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दिल्ली की राजनीति में बड़ा मोड़: आम आदमी पार्टी ने एमसीडी मेयर चुनाव से बनाई दूरी, जबकि जलज कुमार चौधरी ने स्थायी समिति के लिए भरा नामांकन; भारतीय जनता पार्टी और AAP के बीच सियासी टकराव तेज

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भारतीय जनता पार्टी और AAP के बीच सियासी टकराव तेज

नई दिल्ली में पार्टी की ओर से जानकारी दी गई कि शालीमार बाग वार्ड से पार्षद जलज कुमार चौधरी ने एमसीडी की स्थायी समिति के लिए नामांकन दाखिल किया है। यह कदम ऐसे समय पर उठाया गया है जब मेयर चुनाव को लेकर राजनीतिक हलचल तेज है।

मेयर चुनाव से दूर रहने का फैसला

AAP के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने नामांकन की अंतिम तिथि से ठीक पहले घोषणा की कि उनकी पार्टी मेयर चुनाव में हिस्सा नहीं लेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पास सत्ता होने के बावजूद वह दिल्ली में ठोस काम नहीं कर पाई है। उनका कहना था कि अब भाजपा को एमसीडी चलाने का पूरा अवसर दिया जाना चाहिए ताकि उसके कामकाज की जवाबदेही तय हो सके।

स्थायी समिति पर फोकस

AAP ने मेयर चुनाव से दूरी बनाते हुए अपनी रणनीति स्थायी समिति पर केंद्रित की है। यह समिति एमसीडी की सबसे प्रभावशाली इकाइयों में मानी जाती है, जो बजट स्वीकृति और बड़े नीतिगत फैसलों में अहम भूमिका निभाती है।

एमसीडी में विपक्ष के नेता अंकुश नारंग ने जलज चौधरी के नामांकन का समर्थन करते हुए कहा कि इससे जनप्रतिनिधित्व मजबूत होगा। उन्होंने यह भी दावा किया कि भाजपा के प्रभाव वाले क्षेत्र में होने के बावजूद चौधरी ने अपने इलाके के लोगों के लिए लगातार काम किया है।

भाजपा का पलटवार

AAP के इस फैसले पर दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इसे “हास्यास्पद” करार देते हुए कहा कि AAP ने अपना बहुमत खो दिया है और पार्टी के अंदर असंतोष बढ़ रहा है। उनके अनुसार, अगर AAP चुनाव लड़ती तो और पार्षदों की नाराजगी सामने आ सकती थी।

चुनावी गणित और तारीख

इस बार मेयर चुनाव के लिए कुल 273 मतदाता होंगे, जिनमें पार्षदों के अलावा विधायक और सांसद भी शामिल हैं। जीत के लिए 137 मतों की जरूरत होगी।
एमसीडी में वर्तमान स्थिति के अनुसार भाजपा के 123, AAP के 100, इंद्रप्रस्थ विकास पार्टी के 15 और कांग्रेस के 9 पार्षद हैं, जबकि कुछ सीटें निर्दलीय और एक रिक्त है।

मेयर, उपमेयर और स्थायी समिति के सदस्यों के चुनाव 29 अप्रैल को होने वाले हैं, जबकि नामांकन प्रक्रिया निर्धारित समय तक पूरी की जाएगी।

AAP का मेयर चुनाव से पीछे हटना एक रणनीतिक कदम माना जा रहा है, जिससे वह भाजपा को सीधे तौर पर एमसीडी के कामकाज के लिए जिम्मेदार ठहराना चाहती है। वहीं, स्थायी समिति में अपनी उपस्थिति मजबूत कर पार्टी प्रशासनिक फैसलों में प्रभाव बनाए रखने की कोशिश कर रही है।

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