भाजपा ने बयान को बताया महिलाओं का अपमान, ‘ब्वारी’ शब्द के प्रयोग पर उठे सवाल
देहरादून/ 25 मार्च 2026
GSST/डेस्क: उत्तराखंड में ‘ब्वारी’ टिप्पणी पर सियासी विवाद,की राजनीति में महिलाओं के सम्मान को लेकर नया विवाद सामने आया है। दीप्ति रावत भारद्वाज, प्रदेश महामंत्री, भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस नेता गणेश गोदियाल के हालिया बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे महिलाओं की गरिमा के विरुद्ध बताया है। उन्होंने कहा कि “ब्वारी लेकर आएंगे” जैसी भाषा महिलाओं के प्रति असंवेदनशीलता दर्शाती है और उन्हें वस्तु के रूप में प्रस्तुत करने वाली मानसिकता को उजागर करती है, जो किसी भी सभ्य समाज के लिए चिंताजनक है।
प्रदेश महामंत्री ने कहा कि पहाड़ी बोली में “ब्वारी” शब्द का अर्थ बहू होता है और इस शब्द का इस प्रकार प्रयोग महिलाओं के सम्मान, स्वतंत्र पहचान और गरिमा के खिलाफ है। महिला कोई वस्तु नहीं है जिसे “लाया” या “ले जाया” जाए, बल्कि वह समाज की समान भागीदार, सशक्त व्यक्तित्व और परिवार तथा राष्ट्र की आधारशिला है।
उन्होंने कहा कि इस तरह की टिप्पणियाँ समाज में गलत और नकारात्मक संदेश देती हैं तथा महिलाओं के प्रति संकीर्ण सोच को बढ़ावा देती हैं। उनके अनुसार आज की महिलाएँ आत्मनिर्भर हैं, शिक्षित हैं और अपने निर्णय स्वयं लेने में सक्षम हैं। ऐसे बयान महिलाओं की स्वतंत्रता और सशक्तिकरण की वास्तविकता को स्वीकार न कर पाने वाली मानसिकता को दर्शाते हैं।
दीप्ति रावत भारद्वाज ने कहा कि वर्तमान समय में महिलाएँ राजनीति, शिक्षा, विज्ञान, सेना, खेल और सामाजिक जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ हासिल कर रही हैं। उनकी सक्रिय भागीदारी देश और प्रदेश के विकास को नई दिशा दे रही है। ऐसे समय में महिलाओं की भूमिका को कमतर आंकने वाली भाषा दुर्भाग्यपूर्ण है और उनके योगदान का अपमान भी है।
उन्होंने केंद्र सरकार की नीतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में महिला सशक्तिकरण, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता को प्राथमिकता दी गई है। विभिन्न योजनाओं और निर्णयों के माध्यम से महिलाओं को समान अवसर, सुरक्षा और सम्मान के साथ आगे बढ़ने का वातावरण प्रदान किया जा रहा है।
भाजपा नेता ने कहा कि उनकी पार्टी स्त्री सम्मान, सुरक्षा और सशक्तिकरण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और समाज में महिलाओं के प्रति सम्मानजनक, सुरक्षित और समान वातावरण सुनिश्चित करने के लिए निरंतर कार्य करती रहेगी।
अपने बयान के अंत में उन्होंने कहा कि गणेश गोदियाल की ‘ब्वारी’ टिप्पणी पितृसत्तात्मक सोच को दर्शाती है, जो महिलाओं को बराबरी का दर्जा देने के बजाय उन्हें सीमित दृष्टिकोण से देखने का प्रयास करती है। ऐसी मानसिकता को समाज में किसी भी रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता।









