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भारतीय खेल जगत में नया इतिहास: गाजियाबाद की मंजू नयाल बनीं देश की पहली 3-स्टार इंटरनेशनल महिला कुराश रेफरी

Manju nayal Source: image from google
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विशेष रिपोर्ट (गाजियाबाद/नई दिल्ली)
उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले की रहने वाली मंजू नयाल ने अंतरराष्ट्रीय खेल पटल पर भारत का मान बढ़ाते हुए एक नया इतिहास रच दिया है। उन्होंने कुराश (Kurash) खेल में सर्वोच्च स्तर की रेफरी परीक्षा सफलतापूर्वक उत्तीर्ण कर ‘3-स्टार अंतरराष्ट्रीय महिला रेफरी’ बनने की अभूतपूर्व उपलब्धि हासिल की है। इस प्रतिष्ठित पद तक पहुँचने वाली वह संपूर्ण भारत की पहली महिला खेल अधिकारी बन गई हैं।
उनकी इस ऐतिहासिक सफलता से न केवल देश में कुराश खेल को एक नई पहचान मिली है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय खेल प्रबंधन में भारतीय महिलाओं की उपस्थिति भी अधिक सुदृढ़ हुई है।
१. उज्बेकिस्तान की कठिन परीक्षा में गाड़ा सफलता का झंडा
मंजू नयाल ने यह वैश्विक कीर्तिमान उज्बेकिस्तान के ताशकंद में आयोजित अत्यंत कठिन और प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय रेफरी परीक्षा को पास करके प्राप्त किया है:
कड़ा वैश्विक मूल्यांकन: उज्बेकिस्तान में आयोजित इस मूल्यांकन प्रक्रिया में दुनिया भर के कई देशों के अनुभवी खेल अधिकारियों और रेफरियों ने भाग लिया था।
तकनीकी व व्यावहारिक दक्षता: इस परीक्षा के दौरान कुराश खेल के जटिल नियमों, मैदानी निर्णयों, दबाव की स्थिति में निष्पक्ष निर्णय क्षमता और मैच संचालन के तकनीकी मानकों का गहन परीक्षण किया गया।
शीर्ष ग्रेड के साथ सफलता: मंजू ने सभी श्रेणियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए अंतरराष्ट्रीय कुराश एसोसिएशन (IKA) की 3-स्टार रेटिंग हासिल की, जो इस खेल में रेफरी के लिए उच्चतम योग्यता मानी जाती है।
२. क्या है ‘कुराश’ खेल और 3-स्टार रेफरी का महत्व?
‘कुराश’ मध्य एशिया (विशेषकर उज्बेकिस्तान) का एक अत्यंत प्राचीन और लोकप्रिय पारंपरिक मार्शल आर्ट/कुश्ती खेल है, जो अब एशियाई खेलों (Asian Games) का भी प्रमुख हिस्सा बन चुका है।
निर्णायक की भूमिका: इस खेल में 3-स्टार अंतरराष्ट्रीय रेफरी का पद सबसे उच्च श्रेणी का होता है।
विश्वस्तरीय प्रतियोगिताओं में संचालन: 3-स्टार रेफरी बनने के बाद अब मंजू नयाल एशियाई खेल, विश्व कुराश चैंपियनशिप और अन्य बड़े अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में मुख्य रेफरी के रूप में निर्णायकी करने के लिए योग्य हो गई हैं।
३. गाजियाबाद से अंतरराष्ट्रीय मंच तक का प्रेरणादायक सफर
मंजू नयाल का यह सफर आसान नहीं रहा। खेल के प्रति उनके समर्पण और वर्षों की कड़ी मेहनत ने उन्हें आज इस मुकाम तक पहुँचाया है:
प्रारंभिक संघर्ष और निरंतरता: गाजियाबाद में रहते हुए उन्होंने खेल की बुनियादी बारीकियों को सीखा और मार्शल आर्ट्स व कुराश खेल के विकास के लिए जमीनी स्तर पर कार्य किया।
युवाओं और महिलाओं के लिए मिसाल: उनकी इस वैश्विक उपलब्धि से उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि पूरे भारत की युवा महिला खिलाड़ियों और खेल अधिकारियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलेगी।
४. खेल जगत में खुशी की लहर और राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान
मंजू नयाल की इस अभूतपूर्व सफलता की खबर मिलते ही भारतीय कुराश संघ, खेल मंत्रालय और उत्तर प्रदेश के खेल प्रेमियों में खुशी की लहर दौड़ गई है:
खेल संघों द्वारा सराहना: राष्ट्रीय खेल पदाधिकारियों ने उनकी इस उपलब्धि को भारतीय खेल इतिहास का स्वर्णिम पल बताया।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ा भारत का कद: अब तक इस स्तर के रेफरी पद पर मध्य एशियाई या यूरोपीय देशों का वर्चस्व रहता था, जिसे तोड़ते हुए भारत की बेटी ने अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराई है।
निष्कर्ष
गाजियाबाद की मंजू नयाल की यह उपलब्धि केवल एक व्यक्तिगत जीत नहीं है, बल्कि यह भारत की नारी शक्ति और अंतरराष्ट्रीय खेल निकायों में देश के बढ़ते प्रभुत्व का प्रतीक है। उज्बेकिस्तान में भारत का तिरंगा लहराने वाली मंजू नयाल अब दुनिया भर के सबसे बड़े खेल मंचों पर भारत का प्रतिनिधित्व करती नजर आएँगी।