खास बनाता है कि क्या यह सिर्फ कंडीशन के हिसाब से खेला गया आक्रामक नॉक था? या कोहली अब अपनी वनडे बल्लेबाजी को तीसरे चरण में ले जा रहे हैं, जहां अनुभव और शक्ति एक साथ दिखाई दे? रांची वनडे कोहली के वनडे करियर का सिर्फ तीसरा मौका था जहां उन्होंने सात छक्के लगाए। इससे पहले उन्होंने ऐसा 2023 में श्रीलंका के खिलाफ (आठ छक्के) और 2013 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ (सात छक्के) किया था। इन सभी पारियों में एक पैटर्न है, जब कोहली अपने शॉट्स को आजादी से खेलते हैं, तो वो सिर्फ रन नहीं बनाते, मैच की कहानी बदल देते हैं।
रन-एक्सेलरेशन: तकनीक वही, इरादा नया
इस पारी में कोहली की शॉट-सिलेक्शन बेहद खास रही। उसी लेंथ की गेंदों पर उन्होंने तीन अलग-अलग शॉट खेले। एक शॉट लॉन्ग ऑफ, दूसरा शॉट लॉन्ग ऑन और तीसरा शॉट मिड विकेट पर खेला गया। यही वजह थी कि दक्षिण अफ्रीका के गेंदबाज फील्ड सेट करने में असफल रहे। कोहली सिर्फ रन नहीं बना रहे थे, वो पेसर्स और फील्डिंग प्लान्स को क्लासरूम में पढ़ा रहे थे।रोहित शर्मा से तुलना: दोनों की रणनीति में बदलाव
हाल ही में ऑस्ट्रेलिया दौरे पर रोहित शर्मा ने भी अपनी बल्लेबाजी के अंदाज में बदलाव किया था। उन्होंने अपनी हिट-या-मिस आक्रामक शैली से हटकर फिर से क्लासिकल वनडे एंकर की भूमिका निभाई थी और अब कोहली इसके उलट, एनर्जी-इनिशिएटेड वनडे मॉडल पर चलते दिखे। क्या यह महज संयोग है? शायद नहीं। भारतीय टीम फिलहाल बदलाव के दौर में है, जहां शुभमन गिल, श्रेयस अय्यर और तिलक वर्मा जैसे खिलाड़ी भविष्य की तैयारी में हैं। ऐसे में कोहली जानते हैं कि प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है और बदलाव जरूरी है।
विशेषज्ञों की राय: क्यों ये पारी ऐतिहासिक हो सकती है
इस पारी पर दो महान खिलाड़ियों की टिप्पणियां चर्चा में रहीं। महान सुनील गावस्कर ने कहा कि कोहली ने सीधे बल्ले से खेला और आत्मविश्वास से शॉट खेला। यही कोहली को अलग बनाता है।’ वहीं, दक्षिण अफ्रीका के दिग्गज पेसर डेल स्टेन ने कहा कि कोहली ने कुछ भी जबरदस्ती नहीं किया। टाइमिंग और कंट्रोल अविश्वसनीय था।’शारीरिक फिटनेस + नई मानसिकता- नया कोहली?
135 रन, 11 चौके और सात छक्के ने दर्शाया कि कोहली अपनी फिटनेस और माइंडसेट दोनों को नई दिशा दे चुके हैं। तेजी से दौड़कर लिए गए टू-रन अब भी उनकी पहचान हैं, लेकिन इस बार बाउंड्री काउंट, रनिंग को पीछे छोड़ते दिखी। रांची की यह पारी सिर्फ एक शतक नहीं थी, बल्कि यह संदेश था कि कोहली अभी खत्म नहीं हुए हैं। साथ ही वह अपने अंदाज को भी बदल रहे हैं। 2027 का विजन भी साफ है। यह कहना अभी जल्दी होगा कि वे इसी ढर्रे पर आगे बढ़ेंगे या नहीं, लेकिन अगर यह बदलाव स्थायी है तो शायद इतिहास इस मैच को उस मैच के रूप में याद रखेगा, जहां विराट कोहली ने अपने वनडे करियर का अंतिम रूप चुना।






