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संसद बना मंच: साधु बने पप्पू यादव, राहुल गांधी ने डाला चंदा; राम मंदिर चढ़ावे पर विपक्ष का सबसे अनोखा प्रदर्शन!

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केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह के खिलाफ कांग्रेस ने पेश किया विशेषाधिकार हनन नोटिस; मकर द्वार पर नाटकीय प्रदर्शन से लेकर नारेबाजी तक, दिनभर गरमाया रहा संसदीय माहौल
प्रमुख बिंदु (Key Highlights):
सांकेतिक नुक्कड़ नाटक: निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने संसद परिसर में भगवा वस्त्र पहनकर पुजारी का रूप धारण किया और हाथ में दानपात्र लेकर विरोध प्रदर्शन किया।
विपक्ष का अनूठा अंदाज: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी सहित कई विपक्षी सांसदों ने प्रतीकात्मक रूप से दानपात्र में चंदा डालकर सरकार पर निशाना साधा।
विशेषाधिकार नोटिस: कांग्रेस सांसद के.सी. वेणुगोपाल ने केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह पर सदन को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए विशेषाधिकार हनन का नोटिस जारी किया।
भारी नारेबाजी: “चढ़ावा चोरी बंद करो” और “सदन में जवाब दो” जैसे नारों के साथ विपक्ष ने निष्पक्ष जांच की मांग उठाई।
विस्तृत समाचार रिपोर्ट
नई दिल्ली:
संसदीय सत्र के दौरान संसद परिसर के मकर द्वार पर एक बेहद अनूठा और राजनीतिक रूप से सरगर्म दृश्य देखने को मिला। अयोध्या स्थित राम मंदिर के चढ़ावे और चंदे में कथित अनियमितताओं के आरोपों को लेकर विपक्षी खेमे (‘इंडिया’ गठबंधन) के नेताओं ने सरकार को घेरने के लिए एक अनोखा सांकेतिक प्रदर्शन किया।
इस विरोध प्रदर्शन का मुख्य आकर्षण पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव (राजेश रंजन) रहे, जो पूर्ण रूप से भगवा वस्त्र धारण कर एक पुजारी के रूप में संसद पहुंचे। उन्होंने अपने सामने एक प्रतीकात्मक दानपात्र रखा, जिसके माध्यम से विपक्षी सांसदों ने धार्मिक चंदे में हुई कथित गड़बड़ी की ओर देश का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया।
राहुल गांधी ने डाला चंदा, गूंजे तीखे नारे
प्रदर्शन के दौरान लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, प्रियंका गांधी वाड्रा और समाजवादी पार्टी के सांसदों सहित विपक्ष के कई प्रमुख चेहरे उपस्थित रहे।
राहुल गांधी ने खुद आगे बढ़कर उस दानपात्र में सांकेतिक रूप से नकदी डाली। इसके बाद सांसदों ने एक संक्षिप्त नुक्कड़ नाटक के जरिए आरोप लगाया कि जनता की आस्था के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। प्रदर्शनकारियों के हाथों में बैनर और तख्तियां थीं, जिन पर सरकार से जवाबदेही और केंद्रीय गृह मंत्री की मौजूदगी की मांग की गई थी।
केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह के खिलाफ विशेषाधिकार प्रस्ताव
केवल परिसर के बाहर ही नहीं, बल्कि सदन के भीतर भी यह विवाद कानूनी व संसदीय प्रक्रियाओं में तब्दील हो गया।
कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद के.सी. वेणुगोपाल ने केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह के विरुद्ध विशेषाधिकार हनन (Privilege Motion) का नोटिस प्रस्तुत किया है। विपक्ष का आरोप है कि केंद्रीय मंत्री ने हाल ही में प्रदर्शनकारी छात्रों और उससे जुड़ी घटनाओं पर सदन के पटल पर जो बयान दिया था, वह तथ्यात्मक रूप से गलत था और उसने संसद को गुमराह करने का काम किया है।
विपक्ष का रुख और मांगें
विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि श्रद्धालुओं द्वारा भगवान के चरणों में अर्पित की गई राशि की सुरक्षा में चूक होना अत्यंत गंभीर विषय है।
आस्था से जुड़ा मुद्दा: समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के प्रतिनिधियों का कहना है कि यह केवल धन का मामला नहीं, बल्कि देश के करोड़ों सनातन प्रेमियों और श्रद्धालुओं की धार्मिक निष्ठा से जुड़ा सवाल है।
उच्चस्तरीय जांच की मांग: गठबंधन के नेताओं ने मांग की है कि चंदे के गबन के सभी आरोपों की एक स्वतंत्र और निष्पक्ष एजेंसी से समयबद्ध जांच कराई जानी चाहिए।
सदन में गतिरोध और कार्यवाही पर असर
संसद परिसर में हुए इस ड्रामैटिक प्रदर्शन और सदन के भीतर विपक्ष के हंगामे के कारण विधायी कार्यों पर भी असर पड़ा। लगातार नारेबाजी और कार्यस्थगन के प्रस्तावों के चलते सदन की कार्यवाही को बार-बार बाधित होना पड़ा।
जहां एक ओर विपक्ष इस मुद्दे पर सरकार से सीधे जवाब की मांग पर अड़ा हुआ है, वहीं सत्ता पक्ष का तर्क है कि विपक्ष रचनात्मक बहस से भागने के लिए केवल प्रचार पाने वाले हथकंडे अपना रहा है।

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