बिहार सरकार ने सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं बेहतर बनाने और शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाने का लक्ष्य तय किया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने घोषणा की कि अगले साल मार्च तक राज्य के सरकारी स्कूलों की तस्वीर बदलने की दिशा में काम किया जा रहा है। इसके तहत स्कूलों के भवन, रंग-रोगन, बाउंड्री वॉल और पंखों जैसी जरूरी सुविधाओं को दुरुस्त किया जाएगा। साथ ही, चयनित शिक्षकों को आधुनिक शिक्षण पद्धतियों का प्रशिक्षण देने के लिए अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में भेजने की योजना है। मुख्यमंत्री ने शनिवार को पटना के बापू सभागार में आयोजित राज्यस्तरीय सेवा, चित्र एवं भाषण प्रतियोगिता के पुरस्कार वितरण समारोह में ये बातें कहीं। कार्यक्रम का उद्घाटन केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, उपमुख्यमंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव और शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने किया।
मिशन कायाकल्प के तहत सुधारी जाएंगी स्कूलों की सुविधाएं
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि राज्य सरकार के मिशन कायाकल्प के तहत सरकारी स्कूलों में जरूरी सुविधाओं को बेहतर बनाने का काम तेजी से किया जा रहा है। इस अभियान में स्कूल भवनों की मरम्मत, रंग-रोगन, बाउंड्री वॉल और पंखों जैसी बुनियादी सुविधाओं पर ध्यान दिया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य है कि मार्च के बाद जब बच्चे स्कूल लौटें, तो उन्हें पहले से बेहतर और व्यवस्थित शैक्षणिक माहौल मिले। इसके लिए स्कूलों के बुनियादी ढांचे में सुधार के साथ-साथ पढ़ाई के वातावरण को बेहतर बनाने पर भी जोर दिया जा रहा है।
रटने के बजाय समझकर पढ़ने पर रहेगा जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में ऐसा बदलाव लाने की जरूरत है, जिससे विद्यार्थी केवल पाठ याद करने तक सीमित न रहें, बल्कि विषयों को समझकर सीख सकें। इसके लिए शिक्षण पद्धतियों को अधिक प्रभावी और आधुनिक बनाने की योजना है। इस दिशा में स्कूल और कॉलेज स्तर से 100-100 उत्कृष्ट शिक्षकों का चयन करने की बात कही गई है। इन शिक्षकों को आधुनिक शिक्षण तकनीकों और तरीकों का प्रशिक्षण देने के लिए अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में भेजने की योजना है। इस तरह कुल 200 शिक्षकों को विशेष प्रशिक्षण देने का लक्ष्य रखा गया है।
सरकार के मुताबिक, शिक्षकों की क्षमता बढ़ने से विद्यार्थियों को पढ़ाई समझने और सीखने के बेहतर अवसर मिल सकते हैं। हालांकि, इस पहल का वास्तविक असर प्रशिक्षण के बाद कक्षाओं में अपनाए जाने वाले तरीकों और उनके परिणामों पर निर्भर करेगा।
शिक्षा विभाग पर खर्च होंगे करीब 78 हजार करोड़ रुपये
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बताया कि बिहार के 3 लाख 47 हजार करोड़ रुपये के कुल बजट में से लगभग 78 हजार करोड़ रुपये शिक्षा विभाग के लिए खर्च किए जा रहे हैं। यह राशि राज्य के कुल बजट का करीब 23 प्रतिशत है। उन्होंने शिक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने से जुड़े कदमों का जिक्र करते हुए बताया कि राज्य में 17 स्थानों पर केंद्रीय विद्यालयों के लिए जमीन उपलब्ध कराई गई है। उनके अनुसार, इन स्थानों पर इसी वर्ष से पढ़ाई भी शुरू करा दी गई है। सरकार की योजनाओं में स्कूलों की सुविधाएं सुधारने, शिक्षकों को बेहतर प्रशिक्षण देने और विद्यार्थियों को समझ आधारित शिक्षा उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है। अब इन लक्ष्यों को तय समयसीमा में पूरा करना और स्कूलों में हुए बदलावों को प्रभावी ढंग से लागू करना अहम होगा।









