घरेलू जिम्मेदारियों में बराबरी जरूरी, एकतरफा अपेक्षाएं अस्वीकार्य: सुप्रीम कोर्ट
नई दिल्ली | 22 मार्च 2026
तलाक से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने वैवाहिक संबंधों और घरेलू जिम्मेदारियों को लेकर अहम टिप्पणी की है। अदालत ने स्पष्ट किया कि शादी के बाद पति अपनी पत्नी से अकेले घर संभालने या खाना बनाने की अपेक्षा नहीं कर सकता।
पीठ ने उस पति की शिकायत को खारिज कर दिया, जिसमें उसने आरोप लगाया था कि उसकी पत्नी ने शादी के कुछ समय बाद खाना बनाना बंद कर दिया और उसका व्यवहार बदल गया। अदालत ने सख्त शब्दों में कहा कि विवाह का अर्थ “नौकरानी” लाना नहीं, बल्कि एक समान अधिकार वाले जीवनसाथी के साथ संबंध स्थापित करना है।
साझेदारी पर आधारित होना चाहिए विवाह
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि आज के दौर में पति-पत्नी दोनों को घरेलू जिम्मेदारियों—जैसे खाना बनाना, सफाई और अन्य काम—में समान रूप से भागीदारी निभानी चाहिए। वैवाहिक जीवन को साझेदारी के रूप में देखा जाना चाहिए, न कि एकतरफा जिम्मेदारी के रूप में।
बदलते समाज के साथ सोच भी बदले
अदालत ने यह भी माना कि वर्तमान समय में महिलाएं नौकरी, व्यवसाय और विभिन्न पेशेवर क्षेत्रों में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। ऐसे में उनसे यह अपेक्षा करना कि वे अकेले घर और बाहर दोनों संभालें, व्यावहारिक नहीं है।
संतुलित पारिवारिक जीवन के लिए जरूरी बातें
अदालत की टिप्पणी के अनुसार एक स्वस्थ वैवाहिक संबंध के लिए:
- घरेलू कामों का बराबर बंटवारा होना चाहिए
- बच्चों की जिम्मेदारी दोनों को निभानी चाहिए
- एक-दूसरे के करियर का सम्मान जरूरी है
- मानसिक दबाव और थकान को समझना चाहिए
लैंगिक समानता का संदेश
सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी आधुनिक समाज में लैंगिक समानता और साझा जिम्मेदारियों की आवश्यकता को रेखांकित करती है। साथ ही, यह संदेश भी देती है कि वैवाहिक विवादों को पारंपरिक सोच के बजाय वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों के अनुरूप समझना चाहिए।









