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सुभारती विश्वविद्यालय का 11 वां दीक्षांत समारोह हुआ आयोजित, 2500 से अधिक डिग्रीयां प्रदान की गईंदीक्षांत समारोह अंत नहीं नई जिम्मेदारियों की शुरुआत होता है-आचार्य देवव्रत, माननीय राज्यपाल गुजरात

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मेरठः स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय के 11 वे दीक्षांत सामारोह का भव्य आयोजन विश्वविद्यालय के मांगल्य प्रेक्षागृह में आयोजित हुआ। इस दीक्षांत सामारोह के मुख्य अतिथि आचार्य देवव्रत, माननीय राज्यपाल गुजरात रहे एवं विशिष्ट अतिथि के रूप में नाइजिरिया के केब्बी प्रांत के माननीय उपराज्यपाल सीनेटर उमर अबुबकर तफीदान कब्बी रहे। इनके अतिरिक्त गुजरात की प्रथम महिला दर्शना देवी, नाइजीरिया से आए हुए अन्य गण्यमान्य अतिथियों में उमर गरबा डस्टीन मारी, शैफीयू अबबुबकर जुरो, इशाह अबुबकर टुनागा प्रमुख रहे तो वहीं स्थानीय अतिथियों में विश्वविद्यालय के न्यासी डॉ. रोहित रविंद्र, मुख्य कार्यकारी अधिकारीडॉ. शल्या राज, कार्यकारी अधिकारी डॉ. कृष्णामूर्ति, आचार्य कुलदीप, अनिल कुमार, जगत सिंह दौसा आदि उपस्थित रहे। सामारोह की अध्यक्षता विश्वविद्यालय की कुलाधिपति डॉ स्तुति कक्कड ने की। इनके अतिरिक्त इस समारोह में नाइजीरिया एवं पश्चिमी एशियाई देशों के गणमान्य अतिथि भी इस दीक्षांत समारोह में शामिल रहे।

दीक्षांत समारोह के कार्यक्रम की शुरुआत सुभारती समूह की परंपरानुसार मुख्य अतिथि एवं गण्यमान्य अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन एवं कुम्भ जलाभिषेक के साथ हुआ। इससे पूर्व मुख्य अतिथि आचार्य देवव्रत, माननीय राज्यपाल गुजरात के द्वारा विश्वविद्यालय परिसर में स्थित आईएनए शहीद स्मारक एवं उपवन आईएनए व भारतीय सेना के शहीदों को पुष्पांजली अर्पित की गई एवं मुख्य समारोह स्थल पर उत्तर प्रदेश पुलिस के जवानों के द्वारा सम्मान गारद दिया गया। इसके साथ ही मुख्य अतिथि आचार्य देवव्रत, माननीय राज्यपाल गुजरात एवं सीनेटर उमर अबुबकर तफीदान कब्बी माननीय उपराज्यपाल केब्बी प्रांत, नाइजीरिया के द्वारा मांगल्य प्रेक्षागृह में गण्यमान्य अतिथियों के अवलोकन के लिए विश्वविद्यालय की बेस्ट प्रैक्टिसेस के विद्यार्थियों के द्वारा लगाए गए विभिन्न-विभिन्न स्टॉल्स जिनमें राष्ट्रबोध, स्टार्टअप, पर्यावरण समिति एवं वैलनेस सेंटर प्रमुख रहे।

