नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को लेकर सियासी विवाद एक बार फिर तेज हो गया है। विपक्षी दल उनके खिलाफ संसद में नया महाभियोग प्रस्ताव लाने की तैयारी में हैं। प्रस्तावित विशेष सत्र से पहले विपक्ष लोकसभा और राज्यसभा में नोटिस देने की रणनीति पर काम कर रहा है। इससे पहले भी इस साल उनके खिलाफ ऐसे प्रस्तावों के नोटिस दिए जा चुके हैं, जिनमें से कुछ शुरुआती स्तर पर खारिज हो चुके हैं, जबकि एक प्रस्ताव राज्यसभा में लंबित बताया जा रहा है।
मार्च में भी आए थे प्रस्ताव
आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च 2026 में राज्यसभा में 63 विपक्षी सांसदों के हस्ताक्षर वाला नोटिस दिया गया था। करीब 25 दिन बाद 6 अप्रैल को राज्यसभा के सभापति ने इसे खारिज कर दिया। इसके बाद 24 अप्रैल को राज्यसभा में 73 सांसदों के हस्ताक्षर वाला दूसरा नोटिस दिया गया, जिसमें ज्ञानेश कुमार पर नौ आरोप लगाए गए थे। यह प्रस्ताव लंबित बताया जा रहा है। लोकसभा में भी 12 मार्च को 130 सांसदों के हस्ताक्षर वाला नोटिस दिया गया था, जिसे लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने खारिज कर दिया था।
अब विपक्ष का कहना है कि हाल में सामने आई कुछ नई जानकारियों के बाद नया प्रस्ताव लाने की जरूरत है। विपक्षी दल चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े मुद्दों को लेकर सवाल उठा रहे हैं। विपक्ष का दावा है कि आयोग के भीतर भी कुछ फैसलों को लेकर असहमति सामने आई थी।
चुनाव आयोग ने क्या कहा?
दूसरी ओर, चुनाव आयोग की ओर से कहा गया है कि पिछले एक वर्ष में लिए गए फैसले सर्वसम्मति से हुए हैं। आयोग ने सामने आई 14 टिप्पणियों/नोट्स के अस्तित्व से इनकार नहीं किया है, लेकिन उन्हें सुझाव के तौर पर बताया गया है। ऐसे में पूरे विवाद में विपक्ष के आरोप और आयोग का पक्ष अलग-अलग हैं।
ज्ञानेश कुमार का कार्यकाल कब तक?
केरल कैडर के 1988 बैच के आईएएस अधिकारी ज्ञानेश कुमार ने 19 फरवरी 2025 को देश के 26वें मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में पदभार संभाला था। इससे पहले वह चुनाव आयुक्त के रूप में भी काम कर चुके हैं। केंद्र सरकार में उन्होंने गृह मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय, संसदीय कार्य मंत्रालय और सहकारिता मंत्रालय में विभिन्न जिम्मेदारियां संभाली हैं। उनका कार्यकाल 26 जनवरी 2029 तक है।
आगे क्या होगा?
नए प्रस्ताव को संसद में लाने के बाद उसकी स्वीकार्यता और आगे की प्रक्रिया संबंधित सदन के पीठासीन अधिकारी के स्तर पर तय होगी। यदि प्रस्ताव स्वीकार होता है तो आरोपों की जांच के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत समिति गठित की जा सकती है। इसके बाद रिपोर्ट और संसद में आवश्यक बहुमत के आधार पर आगे की कार्रवाई का रास्ता तय होगा।
फिलहाल मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विपक्ष की नई रणनीति से यह मुद्दा संसद के आगामी कामकाज में प्रमुख राजनीतिक विषय बन सकता है। हालांकि प्रस्ताव लाया जाना और उसे मंजूरी मिलना अलग-अलग चरण हैं तथा अंतिम परिणाम संसदीय प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।









