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1 जून से पर्यटकों के लिए खुली फूलों की घाटी, प्रकृति प्रेमियों में बढ़ा उत्साह

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चमोली। उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित विश्व प्रसिद्ध फूलों की घाटी (वैली ऑफ फ्लावर्स) एक बार फिर प्रकृति प्रेमियों और पर्यटकों के स्वागत के लिए तैयार हो गई है।

1 जून से घाटी को आधिकारिक रूप से पर्यटकों के लिए खोल दिया गया है। इसके साथ ही देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों, ट्रेकर्स और फोटोग्राफी के शौकीनों की आमद शुरू हो गई है। हर वर्ष की तरह इस बार भी घाटी के खुलने का लंबे समय से इंतजार किया जा रहा था। घाटी खुलने के पहले ही सप्ताह में बड़ी संख्या में पर्यटकों ने यहां पहुंचकर हिमालय की गोद में बसे इस अद्भुत प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद लिया।

यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल फूलों की घाटी अपनी अनूठी जैव विविधता और दुर्लभ वनस्पतियों के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। समुद्र तल से लगभग 12 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित यह घाटी नंदा देवी बायोस्फीयर रिजर्व का हिस्सा है। करीब 87 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैली इस घाटी में सैकड़ों प्रजातियों के फूल और औषधीय पौधे पाए जाते हैं।

मानसून के दौरान जब यहां रंग-बिरंगे फूल खिलते हैं, तब पूरी घाटी किसी प्राकृतिक चित्रकला जैसी दिखाई देती है।विशेषज्ञों के अनुसार जुलाई और अगस्त के महीने फूलों की घाटी की यात्रा के लिए सबसे उपयुक्त माने जाते हैं। इस दौरान घाटी में ब्रह्मकमल, ब्लू पॉपी, कोबरा लिली, प्राइमुला, एनीमोनी सहित अनेक दुर्लभ प्रजातियों के फूल खिलते हैं। इन फूलों की खूबसूरती पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देती है। यही कारण है कि हर वर्ष हजारों की संख्या में देशी और विदेशी पर्यटक यहां पहुंचते हैं।पर्यटन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस वर्ष भी पर्यटकों की संख्या में अच्छी बढ़ोतरी की उम्मीद है।

चारधाम यात्रा के साथ-साथ फूलों की घाटी भी उत्तराखंड के प्रमुख पर्यटन आकर्षणों में शामिल है। घाटी खुलने से स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी गति मिलने की संभावना है। गोविंदघाट, घांघरिया और आसपास के क्षेत्रों में होटल, होमस्टे, टैक्सी सेवा, घोड़ा-खच्चर संचालकों और स्थानीय दुकानदारों को पर्यटन सीजन से रोजगार और आय के बेहतर अवसर मिलेंगे।

घाटी तक पहुंचने के लिए पर्यटकों को गोविंदघाट से लगभग 13 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर घांघरिया पहुंचना होता है। इसके बाद लगभग चार किलोमीटर का ट्रेक पूरा कर फूलों की घाटी तक पहुंचा जा सकता है। यह मार्ग प्राकृतिक दृश्यों, झरनों और हिमालयी वनस्पतियों से भरपूर है, जो यात्रा को और भी रोमांचक बना देता है।वन विभाग और प्रशासन ने पर्यटकों से पर्यावरण संरक्षण के नियमों का पालन करने की अपील की है। घाटी के भीतर प्लास्टिक ले जाने और कूड़ा फैलाने पर प्रतिबंध है।

अधिकारियों का कहना है कि फूलों की घाटी केवल एक पर्यटन स्थल ही नहीं, बल्कि एक संवेदनशील पारिस्थितिक क्षेत्र भी है, जिसकी जैव विविधता को सुरक्षित रखना सभी की जिम्मेदारी है।पर्यटन विशेषज्ञों का मानना है कि प्राकृतिक सौंदर्य, दुर्लभ वनस्पतियों और रोमांचक ट्रेकिंग अनुभव के कारण फूलों की घाटी उत्तराखंड पर्यटन की पहचान बन चुकी है।

घाटी के खुलने से राज्य के पर्यटन उद्योग को नई ऊर्जा मिलेगी और आने वाले महीनों में यहां पर्यटकों की संख्या में और वृद्धि देखने को मिल सकती है। प्रकृति प्रेमियों के लिए यह स्थान किसी स्वर्ग से कम नहीं माना जाता, जहां हर कदम पर हिमालय की अनमोल प्राकृतिक विरासत का अद्भुत नजारा देखने को मिलता है।

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