प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कार्यकाल 12 वर्ष पूर्ण कर 13वें वर्ष में प्रवेश कर गया है। ये 12 वर्ष देश के किसी भी नेता के कार्यकाल से ज्यादा सफल रहे हैं, या यूं कहें कि ये 12 वर्ष सफलतम रहे हैं। क्योंकि इन 12 वर्षों में भारत ने एक राष्ट्र पुरुष के रूप में वो काम होते हुए देखें हैं, जिनकी कभी कल्पना भी नहीं की जा सकती थी। इसके लिए प्रमाण देने की आवश्यकता नहीं है। मिशन GYAN यानी गरीब-युवा-अन्नदाता-नारी शक्ति, इस पर ध्यान केंद्रित करने के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अगर किसी शब्द पर जोर दिया है तो वो है आत्मनिर्भर भारत।प्रधानमंत्री मोदी का मानना है कि हमारा देश आत्मनिर्भर होगा, तो हमें सबसे आगे खड़े होने से कोई नहीं रोक सकता। प्रधानमंत्री मोदी की इसी लाइन पर चल रहे हैं मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव। सीएम डॉ. यादव ने प्रदेश का आर्थिक स्थिति न केवल बेहतर किया है, बल्कि उसे और सुदृढ़ करने के लिए लगातार काम कर रहे हैं। उन्होंने राज्य को आर्थिक दिशा देने के लिए ग्लोबल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव और रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव जैसे नवाचार किए हैं।
मोदी सरकार के आत्मनिर्भर भारत मिशन में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम क्षेत्र को आर्थिक विकास का बड़ा इंजन माना जाता रहा है। बीते 12 वर्षों में इस दिशा में एमएसएमई सेक्टर , एक जिला एक उत्पाद योजना और जीआई टैग ने स्थानीय उत्पादों को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाई है। नमो सरकार के विजन और मोहन सरकार के मिशन से मध्यप्रदेश आज अपने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम, एक जिला-एक उत्पाद और जीआई टैग्स के दम पर देश के सबसे तेजी से आत्मनिर्भर होते राज्यों में गिना जा रहा है। मोहन सरकार के प्रयासों से एक तरफ जहां प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत हो रही है, वहीं कारीगरों और उद्यमियों को रोजगार मिलने के साथ ही ग्लोबल मार्केट में एमपी की धमक तेजी से बढ़ रही है।
एक जिला एक उत्पाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की उस दूरदर्शी सोच का हिस्सा है, जो किसी भी प्रदेश के हर जिले की अनोखी क्षमता को बढ़ावा देता है। एमपी की मोहन सरकार ने पीएम मोदी के पदचिन्हों पर चलते हुए इसे प्रदेश में प्रभावी ढंग से लागू किया है। राज्य में प्रत्येक जिले से एक प्रमुख उत्पाद चुना गया है। धार का बाग प्रिंट,छतरपुर के हस्तशिल्प, रीवा का सुंदरजा आम, मुरैना की गजक, शिवपुरीकी जैकेट, चंदेरी साड़ी सरीखे 26 उत्पादों का जीआई टैग प्राप्त हो चुका है। मोहन सरकार द्वारा उज्जैन में ओडीओपी प्रोडक्ट के लिए 284 करोड़ रुपए की लागत से यूनिटी मॉल बनाने की भी घोषणा हुई है। इन दिनों आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत के पीएम मोदी के मिशन पर आगे बढ़ते हुए मध्यप्रदेश के सभी जिलों की विशिष्ट पहचान को ओडीओपी के जरिए प्रमोट किया जा रहा है। इससे हर जिले का एक मुख्य उत्पाद राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में चमक रहा है। भोपाल की जरी-जरदोजी और जूट उत्पाद हो या धार के बाग प्रिंट, बुरहानपुर का केला हो या बड़वानी का अदरक,बालाघाट का चिन्नौर चावल हो या मंदसौर का लहसुन आज ओडीओपी के जरिए पूरे देश और दुनिया में जीआई टैग के जरिए यह अपनी विशेष पहचान बनाने में कामयाब हुआ है। सरकार द्वारा ओडीओपी के तहत इन उत्पादों के उत्पादन, प्रशिक्षण, ब्रांडिंग, पैकेजिंग और बाजार उपलब्ध करने की दिशा में मजबूती के साथ कार्य किया जा रहा है। मृगनयनी एम्पोरियम और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के जरिए इन उत्पादों की बिक्री बढ़ रही है और इसी का परिणाम है कि राष्ट्रीय स्तर पर ओडीओपी में मध्यप्रदेश ने रजत पदक हासिल किया है। एमपी सरकार वन डिस्ट्रिक-वन प्रोडक्ट को सशक्त बनाकर स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय पहचान दिलाने और अंतरराज्यीय सहयोग को गति देने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार के साथ भी विशेष सहयोग कर रही है।
जीआई टैग से उत्पादों की बाजार कीमत बढ़ती है, नकली उत्पादों से बचाव होता है और निर्यात संभावनाएं खुलती हैं। यह स्थानीय कारीगरों के ज्ञान और परंपरा को संरक्षित रखते हुए आर्थिक आत्मनिर्भरता प्रदान करता है। हाल के वर्षों में मध्यप्रदेश की पारंपरिक कलाओं, हथकरघा और कृषि उत्पादों को जीआई टैग मिलने से उनकी प्रामाणिकता और डिमांड दोनों तेजी मार्केट में से बढ़ी है। इससे नकली उत्पादों पर रोक लगी है और किसानों व कारीगरों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य मिल रहा है।
आज एमपी में 24 लाख से अधिक एमएसएमई इकाइयां सक्रिय हैं, जो सवा करोड़ से ज्यादा लोगों को रोजगार दे रही हैं। राज्य सरकार की बेहतर एमएसएमई प्रोमोशन स्कीम और एमएसएमई डेवलपमेंट पॉलिसी 2025 के तहत वित्तीय सहायता प्रदान करने, तकनीकी अपग्रेडेशन के साथ स्किल डेवलपमेंट और कॉमन फैसिलिटी सेंटर्स बढ़ाने की दिशा में ठोस काम किया जा रहा है। स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने की दिशा में ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं, युवाओं और आदिवासी समुदायों को जोड़ा जा रहा है जिससे पारंपरिक शिल्प और कृषि उत्पादों को भी नई पहचान मिल रही है। मोहन सरकार के प्रयासों से मध्यप्रदेश में एमएसएमई सेक्टर आज राज्य की अर्थव्यवस्था की बड़ी रीढ़ बन चुका है। मध्यप्रदेश सरकार की एमएसएमई विकास नीति, मध्यप्रदेश स्टार्ट-अप नीति एवं कार्यान्वयन योजना का प्रभाव धरातल पर दिखने लगा है। नई औद्योगिक नीतियों और वित्तीय सहायता, निवेश की बेहतरीन नीतियों के माध्यम से स्थानीय स्तर पर भारी निवेश आया है। 31 मार्च 2026 को 600 से अधिक एमएसएमई इकाइयों को सरकार द्वारा 375 करोड़ रुपए से अधिक की राशि का अंतरण किया गया है।









