देहरादून 25 जुलाई
उत्तराखंड में इन दिनों पेड़ों की कटाई का मुद्दा लगातार चर्चा में बना हुआ है। देहरादून-ऋषिकेश के बीच भानियावाला-जॉलीग्रांट सड़क को चौड़ा करने की योजना के तहत हजारों पेड़ों को काटने का प्रस्ताव सामने आने के बाद पर्यावरण प्रेमियों, स्थानीय लोगों और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने इसका विरोध शुरू कर दिया। बढ़ते विरोध को देखते हुए राज्य सरकार ने फिलहाल पेड़ों की कटाई पर रोक लगाने का निर्णय लिया है।
जानकारी के अनुसार, सड़क चौड़ीकरण परियोजना के लिए करीब 4,369 पेड़ों को हटाने की योजना बनाई गई थी। इनमें कुछ पेड़ों को दूसरी जगह स्थानांतरित करने और शेष पेड़ों की कटाई का प्रस्ताव था। सरकार का कहना है कि इस परियोजना से देहरादून और ऋषिकेश के बीच यातायात सुगम होगा और लंबे समय से बनी ट्रैफिक की समस्या में राहत मिलेगी।
दूसरी ओर, पर्यावरण संरक्षण से जुड़े लोगों का कहना है कि जिस क्षेत्र में पेड़ों की कटाई प्रस्तावित है, वह वन्यजीवों, विशेषकर हाथियों के प्राकृतिक आवागमन का महत्वपूर्ण मार्ग है। उनका मानना है कि बड़ी संख्या में पेड़ काटे जाने से पर्यावरण संतुलन बिगड़ सकता है, जैव विविधता प्रभावित हो सकती है और वन्यजीवों के आवास पर भी असर पड़ सकता है।
लगातार हो रहे विरोध को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने संबंधित अधिकारियों को फिलहाल पेड़ों की कटाई रोकने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि विकास कार्य आवश्यक हैं, लेकिन पर्यावरण संरक्षण भी सरकार की प्राथमिकता है। सरकार सभी पक्षों से चर्चा कर ऐसा समाधान निकालने का प्रयास करेगी, जिससे विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बना रहे।

इस मामले को लेकर न्यायालय का दरवाजा भी खटखटाया गया है। उत्तराखंड हाईकोर्ट में दायर एक याचिका में बड़े पैमाने पर प्रस्तावित पेड़ों की कटाई पर चिंता जताई गई है। अदालत ने इस मामले में संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि विकास परियोजनाओं के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी समान महत्व दिया जाना चाहिए।
पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तराखंड जैसे संवेदनशील हिमालयी राज्य में विकास परियोजनाओं की आवश्यकता से इनकार नहीं किया जा सकता, लेकिन इनके क्रियान्वयन के दौरान जंगलों, जल स्रोतों और जैव विविधता की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी उतना ही आवश्यक है। उनका सुझाव है कि जहां संभव हो, वहां वैकल्पिक मार्ग, आधुनिक निर्माण तकनीकों और व्यापक वृक्षारोपण जैसे उपायों पर भी गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।
फिलहाल पेड़ों की कटाई पर रोक लगी हुई है और अब सभी की निगाहें सरकार के अगले फैसले पर टिकी हैं। यह पूरा मामला एक बार फिर उस बहस को सामने लेकर आया है कि विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य के लिए यह केवल एक परियोजना का नहीं, बल्कि भविष्य की पर्यावरणीय सुरक्षा का भी महत्वपूर्ण सवाल है।









