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हरित ईंधन की राह पर भारत: संसद में E20 पेट्रोल के प्रभाव और लाभ पर सड़क परिवहन मंत्री की विस्तृत स्पष्टता

हरित ईंधन की राह पर भारत: Source: wikipedia by google
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विशेष रिपोर्ट (नई दिल्ली)
देश में एथनॉल मिश्रित ईंधन (E20 Petrol) को लेकर जारी तकनीकी बहसों और उपभोक्ता आशंकाओं के बीच केंद्र सरकार ने स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने लोकसभा में एक आधिकारिक जानकारी साझा करते हुए बताया कि 20 प्रतिशत एथनॉल युक्त पेट्रोल के प्रयोग से वाहनों की ईंधन दक्षता (माइलेज) में 2 प्रतिशत से लेकर 6 प्रतिशत तक की आंशिक कमी आ सकती है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह प्रभाव वाहनों के मॉडल वर्ग और उनकी उम्र पर निर्भर करता है, जबकि वैज्ञानिक शोधों में इससे इंजन को कोई नुकसान पहुंचने का कोई प्रमाण नहीं मिला है।
१. वैज्ञानिक शोध और गहन तकनीकी परीक्षण
एथनॉल सम्मिश्रण के प्रभावों का मूल्यांकन करने के लिए देश की प्रमुख तकनीकी और ऑटोमोबाइल संस्थाओं ने मिलकर एक व्यापक अध्ययन किया है:
संयुक्त अध्ययन दल: यह तकनीकी रिसर्च ‘आटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया’ (ARAI), ‘सोसाइटी ऑफ इंडियन आटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स’ (SIAM) और ‘इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड’ (IOCL) द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित की गई।
व्यापक श्रेणी के वाहनों पर टेस्ट: लैब डायनेमोमीटर और ऑन-रोड परिस्थितियों में BS-III, BS-IV और BS-VI मानकों से लैस दोपहिया और चारपहिया वाहनों पर गहन परीक्षण किए गए।
इंजन टिकाऊपन की पुष्टि: सभी मानकों और विशेष टेस्ट प्रोटोकॉल के तहत हुए इन परीक्षणों में E20 ईंधन के कारण इंजन फेलियर या पुर्जों के खराब होने का कोई साक्ष्य दर्ज नहीं किया गया है।
२. E20 ईंधन अपनाने के मुख्य तकनीकी व पर्यावरणीय लाभ
संसद में दिए गए वक्तव्य के अनुसार, माइलेज में मामूली अंतर के अलावा यह हरित ईंधन वाहनों के प्रदर्शन और पर्यावरण सुरक्षा में कई सकारात्मक बदलाव लाता है:
उत्सर्जन में 30% तक की कमी: E10 ईंधन की तुलना में E20 पेट्रोल के उपयोग से जहरीली कार्बन गैसों के उत्सर्जन में लगभग 30 प्रतिशत की भारी गिरावट आती है, जिससे वायु प्रदूषण नियंत्रण में मदद मिलती है।
बेहतर एक्सेलेरेशन और पिक-अप: एथनॉल के उच्च ऑक्टेन नंबर के कारण वाहन को बेहतर एक्सेलेरेशन मिलता है और ड्राइविंग का अनुभव अधिक सहज (Smooth) हो जाता है।
स्वच्छ दहन (Clean Combustion): यह ईंधन इंजन के भीतर अधिक पूर्णता से जलता है, जिससे कार्बन जमाव की समस्या कम होती है।
३. पुराने वाहनों की स्थिति और वॉरंटी पर स्थिति साफ
सोशल मीडिया और विपक्षी दलों द्वारा उठाई जा रही आशंकाओं का समाधान करते हुए सरकार और ऑटो निर्माताओं ने उपभोक्ताओं को आश्वस्त किया है:
उपभोक्ता सुरक्षा की गारंटी: ऑटोमोबाइल कंपनियां E20 पर चलने वाली गाड़ियों के लिए वॉरंटी दावों को बिना किसी बाधा के स्वीकार कर रही हैं, जो इसके सुरक्षित होने की पुष्टि करता है।
रूटीन सर्विसिंग में पुर्जों का रख-रखाव: वर्ष 2016 से पहले के पुराने मॉडल वाले वाहनों (BS-III) में रबर गास्केट या सील जैसे मामूली हिस्सों में आवश्यकता पड़ने पर नियमित सर्विसिंग के दौरान आसानी से बदलाव किया जा सकता है।
सड़कों पर सुरक्षित परिचालन: वर्तमान में देश में 20 करोड़ से अधिक दोपहिया और 3 करोड़ से अधिक कारें बिना किसी बड़ी तकनीकी समस्या के इस मिश्रित पेट्रोल पर संचालित हो रही हैं।
४. राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था और ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम
सरकार द्वारा एथनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल (EBP) कार्यक्रम को साल 2001 से चरणबद्ध और योजनाबद्ध तरीके से बढ़ाया गया है। इस नीति से देश को बहुआयामी लाभ मिल रहे हैं:
विदेशी मुद्रा की बचत: कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटने से देश की बड़ी विदेशी मुद्रा की बचत हो रही है।
कृषि क्षेत्र को बल: एथनॉल उत्पादन के लिए गन्ने और अनाज का उपयोग होने से देश के किसानों की आय में सीधा इजाफा हो रहा है।
ऊर्जा सुरक्षा: भारत वैश्विक ऊर्जा संकटों के बीच अपने घरेलू ईंधन विकल्पों को मजबूत कर आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है।
निष्कर्ष
ईंधन की कैलोरीफिक वैल्यू में भिन्नता के कारण माइलेज में 2 से 6 प्रतिशत का मामूली अंतर आ सकता है, लेकिन यह प्रभाव ड्राइविंग पैटर्न और ट्रैफिक की स्थिति पर भी निर्भर करता है। सरकार का स्पष्ट मानना है कि वैज्ञानिक आधार पर तैयार किया गया E20 पेट्रोल पूरी तरह सुरक्षित है और यह भारत को प्रदूषण-मुक्त व ऊर्जा-स्वतंत्र बनाने में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित होगा।

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