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संसद के मॉनसून सत्र में FCRA बिल पर संग्राम: JPC को भेजा गया विधेयक, किरेन रिजिजू ने विपक्ष को दी खुली चुनौती

संसद के मॉनसून सत्र में FCRA बिल image source ChatGPT
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नई दिल्ली:
संसद के मॉनसून सत्र में ‘विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक 2026’ (FCRA Bill 2026) को लेकर सत्तापक्ष और विपक्षी दलों के बीच तीखा राजनीतिक घमासान देखने को मिला। विपक्षी सांसदों के भारी हंगामे और नारेबाजी के बीच, गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय द्वारा रखे गए प्रस्ताव को स्वीकार करते हुए लोकसभा ने इस विधेयक को 31 सदस्यीय संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास विस्तृत समीक्षा के लिए भेजने की मंजूरी दे दी।
बहस के दौरान तीखी तकरार
संसदीय कार्यवाही के दौरान कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और डीएमके समेत प्रमुख विपक्षी दलों ने कानून को ‘भेदभावपूर्ण’ बताते हुए इसे तुरंत वापस लेने की मांग उठाई। कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल और सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि यह बिल देश के अल्पसंख्यक संस्थानों और गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) को निशाना बनाने की नीयत से लाया गया है।
अखिलेश यादव के आरोपों पर पलटवार करते हुए संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सदन में विपक्ष को खुली चुनौती दे डाली। रिजिजू ने कहा कि विपक्ष सदन और देश को भ्रमित करने की राजनीति बंद करे। उन्होंने सपा अध्यक्ष से सवाल करते हुए कहा, “यदि इस पूरे विधेयक में एक भी प्रावधान ऐसा है जो अल्पसंख्यक समुदाय के विरुद्ध जाता हो, तो उसे सबके सामने साबित करके दिखाएं।” रिजिजू ने स्पष्ट किया कि विदेशी फंडिंग में पारदर्शिता सुनिश्चित करना और राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत बनाना सरकार की प्राथमिकता है, न कि किसी खास वर्ग को परेशान करना।
विवाद का मुख्य कारण और जेपीसी की भूमिका
प्रस्तावित FCRA संशोधन विधेयक 2026 में विदेशी धन प्राप्त करने वाली संस्थाओं के पंजीकरण रद्द या समाप्त होने पर उनकी परिसंपत्तियों (Assets) के प्रबंधन और जब्ती के नए प्रावधान शामिल हैं। विपक्षी दलों और नागरिक संगठनों की चिंता है कि इन कड़े नियमों का दुरुपयोग सामाजिक और धर्मार्थ कार्यों में जुटी संस्थाओं के खिलाफ हो सकता है।
अब 31 सदस्यों वाली इस संसदीय समिति में लोकसभा के 21 और राज्यसभा के 10 सदस्य शामिल होंगे। यह कमेटी कानून के सभी कानूनी, प्रशासनिक और सामाजिक पहलुओं पर विभिन्न हितधारकों से चर्चा करेगी। जेपीसी को अपनी विस्तृत रिपोर्ट संसद के 2026 शीतकालीन सत्र के पहले सप्ताह तक पेश करने का निर्देश दिया गया है।
आपकी क्या राय है?
FCRA संशोधन बिल को जेपीसी में भेजने और मंत्री किरेन रिजिजू द्वारा विपक्ष को दी गई सीधी चुनौती पर आपका क्या नज़रिया है? क्या आपको लगता है कि विदेशी फंडिंग पर सख्त सरकारी निगरानी समय की मांग है, या फिर इससे जनकल्याणकारी संस्थाओं के काम में अड़चन आएगी? अपनी राय कमेंट बॉक्स में साझा करें।