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वेदांता पहुंची सुप्रीम कोर्ट, जयप्रकाश एसोसिएट्स के अधिग्रहण में अडानी समूह को चुनौती

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नई दिल्ली, 31 मार्च 2026

खनन क्षेत्र की दिग्गज कंपनी Vedanta Group ने Supreme Court of India का रुख करते हुए Adani Group द्वारा Jaiprakash Associates Ltd (JAL) के प्रस्तावित अधिग्रहण पर रोक लगाने की मांग की है। इस याचिका के साथ कंपनी ने दिवाला समाधान प्रक्रिया को लेकर अपनी कानूनी लड़ाई और तेज कर दी है।

बोली प्रक्रिया पर उठे सवाल

वेदांता के चेयरमैन Anil Agarwal का कहना है कि दिवाला प्रक्रिया के दौरान उनकी कंपनी को सबसे ऊंची बोली लगाने वाला घोषित किया गया था और इसकी लिखित पुष्टि भी मिली थी।
हालांकि, बाद में बिना स्पष्ट कारण बताए इस निर्णय को बदल दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रक्रिया पारदर्शी होने के बावजूद अंतिम नतीजा अचानक बदल दिया गया, जिसे अब अदालत में चुनौती दी गई है।

कर्ज में डूबी कंपनी, कड़ी प्रतिस्पर्धा

Jaiprakash Associates Ltd को जून 2024 में लगभग 57,000 करोड़ रुपये के कर्ज डिफॉल्ट के बाद दिवाला प्रक्रिया में शामिल किया गया था। इस दौरान Vedanta Group और Adani Group के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिली।

  • वेदांता की बोली: लगभग 16,726 करोड़ रुपये
  • अडानी समूह की बोली: लगभग 14,535 करोड़ रुपये

उच्च बोली के बावजूद कर्जदाताओं की समिति (CoC) ने अडानी समूह के प्रस्ताव को मंजूरी दी, जिसे बाद में NCLT ने भी स्वीकृति दे दी।

अदालतों में जारी संघर्ष

वेदांता ने पहले National Company Law Appellate Tribunal (NCLAT) में इस फैसले को चुनौती दी थी, लेकिन वहां अंतरिम राहत नहीं मिली। अब कंपनी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर अधिग्रहण पर रोक की मांग की है। मामले की अगली सुनवाई अप्रैल में होने की संभावना है।

कर्जदाताओं का पक्ष

कर्जदाताओं ने अपने फैसले का बचाव करते हुए कहा कि दिवाला प्रक्रिया केवल सबसे ऊंची बोली पर आधारित नहीं होती। इसमें कई अन्य कारकों को भी महत्व दिया जाता है, जैसे—

  • अग्रिम भुगतान (upfront cash)
  • भुगतान की समयसीमा
  • योजना लागू करने की क्षमता

उनके अनुसार, Adani Group ने करीब 6,000 करोड़ रुपये का तत्काल भुगतान और दो वर्षों में तेज कर्ज निपटान का प्रस्ताव दिया, जो वेदांता की लगभग पांच साल की भुगतान अवधि की तुलना में अधिक व्यावहारिक माना गया।

संपत्तियों का महत्व

Jaiprakash Associates Ltd के पास रियल एस्टेट, सीमेंट, पावर और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी कई अहम परियोजनाएं हैं। इनमें नोएडा और ग्रेटर नोएडा की प्रमुख परियोजनाएं तथा जेवर एयरपोर्ट के पास विकसित हो रही स्पोर्ट्स सिटी शामिल हैं।

आगे क्या

अब यह मामला Supreme Court of India में पहुंच चुका है। अदालत का फैसला न केवल इस अधिग्रहण के भविष्य को तय करेगा, बल्कि दिवाला समाधान प्रक्रिया में बोली चयन के मानकों पर भी दूरगामी प्रभाव डाल सकता है।

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