देहरादून। उत्तराखंड में पर्यटन और ट्रेकिंग गतिविधियों के बढ़ने के साथ ही प्रशासन ने पर्वतीय क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत करने की दिशा में कदम तेज कर दिए हैं। हाल ही में राज्य के अलग-अलग ट्रेकिंग मार्गों पर दो ट्रेकर्स के लापता होने की घटनाओं के बाद प्रशासन, पुलिस और आपदा प्रबंधन एजेंसियों ने व्यापक स्तर पर खोज एवं बचाव अभियान चलाया।
इन घटनाओं के बाद ट्रेकिंग मार्गों पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विशेष सतर्कता बरती जा रही है।उत्तराखंड देश के प्रमुख साहसिक पर्यटन स्थलों में शामिल है। यहां हर वर्ष हजारों की संख्या में देशी और विदेशी पर्यटक ट्रेकिंग, पर्वतारोहण और प्रकृति भ्रमण के लिए पहुंचते हैं। केदारकांठा, हर की दून, रूपकुंड, फूलों की घाटी, नाग टिब्बा, दयारा बुग्याल और पिंडारी ग्लेशियर जैसे ट्रेकिंग मार्ग पर्यटकों के बीच बेहद लोकप्रिय हैं। गर्मियों के मौसम और पर्यटन सीजन के दौरान इन मार्गों पर ट्रेकर्स की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिलती है।
हाल ही में अलग-अलग ट्रेकिंग रूटों पर दो ट्रेकर्स के लापता होने की सूचना मिलने के बाद प्रशासन सक्रिय हो गया। सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन, पुलिस, राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) और वन विभाग की टीमों को मौके पर रवाना किया गया। पर्वतीय और दुर्गम क्षेत्रों में खोज अभियान चलाया गया, जिसमें आधुनिक उपकरणों और स्थानीय गाइडों की सहायता भी ली गई।
अधिकारियों का कहना है कि पर्वतीय क्षेत्रों में मौसम तेजी से बदलता है और कई बार ट्रेकर्स निर्धारित मार्ग से भटक जाते हैं, जिससे दुर्घटना या लापता होने जैसी स्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं। विशेष रूप से ऊंचाई वाले क्षेत्रों में घना कोहरा, बारिश, तेज हवाएं और सीमित संचार सुविधाएं चुनौती पैदा करती हैं। ऐसे में ट्रेकिंग के दौरान सुरक्षा नियमों का पालन करना अत्यंत आवश्यक हो जाता है।प्रशासन ने ट्रेकिंग करने वाले पर्यटकों और साहसिक गतिविधियों में शामिल लोगों के लिए कई महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
अधिकारियों ने कहा है कि ट्रेक पर जाने से पहले मौसम की जानकारी अवश्य प्राप्त करें और स्थानीय प्रशासन या वन विभाग के पास अपना पंजीकरण कराएं। इसके अलावा प्रशिक्षित गाइड के साथ ही ट्रेकिंग करने तथा अकेले दुर्गम मार्गों पर जाने से बचने की सलाह दी गई है।सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए कई ट्रेकिंग मार्गों पर निगरानी बढ़ाई जा रही है।
प्रमुख ट्रेक रूटों पर सूचना केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं और पर्यटकों को सुरक्षा संबंधी आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है। प्रशासन द्वारा ट्रेकिंग मार्गों पर आपातकालीन संपर्क व्यवस्था को भी सुदृढ़ बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं ताकि किसी भी आपदा या दुर्घटना की स्थिति में तुरंत सहायता पहुंचाई जा सके।
पर्यटन विभाग का मानना है कि उत्तराखंड में साहसिक पर्यटन की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है। ऐसे में पर्यटकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सर्वोच्च प्राथमिकता है। विभाग द्वारा समय-समय पर जागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं, जिनके माध्यम से ट्रेकर्स को सुरक्षित यात्रा के बारे में जानकारी दी जाती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि पर्वतीय क्षेत्रों में ट्रेकिंग के दौरान सावधानी और तैयारी बेहद महत्वपूर्ण होती है। पर्याप्त गर्म कपड़े, प्राथमिक उपचार सामग्री, भोजन, पानी और संचार के साधन साथ रखना आवश्यक है। साथ ही मौसम खराब होने की स्थिति में यात्रा को स्थगित करना ही बेहतर विकल्प माना जाता है।प्रशासन ने पर्यटकों से अपील की है कि वे ट्रेकिंग के दौरान निर्धारित मार्गों का ही उपयोग करें और सुरक्षा संबंधी निर्देशों का पालन करें।
अधिकारियों का कहना है कि प्राकृतिक सौंदर्य और रोमांच का आनंद लेने के साथ-साथ सुरक्षा को प्राथमिकता देना भी उतना ही जरूरी है। राज्य सरकार और प्रशासन का प्रयास है कि उत्तराखंड में आने वाले पर्यटकों को सुरक्षित, व्यवस्थित और यादगार अनुभव मिल सके।










