नई दिल्ली, 26 अप्रैल 2026
क्या बदरपुर विधानसभा की नहर पार कॉलोनियों के साथ अब भी भेदभाव हो रहा है? क्या हजारों परिवार आज भी मूलभूत सुविधाओं और कॉलोनी नियमितीकरण के इंतजार में हैं? इन्हीं सवालों को लेकर बदरपुर क्षेत्र में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी के स्थानीय नेता श्रीचंद वोहरा ने जैतपुर क्षेत्र से एक बड़ी पदयात्रा निकालकर नहर पार कॉलोनियों को 1511 अधिकृत कॉलोनियों की सूची में शामिल करने की मांग को जोरदार तरीके से उठाया।
आखिर क्यों सड़कों पर उतरे लोग?
एकता विहार, जैतपुर से शुरू हुई इस पदयात्रा में बड़ी संख्या में स्थानीय निवासियों, आरडब्ल्यूए प्रतिनिधियों और पार्टी कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया। लोगों का कहना है कि नहर पार इलाके की कई कॉलोनियां अब तक नियमित नहीं हो सकी हैं, जिसके कारण यहां रहने वाले परिवारों को मकान निर्माण, सरकारी दस्तावेज, पानी, सीवर और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए लगातार परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

क्या जनता के प्रतिनिधि अब तक रहे नाकाम?
पदयात्रा के दौरान लोगों ने सवाल उठाया कि वर्षों से विधायक, सांसद और पार्षद चुनने के बावजूद आखिर नहर पार क्षेत्र की कॉलोनियों को अब तक वैधता क्यों नहीं मिल सकी? स्थानीय निवासियों के बीच यह नाराजगी भी देखने को मिली कि चुनाव के समय बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन नियमितीकरण जैसे अहम मुद्दे पर ठोस कार्रवाई नहीं होती।
2008 के प्रतिबंध आज भी क्यों बने परेशानी?
क्षेत्र में यह मुद्दा भी उठा कि पर्यावरण और ओजोन संरक्षण के नाम पर वर्षों पहले लगाए गए प्रतिबंधों का असर आज भी स्थानीय लोगों पर पड़ रहा है। सवाल यह है कि यदि विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन संभव है, तो फिर नहर पार की कॉलोनियों के हजारों निवासी अब तक अधर में क्यों हैं?
संघर्ष जारी रखने का ऐलान
श्रीचंद वोहरा ने पदयात्रा के दौरान साफ संदेश दिया कि जब तक बदरपुर की नहर पार कॉलोनियों को 1511 सूची में शामिल नहीं किया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। उनका कहना है कि यह केवल राजनीतिक मुद्दा नहीं बल्कि क्षेत्र के लोगों के बुनियादी अधिकारों की लड़ाई है।

अब सबसे बड़ा सवाल…
अब सबसे बड़ा सवाल ये की क्या श्रीचंद वोहरा की यह पदयात्रा बदरपुर की नहर पार कॉलोनियों को 1511 सूची में शामिल कराने की दिशा में कोई बड़ा असर दिखाएगी?
क्या वर्षों से लंबित नियमितीकरण की मांग अब सरकार तक मजबूती से पहुंचेगी?
या फिर यह आवाज भी राजनीतिक आश्वासनों के बीच दबकर रह जाएगी?
अब बदरपुर की जनता की नजर इस पर है कि क्या यह संघर्ष वास्तव में बदलाव लाएगा, या फिर नहर पार की कॉलोनियों को इंतजार की एक और लंबी राह तय करनी पड़ेगी।








