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करोल बाग में ₹90 लाख की सनसनीखेज चोरी: दिल्ली पुलिस ने कुछ ही घंटों में सुलझाई गुत्थी, दुकान का सबसे वफादार कर्मचारी ही निकला मास्टरमाइंड

करोल बाग में ₹90 लाख की सनसनीखेज चोरी
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25 सन 2026 नई दिल्ली प्रतिभा सिंह
राजधानी दिल्ली के करोल बाग इलाके में हुई ₹90 लाख की एक बड़ी और सनसनीखेज चोरी के मामले को सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट पुलिस ने महज कुछ ही घंटों के भीतर सुलझाकर एक बड़ी कामयाबी हासिल की है। पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए न सिर्फ चोरी की गई रकम में से ₹84 लाख का भारी-भरकम कैश बरामद कर लिया है, बल्कि वारदात में इस्तेमाल और चोरी किए गए मोबाइल फोन व अन्य सामान भी जब्त कर लिया है।
इस हाई-प्रोफाइल मामले में पुलिस ने मास्टरमाइंड समेत कुल चार शातिर आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाला खुलासा तब हुआ जब यह पता चला कि इस पूरी साजिश का ताना-बाना किसी बाहरी गिरोह ने नहीं, बल्कि दुकान के ही एक सबसे पुराने और भरोसेमंद कर्मचारी ने बुना था, जिस पर मालिक आंख मूंदकर भरोसा करता था।
सुबह जब खुली दुकान, तो उड़ गए मालिक के होश
यह पूरी वारदात दिल्ली के सबसे व्यस्त व्यापारिक केंद्र माने जाने वाले करोल बाग के बीडनपुरा स्थित एक थोक (wholesale) मोबाइल फोन की दुकान में हुई। हरियाणा के हिसार (मॉडल टाउन, मंडी आदमपुर) के रहने वाले शिकायतकर्ता रोज की तरह जब 24 जून 2026 की दोपहर को अपनी दुकान पर पहुंचे, तो वहां का नजारा देखकर उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। दुकान का सारा सामान बिखरा पड़ा था और तिजोरी खाली थी।
23 और 24 जून की दरमियानी रात को अज्ञात चोरों ने दुकान को निशाना बनाया था। चोरों ने बड़ी ही सफाई से दुकान के अंदर रखे लगभग ₹90 लाख कैश, पांच कीमती मोबाइल फोन और अपनी पहचान छुपाने के मकसद से वहां लगे सीसीटीवी (CCTV) कैमरे का डिजिटल वीडियो रिकॉर्डर (DVR) भी उखाड़ लिया और फरार हो गए। घटना की लिखित सूचना मिलते ही दोपहर 02:33 बजे करोल बाग थाना पुलिस तुरंत एक्शन में आई और मौके पर पहुंच कर जांच शुरू की।
मामले की गंभीरता को देख मैदान में उतरीं कई टीमें
चोरी की गई रकम बहुत बड़ी थी, इसलिए मामले की गंभीरता को देखते हुए सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट के डीसीपी (DCP) रोहित राजबीर सिंह के निर्देश पर तुरंत क्राइम टीम और फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) की टीमों को मौके पर बुलाया गया। घटनास्थल का बारीकी से मुआयना किया गया और फिंगरप्रिंट्स समेत तमाम वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाए गए। करोल बाग पुलिस स्टेशन में तुरंत नए कानून के तहत FIR No. 742/2026, धारा 305(a)/331(3)/3(5) BNS के तहत मुकदमा दर्ज किया गया।
केस को जल्द से जल्द सुलझाने के लिए करोल बाग पुलिस और स्पेशल स्टाफ की कई टीमों को मिलाकर एक बड़ा ज्वाइंट ऑपरेशन शुरू किया गया। इस टीम में कई इंस्पेक्टर, सब-इंस्पेक्टर और हेड कांस्टेबलों को शामिल किया गया, जिसकी सीधी निगरानी खुद एसीपी (ACP) करोल बाग कर रहे थे।
सीसीटीवी फुटेज और ‘इनसाइडर थ्योरी’ से खुला राज
तफ्तीश के शुरुआती घंटों में जब पुलिस ने आसपास के दर्जनों सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले और दुकान के स्टाफ से कड़ाई से पूछताछ की, तो पुलिस को एक बात साफ हो गई कि दुकान के ताले तोड़े बिना अंदर एंट्री की गई थी। इसका मतलब साफ था कि वारदात में किसी ऐसे ‘इनसाइडर’ (अंदरूनी व्यक्ति) का हाथ है जिसे दुकान के चप्पे-चप्पे की जानकारी है और जिसे यह भी पता है कि कैश कहां और कितना रखा जाता है।
वैज्ञानिक साक्ष्यों और खुफिया इनपुट के आधार पर पुलिस का शक दुकान के ही 24 वर्षीय कर्मचारी रवि उर्फ महिपाल पर गहरा गया। जब पुलिस ने कड़ियां जोड़नी शुरू कीं, तो रवि के साथ मंगोलपुरी के रहने वाले उसके तीन अन्य दोस्तों—अंश, मनीष और दीपांशु के नाम भी सामने आ गए।