मुख्य अतिथि आचार्य देवव्रत ने अपने संबोधन में कहा कि सुभारती विश्वविद्यालय के 11वें दीक्षांत समारोह में उपस्थित होने का सौभाग्य मिला । सुभारती विश्ववविद्यालय की कुलाधिपति, कुलपति व विश्वविद्यालय के संस्थापक एवं समस्त पदाधिकारियों को पिछले दो दशक से देश की भावी पीढ़ीयों के निर्माण के लिए हार्दिक बधाई देता हुं। उन्होंने कहा कि दीक्षांत समारोह पठन-पाठन प्रक्रिया का अंतिम चरण होता है। अपने संबोधन में आचार्य देवव्रत ने कहा कि प्राचीन काल में शिक्षक अथवा गुरु दीक्षांत समारोह के दिन अपने विद्यार्थियों को अपना अंतिम उपदेश देते थे। जिसमें वे उन्हें सत्य का आचरण करना, धर्म का आचरण करना व सदाचार, सद्भाव व सम्यक विचार के साथ जीवन जीने का मंत्र देते थे। मुख्य अतिथि मे कहा कि स्वाध्याय निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है इसे कभी रुकना नहीं चाहिए। आपके (विद्यार्थियों) द्वारा वर्षों की कठिन साधना और परिश्रम प्राप्त विद्या को विस्तारित करते हए उसे समाज के जरुरतमंद लोगों के मध्य बांटिए। माता-पिता तथा आचार्य देवतुल्य होते हैं उनके प्रति आपको अपने कर्तव्यों को सदा याद रखना चाहिए। हमें अपने माता-पिता को जिन्होंने हमें अथक परिश्रम व त्याग के द्वारा हमें अच्छी और उच्च शिक्षा दिलवाई जिसके कारण समाज में हमें मान सम्मान और अच्छे वेतन की नौकरी मिल रही है या हम एक सफल उद्यमी बन पाए हैं उनके इस त्याग और तप को नहीं भूलना चाहिए। हमें सदा उन्हें सम्मान देते हुए अपने साथ ही रखना चाहिए। देश में बढ़ रहे वृद्धाश्रमों की संख्या के प्रति अपनी चिंता जाहिर करते हुए माननीय राज्यपाल ने कहा कि वृद्धाश्रम भारतीय संस्कृति का हिस्सा नहीं रहे, ये यूरोप एवं पश्चिम के देशों की संस्कृति का भाग रही है किंतु भारत में इनका विस्तार होना दुर्भाग्य पूर्ण है। हमें अपने माता-पिता तथा गुरुओं का सदा सम्मान करना चाहिए इसी प्रकार हमें अपने गुरुओं और शिक्षकों को भी नहीं भूलना चाहिए क्योंकि आज जो भी डिग्री हम प्राप्त कर रहे हैं उसको प्राप्त करने में हमारे गुरुओं का भी अथक प्रयास और मेहनत रही है। उन्होंने स्वयं को जलाकर हमारे मार्ग को प्रशस्त किया है, गुरुओं के पास जो भी ज्ञान होता है वे अपना समस्त ज्ञान विद्यार्थियों को देने का प्रयास करते हैं ताकि उनका विद्यार्थी अपने जीवन में सफलता के उच्चशिखरों को प्राप्त कर सके। इसलिए हमें अपने गुरुजनों को कभी भी तिरस्कृत अथवा अपमान के भाव से ना देखना चाहिए ना ही उनके प्रति अनादर का व्यवहार करना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि डिग्री का अर्थ जिम्मेदार व्यक्ति बनना होता है। संस्कारित व्यक्ति ही समाज में सम्मान को प्राप्त करता है। उन्होंने सुभारती समूह के संस्थापक डॉ. अतुल कृष्ण के द्वारा विश्वविद्यालय की स्थापना जिन चार केंद्रीय विचारों शिक्षा, सेवा, संस्कार एवं राष्ट्रीयता के भाव के साथ स्थापित की है इसकी प्रशंसा करते हुए कहा कि ये विचार केवल एक दूरदर्शी शिक्षाविद जिसके हृदय में राष्ट्रबोध हो वही अपना सकता है और इसको अपने विद्यार्थियों में रोपित कर सकता है। सुभारती विश्वविद्यालय में आकर ऐसा लगता है कि यहां राष्ट्रीयता पग-पग पर और कण-कण में विद्यामान है, यहां जय हिंद के संबोधन से किसी का भी स्वागत किया जाता है ये दर्शाता है कि डॉ. अतुल के द्वारा यहां पर इन विचारों को कितनी गहराई तक अपनी टीम के माध्यम से विद्यार्थियों में समाहित किया गया है। उन्होंने कहा कि दीक्षांत समारोह शिक्षा का अंत नहीं बल्कि नई जिम्मेदारियों की शुरुआत का दिन होता है।

