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SC/ST आरक्षण में उप-कोटा पर तकरार: केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान और जीतन राम मांझी आमने-सामने, इस्तीफे की मांग से गर्माई राजनीति

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राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के भीतर आरक्षण की नीति को लेकर एक बड़ा वैचारिक और राजनीतिक मतभेद उजागर हुआ है। केंद्र सरकार में सहयोगी दो प्रमुख दलित नेता—केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान (लोक जनशक्ति पार्टी-रामविलास) और केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी (हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा)—अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) आरक्षण में उप-वर्गीकरण (सब-कोटा) के मुद्दे पर आमने-सामने आ गए हैं। जुबानी जंग इतनी बढ़ गई है कि दोनों पक्षों की ओर से एक-दूसरे से मंत्री पद से इस्तीफे की मांग की जाने लगी है।
मांझी और HAM पार्टी का पक्ष: ‘कोटे में कोटा’ न्याय की मांग
विवाद की शुरुआत तब हुई जब हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) के प्रमुख जीतन राम मांझी और उनके बेटे, बिहार सरकार में मंत्री संतोष कुमार सुमन ने आरक्षण नीति की समीक्षा और SC/ST वर्ग के भीतर ‘उप-कोटा’ लागू करने की मांग का खुलकर समर्थन किया। मांझी और उनकी पार्टी का तर्क है कि बीते कई दशकों से आरक्षण का अधिकांश लाभ केवल कुछ ही मजबूत दलित जातियों तक सीमित रहा है, जबकि मुसहर, भुइयां और डोम जैसी अत्यंत पिछड़ी और वंचित जातियां मुख्यधारा से दूर रह गई हैं।
मांझी ने सुप्रीम कोर्ट के 2024 के उस फैसले का हवाला दिया जिसमें राज्यों को वंचित उप-जातियों के लिए सब-क्लासिफिकेशन की अनुमति दी गई थी। उन्होंने कहा कि समाज के सबसे निचले पायदान पर खड़े लोगों तक लाभ पहुंचाना ही वास्तविक सामाजिक न्याय है।
चिराग पासवान का पलटवार: सामाजिक एकता और संवैधानिक आधार की दलील
इसके विपरीत, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान ने उप-कोटा और क्रीमी लेयर लागू करने के किसी भी विचार का कड़ा विरोध किया है। चिराग ने कहा कि संविधान में अनुसूचित जातियों को आरक्षण आर्थिक आधार पर नहीं, बल्कि सदियों से चली आ रही सामाजिक अस्पृश्यता और भेदभाव के आधार पर दिया गया है।
चिराग पासवान ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि जो लोग आरक्षण के भीतर क्रीमी लेयर या बंटवारे की बात कर रहे हैं, उन्हें पहले खुद मिसाल पेश करनी चाहिए। उन्होंने मांग रखी कि यदि जीतन राम मांझी और उनके बेटे क्रीमी लेयर के पक्षधर हैं, तो उन्हें तुरंत अपने मंत्री पदों से त्यागपत्र दे देना चाहिए। चिराग का मानना है कि SC समाज के भीतर उप-वर्गीकरण से दलितों की सामाजिक एकजुटता कमजोर होगी और समाज में नया विभाजन पैदा होगा।
गठबंधन और चुनावी समीकरणों पर असर
चिराग पासवान के इस बयान के बाद जीतन राम मांझी और संतोष सुमन ने भी पलटवार करते हुए चिराग से इस्तीफा मांग लिया। मांझी ने आरोप लगाया कि चिराग पासवान का यह रुख गरीब और सबसे वंचित दलितों को उनका हक मिलने से रोक रहा है।
दोनों केंद्रीय मंत्रियों के बीच खुली बयानबाजी ने एनडीए के भीतर अंदरूनी तनाव को उजागर कर दिया है। आगामी चुनावों और दिल्ली में चल रही आरक्षण संबंधी बहसों के बीच बिहार के दो प्रमुख दलित चेहरों का यह टकराव न केवल गठबंधन के लिए चुनौती बन रहा है, बल्कि देश भर में आरक्षण के स्वरूप को लेकर एक नई बहस को जन्म दे रहा है।