मध्य प्रदेश के उज्जैन में शिक्षा के क्षेत्र में एक नई पहल की शुरुआत हुई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रविवार को जियापुरा में विद्या भारती की मानव बाल कल्याण समिति द्वारा निर्मित किए जाने वाले बहुउद्देशीय महाकालपुरम प्रकल्प का भूमिपूजन किया। इस अवसर पर उन्होंने प्रकल्प के लिए पहले से स्वीकृत 75 लाख रुपये की राशि के अतिरिक्त 1.25 करोड़ रुपये की सहायता देने की घोषणा की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आदर्श विद्यालय ही नई पीढ़ी को संस्कारवान बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। शिक्षा के क्षेत्र में नए प्रकल्पों की शुरुआत समाज और आने वाली पीढ़ियों के बेहतर भविष्य की दिशा में एक शुभ संकेत है।
विद्यालयों में सभी विद्यार्थियों को मिले समान अवसर

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपने संबोधन में कहा कि विद्यालय व्यक्तिगत मान-सम्मान या अपमान का विषय नहीं होते, बल्कि ऐसे संस्थान होते हैं, जहां सभी विद्यार्थी समान रूप से शिक्षा ग्रहण करते हैं। शिक्षा का उद्देश्य केवल किताबी ज्ञान देना नहीं, बल्कि बच्चों में अच्छे संस्कार, नैतिकता और जीवन मूल्यों का विकास करना भी है।
उन्होंने कहा कि उज्जैन की धरती गुरु सांदीपनि की परंपरा से जुड़ी रही है। इसी गौरवशाली परंपरा का निर्वहन करते हुए यहां से ऐसी नई पीढ़ी तैयार होगी, जो भगवान श्रीकृष्ण और उनके मित्र सुदामा की मित्रता, सादगी और आदर्शों से प्रेरणा लेगी।
सीबीएसई पाठ्यक्रम के तहत मिलेगी शिक्षा
मुख्यमंत्री ने बताया कि महाअष्टमी के पावन अवसर पर उज्जैन में शिक्षा के एक नए अध्याय की शुरुआत हो रही है। शहर में पहले से ही सरस्वती शिशु मंदिर के दो विद्यालय संचालित हैं, जो मध्य प्रदेश बोर्ड के अधीन हैं। वहीं, महाकालपुरम प्रकल्प के तहत विद्यार्थियों को केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के पाठ्यक्रम के अनुसार शिक्षा प्रदान की जाएगी।
इस नई पहल से विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ अपने व्यक्तित्व को निखारने के बेहतर अवसर मिलने की उम्मीद है। मुख्यमंत्री ने प्रकल्प के शिलान्यास और भूमिपूजन के साथ इसके निर्माण कार्य को आगे बढ़ाने की दिशा में सरकार के सहयोग का भी भरोसा दिया।

सर्वांगीण विकास पर जोर
कार्यक्रम में उज्जैन के सांसद अनिल फिरोजिया ने भी अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि विद्या भारती ऐसी संस्था है, जहां बच्चों के सर्वांगीण विकास पर विशेष ध्यान दिया जाता है। यहां विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ अच्छे आचरण, संस्कार और नैतिकता का पाठ भी पढ़ाया जाता है।
सांसद फिरोजिया ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि वह स्वयं भी सरस्वती शिशु मंदिर के छात्र रहे हैं। उन्होंने संस्था की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि बच्चों के चरित्र निर्माण और उनके व्यक्तित्व विकास में ऐसे शैक्षणिक संस्थानों का महत्वपूर्ण योगदान है।
महाकालपुरम प्रकल्प की शुरुआत को उज्जैन में शिक्षा के विस्तार और संस्कार आधारित शिक्षण व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।