वहीं सुभारती विश्वविद्यालय के 11वें दीक्षांत समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित नाइजिरिया के केब्बी प्रांत के माननीय उपराज्यपाल सीनेटर उमर अबुबकर तफीदान कब्बी ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए उन्हें समाज और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि दीक्षांत समारोह केवल शैक्षणिक यात्रा का समापन नहीं, बल्कि नई जिम्मेदारियों की शुरुआत है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय से प्राप्त ज्ञान और कौशल का उपयोग केवल व्यक्तिगत उन्नति तक सीमित न रखकर समाज के व्यापक हित में किया जाना चाहिए। वर्तमान वैश्विक परिदृश्य का उल्लेख करते हुए कहा कि तेजी से बदलती दुनिया में नवाचार, तकनीक और अंतरराष्ट्रीय सहयोग का महत्व लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी में अपार क्षमता है, जिसे सही दिशा और दृढ़ संकल्प के माध्यम से देश और विश्व के विकास में परिवर्तित किया जा सकता है। इस अवसर पर उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन और शिक्षकों की भी सराहना करते हुए कहा कि संस्थान विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ-साथ नैतिक संस्कार प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। कार्यक्रम के अंत में उन्होंने सभी उपाधि प्राप्त विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए उन्हें निरंतर प्रगति की राह पर अग्रसर रहने का संदेश दिया।

दीक्षांत समारोह में कुलपति प्रो. (डॉ.) प्रमोद कुमार शर्मा ने विश्वविद्यालय की ओर से सभी का आधिकारिक स्वागत करते हुए विश्वविद्यालय का प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए कहा कि यह गौरवपूर्ण अवसर विश्वविद्यालय की उत्कृष्ट उपलब्धियों और मूल्यों—शिक्षा, सेवा, संस्कार व राष्ट्रीयता का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि नैक द्वारा ‘ए’ ग्रेड से मान्यता प्राप्त यह संस्थान अनुसंधान, नवाचार, स्टार्टअप और अंतरराष्ट्रीय सहयोग में निरंतर प्रगति कर रहा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप विद्यार्थियों के कौशल व रोजगारपरक विकास पर विशेष बल दिया जा रहा है। सामाजिक समावेशन, महिला सशक्तिकरण व स्वास्थ्य सेवाओं में भी विश्वविद्यालय अग्रणी है। इस अवसर पर 2481 उपाधियाँ प्रदान की जा रही हैं जिनमें 115 पी.एच.डी. की उपाधियाँ हैं। इसके अतिरिक्त विभिन्न विषयो में सर्वाधिक अंक प्राप्त करने वाले 45 स्नातक छात्र/ छात्राओं को स्वर्ण पदक एवं स्नातकोत्तर परिक्षाओं के 23 टॉपर को उत्कृष्टता प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया। वहीं विश्वविद्यालय की सर्वश्रेष्ठ छात्र के लिए डॉ. ईबेन एस जॉन एवं छात्रा के लिए कुमारी आस्था गुप्ता को चांसलर मेडल एवं संघमाता मुक्ति भटनागर मैमोरियल मेडल, तथा एम.बी.बी.एस. की परीक्षा में सर्वाधिक अंक प्राप्त करने वाली छात्रा साची गुप्ता एवं डेंटल की छात्रा जया रानी सिंह को गोल्ड मेडल दिया गया। इसके अतिरिक्त एम.बी.बी.एस. की प्रथम प्रोफेशनल परीक्षा में प्रथम आने वाले विद्यार्थियों अर्श जैन एवं श्रेया रस्तोगी को 11000 रुपए की नकद राशि देकर सम्मानित किया गया। कुलपति डॉ. शर्मा ने बताया कि विश्वविद्यालय द्वारा 70 से अधिक द्वियांगजनों को विभिन्न पदों पर समायोजित किया हुआ है। डॉ. शर्मा ने सभी डिग्री प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को डिग्री प्रदान की व सभी को छात्र संकल्प दिलवाई। इस अवसर पर पीएचडी की उपाधि प्राप्त करने वालों में डॉ. सैयद ज़फर हुसैन, डॉ. डी.के. सक्सेना, डॉ. गरिमा जैन, डॉ. दिव्या मिश्रा, डॉ. विशाल सहाय, डॉ. रेशु रानी, डॉ. ऋषभ जैन, कर्नल डॉ. हरीश कुमार, डॉ.अंकित कुमार, डॉ. चारमिरी आदि रहे।

