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आयुर्वेद, योग और भारतीय ज्ञान का नया केंद्र बनेगा ऋषिकुल, CM धामी ने मास्टर प्लान को दी रफ्तार

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देहरादून में मुख्यमंत्री आवास पर शुक्रवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हरिद्वार स्थित मदन मोहन मालवीय प्राच्य शोध संस्थान, ऋषिकुल के समग्र विकास को लेकर प्रस्तावित मास्टर प्लान की समीक्षा की। बैठक में संस्थान के प्रस्तावित स्वरूप और विभिन्न गतिविधियों से जुड़ा प्रस्तुतीकरण मुख्यमंत्री के सामने रखा गया।

शासकीय आवास पर श्री मदन मोहन मालवीय प्राच्य शोध संस्थान, ऋषिकुल (हरिद्वार) के मास्टर प्लान की समीक्षा की। अधिकारियों को ऋषिकुल को आयुर्वेद, योग एवं भारतीय ज्ञान परंपरा के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने के निर्देश दिए।

अधिकारियों को निर्देश दिए कि ऋषिकुल परिसर का… pic.twitter.com/f0eUXjecMj— Pushkar Singh Dhami (@pushkardhami) September 11, 2026

आयुर्वेद और योग पर रहेगा फोकस

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि ऋषिकुल को आयुर्वेद, योग और भारतीय ज्ञान परंपरा के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित किया जाए। संस्थान के विकास में आयुर्वेद, मेडिकल टूरिज्म, योग, ज्योतिष और वैदिक गणित को विशेष प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए। उन्होंने कहा कि आयुष, योग और संस्कृत देवभूमि उत्तराखंड की प्रमुख पहचान हैं। इसी पहचान को ऋषिकुल के विकास में प्रमुखता से शामिल किया जाना चाहिए।

शोध और शिक्षा के लिए बनेगा बेहतर माहौल

मुख्यमंत्री ने संस्थान में उच्च स्तरीय शैक्षणिक गतिविधियों पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान, प्राच्य विद्याओं, आयुर्वेद और योग से जुड़े अध्ययन और शोध के लिए यहां उत्कृष्ट वातावरण तैयार किया जाए। ऋषिकुल को ऐसा केंद्र बनाने की योजना है, जहां देश-दुनिया से आने वाले लोग भारतीय ज्ञान परंपरा और प्राचीन चिकित्सा एवं योग पद्धतियों को समझ और अनुभव कर सकें।

प्राचीन स्थापत्य के साथ आधुनिक सुविधाएं

मुख्यमंत्री धामी ने निर्देश दिए कि ऋषिकुल परिसर का वास्तुशिल्प प्राच्य और पारंपरिक स्थापत्य शैली के अनुरूप हो। भवनों के बाहरी स्वरूप और फसाड में प्राचीन स्थापत्य परंपरा की झलक दिखाई दे, जबकि परिसर के अंदर आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। उन्होंने कहा कि प्राचीनता और आधुनिकता के संतुलित समन्वय से ऋषिकुल की अलग पहचान विकसित की जानी चाहिए।

हरिद्वार की धार्मिक पहचान को मिलेगा स्थान

मुख्यमंत्री ने कहा कि मां गंगा के कारण हरिद्वार का देश और दुनिया में विशेष धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्व है। यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक आते हैं। ऐसे में ऋषिकुल के विकास की पूरी अवधारणा में हरिद्वार की इस विशेष पहचान को केंद्र में रखा जाए। उन्होंने कहा कि ऋषिकुल आने वाले लोगों को भारतीय ज्ञान परंपरा, आयुर्वेद, योग और अध्यात्म की समृद्ध विरासत को जानने और अनुभव करने का अवसर मिलना चाहिए।

दो साल में पूरा करने का लक्ष्य

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को परियोजना से जुड़े सभी कार्य समयबद्ध तरीके से पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अलग-अलग कार्यों के लिए स्पष्ट चरण और समय-सीमा तय की जाए और पूरी परियोजना को चरणबद्ध तरीके से दो वर्ष के भीतर पूरा किया जाए। साथ ही मुख्यमंत्री ने कार्यों की नियमित समीक्षा सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए, ताकि ऋषिकुल के समग्र विकास की योजना तय समय में जमीन पर उतारी जा सके।

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