दिल्ली/ उत्तराखंड
9 जनवरी
GSST/ डेस्क: उत्तराखंड में मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में चलाया जा रहा “जन–जन की सरकार, जन–जन के द्वार” अभियान प्रदेश में पारदर्शी प्रशासन, त्वरित समाधान और सुशासन का प्रभावशाली मॉडल बनकर सामने आया है। इस पहल के तहत सरकार सीधे जनता के बीच पहुँचकर उनकी समस्याओं को सुनने और समाधान करने का कार्य कर रही है।
09 जनवरी 2026 तक प्रदेश के सभी 13 जनपदों में कुल 297 जनसेवा शिविरों का आयोजन किया जा चुका है। इन शिविरों में 2 लाख 13 हजार से अधिक नागरिकों ने भागीदारी की, जो इस अभियान की व्यापक सफलता को दर्शाता है।
इन शिविरों के दौरान जनता से 24,000 से अधिक शिकायतें प्राप्त हुईं, जिनमें से 16,000 से ज्यादा मामलों का त्वरित निस्तारण किया जा चुका है। यह आँकड़े दर्शाते हैं कि सरकार केवल समस्याएँ सुन ही नहीं रही, बल्कि उन पर तेज़ी से कार्यवाही भी कर रही है।
अभियान के माध्यम से नागरिकों को सरकारी सेवाओं से जोड़ने में भी उल्लेखनीय सफलता मिली है। विभिन्न प्रकार के प्रमाण पत्रों के लिए 33,000 से अधिक आवेदन प्राप्त हुए, जबकि राज्य सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ 1.21 लाख से अधिक लोगों तक सीधे पहुँचा।
मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि यह अभियान केवल एक प्रशासनिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सेवा, समाधान और संवेदनशीलता की सोच का प्रतीक है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि दूरदराज़ और ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों को भी सरकारी योजनाओं का लाभ बिना किसी परेशानी के मिले।
अल्मोड़ा, हरिद्वार, टिहरी, पौड़ी, उधम सिंह नगर, देहरादून सहित प्रदेश के सभी जिलों में शिविरों के दौरान भारी जनभागीदारी देखने को मिली, जो सरकार और जनता के बीच बढ़ते विश्वास को दर्शाता है।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी शिकायतों और आवेदनों का समयबद्ध, पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण समाधान सुनिश्चित किया जाए, ताकि शासन व्यवस्था पर जनता का भरोसा और मजबूत हो।
राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि आने वाले समय में भी इसी प्रतिबद्धता के साथ जनता तक पहुँच बनाई जाएगी और सुशासन व जनकल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी।









