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स्मार्टफोन की सियासत: डीपफेक और एआई के सहारे विरोधियों की साख गिराने का लगा आरोप

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डिजिटल प्लेटफॉर्म पर नया सियासी संग्राम, अखिलेश का दावा- तकनीकी मोर्चे पर हम विरोधियों से काफी आगे
उत्तर प्रदेश के सियासी मैदान में अब पारंपरिक भाषणों और पोस्टर-बैनरों की जगह अत्याधुनिक तकनीक ने ले ली है। आगामी चुनावी सरगर्मियों के बीच सूबे में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डीपफेक वीडियो को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने प्रदेश की सत्ताधारी पार्टी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि विपक्षी खेमे के प्रमुख चेहरों को निशाना बनाने और उनकी जन-छवि को धूमिल करने की नीयत से फर्जी एआई-जनरेटेड वीडियो तैयार करके इंटरनेट पर प्रसारित किए जा रहे हैं।
लखनऊ स्थित पार्टी मुख्यालय में पत्रकारों से बातचीत करते हुए सपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि सत्ता पक्ष से जुड़े लोग सोशल मीडिया पर एआई की आड़ में बच्चों जैसा खेल खेल रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर विरोधी खेमा इस तरह की बचकानी और नीचा दिखाने वाली हरकतों पर उतारू रहेगा, तो उन्हें यह नहीं भूलना चाहिए कि समाजवादी पार्टी तकनीक के इस्तेमाल के मामले में उनसे कहीं अधिक सशक्त और आगे है। वार्ता के दौरान सपा की ओर से प्रदेश सरकार के शीर्ष नेतृत्व से संबंधित एक प्रतीकात्मक एआई वीडियो भी दिखाया गया, जिसके जरिए राज्य की कानून-व्यवस्था, खस्ताहाल सड़कों और अन्य बुनियादी समस्याओं पर ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया गया।
शिक्षा, इंफ्रास्ट्रक्चर और विकास के बजट पर तीखे सवाल
अखिलेश यादव ने सिर्फ तकनीक के दुरुपयोग का ही मुद्दा नहीं उठाया, बल्कि राज्य के बुनियादी ढांचे और शिक्षा व्यवस्था को लेकर भी सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने प्रदेश भर में बंद किए जा रहे प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों के मुद्दे पर चिंता जताते हुए एक बड़े अभियान का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि पार्टी के कार्यकर्ता आगामी शिक्षक दिवस के अवसर पर उन सभी बंद पड़े करीब 26 हजार स्कूलों के परिसरों में पहुंचेंगे और जन-चौपाल व विशेष कार्यक्रमों का आयोजन करेंगे। इसके साथ ही उन्होंने यह संकल्प भी दोहराया कि भविष्य में सपा की सरकार बनते ही इन सभी बंद पड़े शैक्षणिक संस्थानों को दोबारा पूरी क्षमता के साथ शुरू किया जाएगा।
विकास कार्यों के आंकड़ों पर हमला बोलते हुए सपा प्रमुख ने कहा कि महाकुंभ से लेकर अब तक लगभग एक लाख करोड़ रुपये से अधिक की बड़ी राशि कागजों पर खर्च दिखाई जा चुकी है। हालांकि, ज़मीनी स्तर पर जनता को इसका कोई प्रत्यक्ष लाभ या बुनियादी सुधार नज़र नहीं आ रहा है। उन्होंने लोनिवि (PWD) विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि राज्य की सड़कें गड्ढों में तब्दील हैं और भ्रष्टाचार का बोलबाला है।
गठबंधन और सहयोगी दलों की भूमिका पर टिप्पणी
प्रेस वार्ता के अंतिम दौर में सियासी समीकरणों की चर्चा करते हुए अखिलेश यादव ने एनडीए के सहयोगी दलों का मुद्दा भी उठाया। राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) के प्रमुख जयंत चौधरी का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि सत्तारूढ़ गठबंधन में सहयोगियों के आत्म-सम्मान की परीक्षा होनी बाकी है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि यदि भाजपा आगामी सीटों के बंटवारे में रालोद को कम से कम 61 सीटें देती है, तभी जयंत चौधरी का वास्तविक सम्मान माना जाएगा। इससे कम सीटें मिलना सीधे तौर पर उनके जनाधार और सम्मान की अनदेखी होगी।
उत्तर प्रदेश में यह एआई वीडियो वार और जुबानी तीर इस बात का स्पष्ट संकेत हैं कि आने वाले समय में चुनावी मुकाबला सिर्फ रैलियों तक सीमित न रहकर डिजिटल और साइबर स्पेस पर भी बेहद आक्रामक रूप लेने वाला है।