सलाखों के पीछे पहुंचे चारों आरोपियों की कुंडली:
रवि उर्फ महिपाल (उम्र 24 वर्ष) – निवासी: विजय विहार, दिल्ली (यह दुकान का मुख्य कर्मचारी और इस पूरी साजिश का मास्टरमाइंड था)।
अंश (उम्र 22 वर्ष) – निवासी: मंगोलपुरी, दिल्ली (वारदात को अंजाम देने वाला और पैसा छुपाने वाला)।
मनीष (उम्र 22 वर्ष) – निवासी: मंगोलपुरी, दिल्ली (अंश के साथ दुकान में घुसकर चोरी करने वाला)।
दीपांशु (उम्र 23 वर्ष) – निवासी: मंगोलपुरी, दिल्ली (साजिश और रेकी में शामिल मददगार)।
मंगोलपुरी में आधी रात को रेड, खाली मकान से मिला ₹84 लाख कैश
आरोपियों की लोकेशन ट्रेस होने के बाद, दिल्ली पुलिस की अलग-अलग टीमों ने बिना वक्त गंवाए दिल्ली के मंगोलपुरी इलाके में कई ठिकानों पर एक साथ ताबड़तोड़ छापेमारी (Simultaneous Raids) की। एक टीम का नेतृत्व खुद एसएचओ (SHO) करोल बाग कर रहे थे, जिन्होंने मनीष और दीपांशु को दबोच लिया। वहीं दूसरी तरफ एसीपी करोल बाग और स्पेशल स्टाफ की टीम ने आरोपी अंश के ठिकाने पर धावा बोला।
पुलिस की यह घेराबंदी इतनी सटीक थी कि आरोपियों को संभलने का मौका ही नहीं मिला। अंश की गिरफ्तारी के बाद जब उसके घर के ठीक बगल में स्थित एक खाली पड़े मकान की तलाशी ली गई, तो पुलिस के हाथ एक बड़ी कामयाबी लगी। वहां तीन बड़े बैगों में ठूस-ठूस कर छिपाया गया ₹84,00,000/- (चौरासी लाख रुपये) का कैश बरामद हो गया। इसके तुरंत बाद मुख्य सूत्रधार रवि उर्फ महिपाल को भी दबोच लिया गया।
मास्टरमाइंड का कबूलनामा: डुप्लीकेट चाबी से दिया वारदात को अंजाम
जब पुलिस ने मास्टरमाइंड रवि उर्फ महिपाल को हिरासत में लेकर कड़ी पूछताछ की, तो उसने जो खुलासा किया वह किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं था। रवि ने बताया कि वह लंबे समय से इस दुकान में काम कर रहा था और मालिक का उस पर अटूट विश्वास था। रोज रात को दुकान बढ़ाने (बंद करने) और चाबियां संभालने की जिम्मेदारी उसी की थी। उसे अच्छी तरह पता था कि किस दिन दुकान में कितना बड़ा बिजनेस कलेक्शन आता है और कैश कहां रखा जाता है।
ऐसे बनाई नकली चाबी: रवि ने अपने कर्ज और पैसों की हवस को पूरा करने के लिए अपने दोस्तों के साथ मिलकर साजिश रची। वारदात से ठीक दो दिन पहले, रवि ने बड़ी चालाकी से दुकान की असली चाबी अपने दोस्तों को दी, जिन्होंने कुछ ही घंटों में उसकी एक हूबहू नकली (Duplicate) चाबी तैयार करवा ली।
चेहरे पर मास्क और आधी रात का खेल: प्लान के मुताबिक, 23/24 जून की आधी रात को अंश और मनीष अपने चेहरे पर मास्क लगाकर करोल बाग पहुंचे। उन्होंने नकली चाबी का इस्तेमाल किया, जिससे दुकान का शटर बिना किसी शोर या तोड़फोड़ के खुल गया। दोनों ने अंदर घुसकर ₹90 लाख कैश, फोन और सीसीटीवी का DVR समेटा और बैग में भरकर रफूचक्कर हो गए।
शातिर चाल: सुबह खुद बना रहा गवाह: खुद पर से शक हटाने के लिए रवि अगली सुबह (24 जून को) तय समय पर दुकान पहुंच गया। जब चोरी की बात सामने आई, तो वह मालिक के सामने ऐसे रोने-बिलखने और हैरान होने का नाटक करने लगा जैसे उसे कुछ मालूम ही न हो। वह पुलिस के सामने भी एक सीधे-साधे चश्मदीद गवाह की तरह पेश आ रहा था, ताकि पुलिस बाहर के चोरों को ढूंढती रहे। लेकिन पुलिस की बारीक तफ्तीश के आगे उसकी यह होशियारी धरी की धरी रह गई।
आगे की कार्रवाई जारी
डीसीपी रोहित राजबीर सिंह ने बताया कि पुलिस ने घटना के कुछ ही घंटों के भीतर केस का पूरी तरह पर्दाफाश कर दिया है। गिरफ्तार किए गए चारों आरोपियों से फिलहाल पुलिस कस्टडी में आगे की पूछताछ की जा रही है। पुलिस की टीमें अब बाकी बचे हुए करीब ₹6 लाख रुपये, चोरी गए अन्य मोबाइल फोन और गायब किए गए सीसीटीवी के DVR को बरामद करने का प्रयास कर रही हैं। इसके साथ ही इन आरोपियों के पुराने आपराधिक रिकॉर्ड (Criminal Antecedents) को भी खंगाला जा रहा है ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या इन्होंने पहले भी दिल्ली में इस तरह की किसी बड़ी वारदात को अंजाम दिया है।

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