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मुंबई क्लाइमेट वीक 2026: थर्मल पावर के भविष्य और ऊर्जा संक्रमण पर मंथन

मुंबई क्लाइमेट वीक 2026: थर्मल पावर,AI image
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मुंबई, 31 मार्च 2026

Mumbai Climate Week 2026 के दौरान “थर्मल पावर के लिए रणनीतियाँ: भारत और ग्लोबल साउथ” विषय पर एक अहम राउंडटेबल चर्चा आयोजित की गई। यह कार्यक्रम 17 से 19 फरवरी 2026 के बीच हुआ, जिसमें ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञों, नीति निर्माताओं और उद्योग प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

इस चर्चा का संचालन Prayas Energy Group ने किया, जबकि आयोजन Project Mumbai द्वारा Government of Maharashtra और मुंबई प्रशासन के सहयोग से किया गया। वहीं, ऊर्जा संक्रमण से जुड़े सत्रों का नेतृत्व ISEG Foundation, Eversource Capital और Shakti Foundation ने किया।

कोयला आधारित बिजली की भूमिका में बदलाव

चर्चा में यह बात सामने आई कि भारत और ग्लोबल साउथ के देश डिकार्बोनाइजेशन की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं, लेकिन निकट भविष्य में कोयला पूरी तरह समाप्त नहीं होगा।

विशेषज्ञों के अनुसार:

  • सौर ऊर्जा की बढ़ती उपलब्धता के कारण दिन में कोयला संयंत्रों की जरूरत घटेगी
  • थर्मल पावर प्लांट्स को अधिक लचीला (flexible) बनाना होगा
  • इनका उपयोग अब लगातार नहीं, बल्कि मांग के अनुसार किया जाएगा

2047 तक बड़ी चुनौती

भारत में लगभग 58 गीगावॉट (GW) कोयला आधारित बिजली क्षमता 2047 तक 40 साल या उससे अधिक पुरानी हो जाएगी। यह कुल क्षमता का करीब 25% हिस्सा है, जो अपने जीवनकाल के अंत तक पहुंच जाएगा।

ऐसे में इन संयंत्रों को बंद करना या नए उपयोग के लिए तैयार करना एक बड़ी चुनौती होगी।

राउंडटेबल में उठे अहम मुद्दे

इस चर्चा के दौरान कई महत्वपूर्ण सवालों पर विचार किया गया:

1. नई नीतियां और बाजार ढांचा
कोयला खनन से लेकर बिजली वितरण तक पूरी वैल्यू चेन के लिए नए नियम और बाजार संरचना कैसे विकसित की जाए?

2. वित्तीय व्यवस्था
पुराने संयंत्रों को अपग्रेड, लचीला बनाने या पुनः उपयोग में लाने के लिए फंडिंग कैसे सुनिश्चित की जाए?

3. संसाधनों का संतुलन
घटती उपयोगिता के बावजूद मौजूदा और नए प्रोजेक्ट्स के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए?

4. परिसंपत्तियों का पुनः उपयोग
कोयला संयंत्रों की जमीन और ट्रांसमिशन नेटवर्क का बेहतर उपयोग कैसे किया जाए?

5. पर्यावरणीय सुधार (Remediation)
बंद होने वाले संयंत्रों की जमीन को सुरक्षित और उपयोगी बनाने के लिए जिम्मेदारी और लागत कैसे तय होगी?

ग्लोबल साउथ के लिए रणनीति

इस मंच पर विशेषज्ञों, नीति निर्माताओं और उद्योग प्रतिनिधियों ने इस बात पर सहमति जताई कि ऊर्जा संक्रमण के दौर में संतुलित और व्यावहारिक रणनीतियां बेहद जरूरी हैं।

निष्कर्ष

मुंबई क्लाइमेट वीक 2026 का यह राउंडटेबल ऊर्जा क्षेत्र में बदलाव की दिशा तय करने वाला एक अहम कदम माना जा रहा है। इसमें यह समझने की कोशिश की गई कि कैसे कोयला आधारित ऊर्जा प्रणाली को धीरे-धीरे बदलते हुए एक स्वच्छ, टिकाऊ और संतुलित भविष्य की ओर ले जाया जा सकता है।

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