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तीर्थनगरी ऋषिकेश में फुटपाथ और सड़कें पैदल चलने वालों के लिए हैं या दुकानदारों के सामान और रेहड़ी-ठेले सजाने के लिए।

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तीर्थनगरी ऋषिकेश में फुटपाथ और सड़कें पैदल चलने वालों के लिए हैं या दुकानदारों के सामान और रेहड़ी-ठेले सजाने के लिए। यह सवाल आज हर ऋषिकेश वासी की जुबान पर है।

प्रशासनिक अनदेखी के चलते शहर में अतिक्रमणकारियों के हौसले इस कदर सातवें आसमान पर हैं कि अब आम जनता का सब्र का बांध टूट चुका है।

जमीन से लेकर सोशल मीडिया तक, सिस्टम की चुप्पी के खिलाफ लोगों ने मोर्चा खोल दिया है। जनता सालों से चिल्ला-चिल्ला कर थक चुकी है।

शिकायतें फाइलों में धूल फांक रही हैं। लेकिन प्रशासन मानो मौन व्रत पर बैठा है। खास बात यह है कि अब यह लड़ाई सड़कों से उठकर इंटरनेट पर आ गई है।

सोशल मीडिया पर स्थानीय निवासियों ने ऋषिकेश के इस अतिक्रमण राज की तस्वीरें और वीडियो पोस्ट कर प्रशासन को टैग करना शुरू कर दिया है।

लोग तीखे पोस्ट के जरिए पूछ रहे हैं कि क्या ऋषिकेश को स्मार्ट सिटी की जगह अतिक्रमण सिटी बनाने का प्लान है। रेलवे रोड, घाट रोड, क्षेत्र रोड और मुखर्जी चौक पर हालात सबसे ज्यादा चिंताजनक हैं।

यहां दुकानदारों का एक तय ढर्रा बन चुका है। पहले फुटपाथ पर अपनी गाड़ियां पार्क करो, फिर उसके आगे दुकान का सामान सजाओ और जो कसर रह जाए उसे सड़क पर बेतरतीब वाहन खड़े करने वाले ग्राहक पूरी कर देते हैं।

अतिक्रमण को बढ़ावा देने में व्यापारियों का बड़ा हाथ है। जो अपनी दुकानों के बाहर ठेली रेहड़ी और फड़ लगाने की मौन सहमति दे रहे है।

कुल मिलाकर कहें तो ऋषिकेश में इस वक्त अतिक्रमण का बोलबाला है और सिस्टम की जुबान पर ताला है।

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