इस अवसर पर विश्वविद्यालय की कुलाधिपति डॉ स्तुति कक्कड ने अपने संबोधन में कहा कि सुभारती विश्वविद्यालय के 11वें दीक्षांत समारोह में शामिल होना उनके लिए गर्व और सम्मान की बात है। उन्होंने उपाधि एवं पदक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों, शोधार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों को बधाई दी। डॉ. कक्कड़ ने बताया कि विगत कई वर्षों से सुभारती विश्वविद्यालय अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना रहा है और विभिन्न देशों के प्रतिनिधिमंडलों के साथ शैक्षणिक सहयोग बढ़ा भी है। उनम्होंने “सुभारती इनक्यूबेशन एंड रिसर्च सेंटर” की स्थापना को उद्यमिता के लिए महत्वपूर्ण कदम बताया। साथ ही सुभारती विश्वविद्यालय के द्वारा संचालित “राष्ट्रबोध” एवं “एक भारत श्रेष्ठ भारत” जैसे कार्यक्रमों की सराहना करते हुए विद्यार्थियों से जीवन में उत्कृष्ट कार्य कर परिवार, समाज और राष्ट्र के प्रति अपने दायित्व को निभाने का आह्वान किया। वहीं इस अवसर पर गुजरात की प्रथम महिला दर्शना देवी को विश्वविद्यालय की मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. शल्या राज ने शॉल पहनाकर विश्वविद्यालय की ओर से सम्मानित किया।

सुभारती विश्वविद्यालय के द्वारा आधुनिक तकनीकों का शिक्षा में प्रयोग के नवाचार बढ़ावा देते हुए सभी विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों की उपाधियां भारत सरकार के द्वारा संचालित डिजीलॉकर में सभी के सम्मुख अपलोड करते हुए इन डिग्रीयों एवं उपाधियों को सदा सदा के लिए सुरक्षित कर दिया गया।

डॉ. निखिल श्रीवास्तव एवं डॉ. मनोज कपिल के संयोजन में आयोजित इस 11वें दीक्षांत समारोह का मंच संचालन डॉ. सीमा शर्मा एवं डॉ. अभिनव शर्मा ने किया। इस दौरान मुख्य अतिथी एवं अन्य गण्यमान्य अतिथियों के द्वारा पृथ्वी सिंह सुभारती विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को स्कूल किट भी प्रदान की गई। प्रति कुलपति डॉ. मुनीश सी रेड्डी ने कार्यक्रम के अंत में आधिकारिक रुप से धन्यवाद ज्ञापन करते हुए सभी आगत अतिथियों का आभार प्रकट किया।

इस अवसर पर विश्वविद्यालय की मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. शल्या राज, सुभारती विश्वविद्यालय के महानिदेशक मेज. जन. (डॉ.) जी.के. थपलियाल, एसएम (सेनि.) डॉ. कपिल कुमार, डॉ.वैभव गोयल भारतीय, डॉ. गीता परवंदा, डॉ. पिंटू मिश्रा, डॉ. सोकिंद्र कुमार, डॉ. रीना विश्नोई, डॉ. सुधीर त्य़ागी, डॉ. पंकज किशोर मिश्रा, डॉ. निखिल श्रीवास्तव, डॉ. मनोज कपिल, डॉ. पद्मा मिश्रा, डॉ. धीरेन अजित नायर आदि उपस्थित रहे।