Home / राज्य / दिल्ली आबकारी नीति पर CAG रिपोर्ट से सियासत तेज, विधानसभा में सरकार का विपक्ष पर हमला

दिल्ली आबकारी नीति पर CAG रिपोर्ट से सियासत तेज, विधानसभा में सरकार का विपक्ष पर हमला

दिल्ली आबकारी नीति पर CAG रिपोर्ट से सियासत तेज
Spread the love

तारीख: 27 मार्च 2026
स्थान: नई दिल्ली

नई दिल्ली: दिल्ली विधानसभा में आबकारी नीति को लेकर चर्चा के दौरान Comptroller and Auditor General of India (CAG) की रिपोर्ट ने राजनीतिक माहौल को और गरमा दिया है। कैबिनेट मंत्री Manjinder Singh Sirsa ने सदन में विस्तार से अपनी बात रखते हुए पूर्व सरकार पर गंभीर आरोप लगाए और इस नीति को “सोची-समझी रणनीति” का हिस्सा बताया।

रिपोर्ट में सामने आई अहम बातें

मंत्री के मुताबिक, CAG रिपोर्ट और पब्लिक अकाउंट्स कमेटी (PAC) की टिप्पणियां कई विभागों में गड़बड़ियों की ओर इशारा करती हैं, लेकिन आबकारी नीति सबसे बड़ा और गंभीर मामला बनकर उभरी है। उन्होंने कहा कि यह केवल प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि योजनाबद्ध तरीके से लिया गया फैसला था।

₹2000 करोड़ से अधिक नुकसान का दावा

सदन में जानकारी देते हुए मंत्री ने कहा कि 17 नवंबर 2021 से 31 अगस्त 2022 के बीच दिल्ली सरकार को करीब ₹2000 करोड़ से ज्यादा का नुकसान हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि नीति के जरिए कुछ चुनिंदा लोगों को फायदा पहुंचाया गया और सरकारी राजस्व को नजरअंदाज किया गया।

बाजार संरचना पर उठे सवाल

मंत्री ने बताया कि:

  • होलसेल कारोबार में ऑपरेटरों की संख्या 77 से घटाकर 13 कर दी गई
  • इन 13 में से 3 कंपनियों ने लगभग 77% बाजार पर कब्जा कर लिया

उन्होंने इसे प्रतिस्पर्धा खत्म कर “कार्टेल सिस्टम” बनाने की कोशिश करार दिया।

लाइसेंस प्रक्रिया पर सवाल

सदन में यह भी कहा गया कि कई ऐसी कंपनियों को लाइसेंस दिए गए जिनकी वित्तीय स्थिति मजबूत नहीं थी। कुछ कंपनियां घाटे में थीं या उनकी नेट वर्थ नकारात्मक थी, फिर भी उन्हें बड़े जोन आवंटित किए गए। मंत्री ने इसे नियमों के खिलाफ बताया।

कोविड के दौरान राहत पर विवाद

मंत्री ने कोविड काल में ₹144 करोड़ की लाइसेंस फीस माफ करने के फैसले पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि अधिकारियों की आपत्तियों के बावजूद यह राहत दी गई, जिससे सरकारी खजाने को नुकसान हुआ।

इसके अलावा, नॉन-कन्फॉर्मिंग क्षेत्रों में दुकानें न खुल पाने के कारण ₹900 करोड़ से अधिक की राहत देने का भी जिक्र किया गया, जिसे उन्होंने वित्तीय रूप से अनुचित बताया।

बिना मंजूरी फैसलों का आरोप

मंत्री ने आरोप लगाया कि कई महत्वपूर्ण निर्णय बिना जरूरी प्रशासनिक स्वीकृति के लिए गए और उच्च स्तर पर पूरी जानकारी साझा नहीं की गई, जिससे पारदर्शिता पर सवाल खड़े होते हैं।

हाई कोर्ट का हवाला

सदन में बोलते हुए मंत्री ने कहा कि हाई कोर्ट ने भी इस मामले को गंभीर माना है और बड़े पैमाने पर तैयार चार्जशीट को हल्के में न लेने की बात कही है।

राजनीतिक बयानबाज़ी तेज

दिल्ली के मुख्यमंत्री Arvind Kejriwal पर निशाना साधते हुए मंत्री ने कहा कि इस मामले में जवाबदेही तय होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि इसी तरह की नीति को अन्य राज्यों में भी लागू करने की कोशिश की जा रही है।

निष्कर्ष

दिल्ली की आबकारी नीति पर CAG रिपोर्ट ने जहां प्रशासनिक प्रक्रियाओं पर सवाल उठाए हैं, वहीं इसने राजनीतिक बहस को भी तेज कर दिया है। अब यह देखना अहम होगा कि जांच और कानूनी प्रक्रिया इस मामले को किस दिशा में ले जाती है और क्या जिम्मेदार लोगों पर कोई ठोस कार्रवाई होती है।

Tagged: