भारतीय महिला पहलवान मनीषा भानवाला ने अंतरराष्ट्रीय कुश्ती में देश का नाम रोशन किया है। उन्होंने विमेंस वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया। शुक्रवार को कजाकिस्तान की राजधानी अस्ताना में खेले गए 59 किलोग्राम वर्ग के फाइनल में मनीषा ने अमेरिका की एबिगेल नेट को 8-6 से हराया। इस जीत के साथ वह विमेंस वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप में गोल्ड जीतने वाली पहली भारतीय महिला पहलवान बन गई हैं।
आखिरी 3 मिनट में पलटा मुकाबला
फाइनल मुकाबले में मनीषा की शुरुआत आसान नहीं रही। एक समय वह अमेरिकी पहलवान के खिलाफ 1-5 से पीछे चल रही थीं। मुकाबला उनके हाथ से निकलता दिखाई दे रहा था, लेकिन मनीषा ने हार नहीं मानी। उन्होंने आखिरी तीन मिनट में शानदार वापसी करते हुए 7 पॉइंट हासिल किए और स्कोर 8-6 कर दिया। इस दमदार प्रदर्शन के साथ उन्होंने गोल्ड मेडल अपने नाम कर लिया।
पिता का सपना किया पूरा
मनीषा की इस जीत के पीछे उनके पिता सुरेश का सपना भी जुड़ा है। वह चाहते थे कि उनकी बेटी एक दिन विश्व चैंपियन बने। साल 2013 में पिता ने ही मनीषा को फिटनेस सुधारने के लिए कुश्ती के ट्रेनिंग कैंप में भेजा था। धीरे-धीरे उनका शौक जुनून में बदला और कुश्ती ही उनका करियर बन गई। हालांकि, इस सफर के बीच 17 अप्रैल 2022 को दिल का दौरा पड़ने से उनके पिता का निधन हो गया। मनीषा ने मुश्किल दौर में भी कुश्ती नहीं छोड़ी। पिता के निधन के महज 24 घंटे बाद उन्होंने एशियन चैंपियनशिप में हिस्सा लिया और गोल्ड मेडल जीता था। अब वर्ल्ड चैंपियन बनकर उन्होंने अपने पिता के उस सपने को भी पूरा कर दिया, जिसे लेकर उन्होंने कुश्ती की शुरुआत की थी।
39 साल के इंतजार के बाद भारतीय महिला को गोल्ड
महिला कुश्ती की पहली वर्ल्ड चैंपियनशिप साल 1987 में आयोजित हुई थी। इसके बाद 2021 में अंशु मलिक वर्ल्ड चैंपियनशिप के फाइनल में पहुंचने वाली पहली भारतीय महिला पहलवान बनी थीं। उन्होंने सिल्वर मेडल जीता था। अब मनीषा ने गोल्ड जीतकर भारतीय महिला कुश्ती के इतिहास में नया अध्याय जोड़ दिया है। इस चैंपियनशिप में भारत के पास दो और गोल्ड जीतने का मौका था। 50 किलोग्राम वर्ग में नीलम सिरोही और 76 किलोग्राम वर्ग में काजल ढोचक फाइनल तक पहुंचीं, लेकिन दोनों को सिल्वर मेडल से संतोष करना पड़ा। इससे पहले सीनियर वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप में भारत के लिए गोल्ड जीतने वाले एकमात्र पहलवान सुशील कुमार थे, जिन्होंने 2010 में यह उपलब्धि हासिल की थी।
फाइनल तक लगातार दर्ज की जीत
मनीषा का फाइनल तक का सफर भी शानदार रहा। उन्होंने कनाडा की लॉरेंस ब्यूरेगार्ड को पिनफॉल से हराकर शुरुआत की। क्वार्टर फाइनल में मंगोलिया की बोलोरतुया खुरेलखू को 6-0 से मात दी। इसके बाद सेमीफाइनल में मेजबान कजाकिस्तान की अल्टिन शागायेवा को 10-0 से हराकर फाइनल में जगह बनाई।
वजन वर्ग बदलने के बाद मिली बड़ी सफलता
मनीषा के लिए 2026 का साल चुनौतियों से भरा रहा। एशियन गेम्स में उन्होंने 57 किलोग्राम वर्ग में हिस्सा लिया था, जहां क्वार्टर फाइनल में जापान की अकारी फुजिनामी से 0-3 से हार मिली। इसके बाद उन्होंने वर्ल्ड चैंपियनशिप के लिए 59 किलोग्राम वर्ग चुना। इससे पहले वह 62 किलोग्राम वर्ग में भी मुकाबले खेल चुकी हैं। रोहतक के छोटूराम अखाड़े में शुरू हुआ उनका कुश्ती का सफर कोच मंदीप सिंह के मार्गदर्शन में आगे बढ़ा। जापानी कोच कोसेई अकाइशी से भी उन्होंने तकनीक की बारीकियां सीखीं। अब वर्ल्ड चैंपियनशिप का गोल्ड उनके करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल हो गया है। मनीषा की यह जीत भारतीय महिला कुश्ती के लिए भी एक ऐतिहासिक पल बन गई है।









