देश में मानसून की सुस्त चाल के कारण जून 2026 पिछले 126 वर्षों के रिकॉर्ड में दूसरा सबसे सूखा जून साबित हो रहा है। 21 जून तक देशभर में केवल 57.4 मिमी बारिश दर्ज की गई है, जो सामान्य से 42.2% कम है। इससे पहले वर्ष 2009 में जून महीने में सामान्य से 49% कम वर्षा रिकॉर्ड की गई थी।कम बारिश का असर खरीफ फसलों की बुआई पर दिखाई देने लगा है। विशेषज्ञों का मानना है कि जुलाई और अगस्त की बारिश ही अब कृषि क्षेत्र के लिए राहत लेकर आ सकती है।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार बंगाल की खाड़ी में सक्रिय हुआ नया मौसमीय सिस्टम मानसून को आगे बढ़ाने में मदद करेगा। इसके प्रभाव से आने वाले दिनों में छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, ओडिशा, झारखंड, बिहार और तेलंगाना में वर्षा गतिविधियां बढ़ने की संभावना है।
जहां देश के कई हिस्से बारिश की कमी से जूझ रहे हैं, वहीं मेघालय में भारी वर्षा का दौर जारी है। खासी हिल्स जिले के मॉसिनराम में 24 घंटे के भीतर 530 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई। यह मात्रा राजस्थान के कुछ शुष्क क्षेत्रों में छह महीने की औसत वर्षा के बराबर मानी जाती है।
राजस्थान के श्रीगंगानगर में रविवार को ओलावृष्टि हुई। दूसरी ओर मध्य प्रदेश के जबलपुर, नरसिंहपुर, मंडला, उमरिया और डिंडौरी समेत पांच जिलों में हीटवेव का अलर्ट जारी किया गया है।उत्तर प्रदेश के 38 जिलों में भी लू चलने की संभावना जताई गई है। प्रयागराज, वाराणसी, बहराइच और बांदा में तापमान 42 डिग्री सेल्सियस से अधिक दर्ज किया गया।
उत्तर प्रदेश, पूर्वी मध्य प्रदेश और विदर्भ के कई क्षेत्रों में अधिकतम तापमान 40 से 42 डिग्री सेल्सियस के बीच बना हुआ है। राजस्थान, हरियाणा, गुजरात, बिहार, झारखंड, ओडिशा और तेलंगाना के कुछ इलाकों में भी इसी तरह की गर्मी दर्ज की जा रही है।
विदर्भ के आठ जिलों में दिन के साथ-साथ रात में भी गर्म हवाएं चलने की चेतावनी जारी की गई है।
12 जून तक खरीफ फसलों की बुआई 3.9 प्रतिशत घटकर 84.6 लाख हेक्टेयर रही।
दाल और कपास प्रभावित
दालों का रकबा 43.2 प्रतिशत और कपास का क्षेत्र 28 प्रतिशत कम हुआ है।धान की बुआई में बढ़तधान की बुआई में 28.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
जलाशयों में राहत
देश के प्रमुख जलाशयों में जल भंडारण क्षमता का 28.3 प्रतिशत पानी मौजूद है, जो पिछले 10 वर्षों के औसत से लगभग 16 प्रतिशत अधिक है।









