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छत्तीसगढ़ में फसलें तबाह, किसानों पर मौसम की दोहरी मार; बारिश के बाद कीट-पतंगों ने बढ़ाई परेशानी

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छत्तीसगढ़ में किसानों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। पहले भारी बारिश और बाढ़ ने फसलों को नुकसान पहुंचाया, अब कीट-पतंगों और मौसमी बीमारियों ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। धान की फसलें खेतों में गिर गई हैं, जबकि फल, फूल, सब्जियों और अन्य फसलों में सड़न शुरू हो गई है। किसानों को अपनी फसल बचाने के लिए कीटनाशक दवाओं का सहारा लेना पड़ रहा है। ऐसे में खेती की लागत बढ़ने के साथ आर्थिक नुकसान का खतरा भी बढ़ गया है।

भारी बारिश से खेतों में भरा पानी, फसलें हुईं खराब

24 से 27 सितंबर के बीच रायपुर समेत छत्तीसगढ़ के कई जिलों में मूसलाधार बारिश हुई थी। इस दौरान बस्तर संभाग के छह से अधिक जिलों में भी भारी बारिश का असर देखने को मिला। कई इलाकों में खेतों में पानी भर गया, जिससे फसलों को भारी नुकसान पहुंचा।

नदी के आसपास और दूरदराज के क्षेत्रों में खेतों तक बारिश और बाढ़ का पानी पहुंचने से फसलें सड़ने लगीं। कई जगह तेज आंधी और बारिश के कारण धान की फसलें गिर गईं। फल, फूल, सब्जियों और अनाज की फसलों पर भी इसका असर पड़ा। किसानों की मेहनत और लागत पर पानी फिर गया।

बारिश के बाद कीट-पतंगों और बीमारियों का हमला

भारी बारिश के बाद अब मौसम में बदलाव ने किसानों की परेशानी बढ़ा दी है। खेतों में लंबे समय तक पानी भरे रहने से फसलों में सड़न और कीट-पतंगों का प्रकोप बढ़ने लगा है। कई फसलों में मौसमी बीमारियां भी दिखाई दे रही हैं।

कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार, मौसम में बदलाव और तापमान में उतार-चढ़ाव के कारण फसलों में बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। इसका असर खासतौर पर फल, फूल और सब्जियों की खेती पर पड़ रहा है। फसलों को बचाने के लिए किसानों को अतिरिक्त खर्च करना पड़ रहा है।

किसानों की बढ़ी चिंता, लागत निकालना भी चुनौती

अक्टूबर में मानसून की विदाई के बाद भी किसान बारिश से हुए नुकसान से उबर नहीं पाए हैं। पहले जलभराव और बाढ़ ने फसलों को नुकसान पहुंचाया, अब कीट-पतंगों और बीमारियों से बचाव के लिए दवाओं पर खर्च बढ़ रहा है।

ऐसे में किसानों के सामने अपनी फसल बचाने और खेती की लागत निकालने की चुनौती खड़ी हो गई है। मौसम की लगातार मार ने उनकी आर्थिक चिंताएं बढ़ा दी हैं।