टनकपुर। उत्तराखंड सरकार राज्य में धार्मिक पर्यटन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इसी कड़ी में देश के प्रमुख शक्ति पीठों में शामिल मां पूर्णागिरि धाम को आधुनिक सुविधाओं से जोड़ने और क्षेत्र को एक महत्वपूर्ण धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में कार्य तेज कर दिया गया है।
सरकार और पर्यटन विभाग द्वारा पूर्णागिरि मेले के दौरान श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ-साथ स्थायी आधारभूत ढांचे के विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।हर वर्ष चैत्र नवरात्र के दौरान आयोजित होने वाला पूर्णागिरि मेला देशभर से लाखों श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है।
उत्तराखंड के चंपावत जनपद स्थित मां पूर्णागिरि धाम में उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान सहित कई राज्यों से श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए प्रशासन द्वारा सड़क, पेयजल, पार्किंग, प्रकाश व्यवस्था, स्वच्छता और सुरक्षा जैसी सुविधाओं को मजबूत बनाने की योजना पर कार्य किया जा रहा है।
पर्यटन विभाग का मानना है कि पूर्णागिरि धाम में धार्मिक पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। इसी उद्देश्य से क्षेत्र में स्थायी सुविधाओं के निर्माण के साथ-साथ पर्यटन सर्किट विकसित करने की योजना बनाई जा रही है। प्रस्तावित पर्यटन सर्किट के तहत पूर्णागिरि धाम को आसपास के अन्य धार्मिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक पर्यटन स्थलों से जोड़ने की तैयारी की जा रही है, जिससे पर्यटकों को एक ही यात्रा में कई महत्वपूर्ण स्थलों का भ्रमण करने का अवसर मिल सके।
अधिकारियों के अनुसार पर्यटन सर्किट विकसित होने से न केवल श्रद्धालुओं की संख्या में वृद्धि होगी बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बड़ा लाभ मिलेगा। होटल, धर्मशाला, होमस्टे, परिवहन, हस्तशिल्प और स्थानीय व्यापार से जुड़े लोगों को रोजगार और आय के नए अवसर प्राप्त होंगे। इससे सीमांत क्षेत्र के आर्थिक विकास को भी गति मिलेगी।
पूर्णागिरि धाम तक पहुंचने वाले मार्गों को बेहतर बनाने के लिए भी विभिन्न योजनाओं पर कार्य किया जा रहा है। श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए पार्किंग स्थलों के विस्तार, यात्री विश्राम गृहों के निर्माण तथा डिजिटल सूचना प्रणाली विकसित करने की दिशा में भी कदम उठाए जा रहे हैं। इसके अलावा मेले के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं, आपदा प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्थाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तराखंड में चारधाम यात्रा के साथ-साथ शक्तिपीठों का भी धार्मिक महत्व अत्यंत व्यापक है। यदि पूर्णागिरि धाम को आधुनिक पर्यटन सुविधाओं से जोड़ा जाता है तो यह क्षेत्र राष्ट्रीय स्तर पर एक प्रमुख धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में स्थापित हो सकता है। इससे राज्य में धार्मिक पर्यटन को नई पहचान मिलेगी और पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की जा सकेगी।स्थानीय लोगों ने भी सरकार की इस पहल का स्वागत किया है।
उनका कहना है कि पर्यटन गतिविधियों के विस्तार से क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और युवाओं को अपने ही क्षेत्र में आजीविका के बेहतर साधन उपलब्ध होंगे। साथ ही स्थानीय संस्कृति, परंपराओं और धार्मिक विरासत को भी राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी।
उत्तराखंड सरकार का लक्ष्य धार्मिक आस्था और पर्यटन विकास के बीच संतुलन स्थापित करते हुए पूर्णागिरि धाम को एक सुव्यवस्थित, सुरक्षित और आकर्षक धार्मिक पर्यटन गंतव्य के रूप में विकसित करना है। आने वाले वर्षों में आधारभूत सुविधाओं के विस्तार और पर्यटन सर्किट के विकास से पूर्णागिरि क्षेत्र उत्तराखंड के प्रमुख धार्मिक पर्यटन केंद्रों में और अधिक मजबूती से अपनी पहचान बना सकेगा।










