नई दिल्ली:
भारतीय क्विक कॉमर्स (Quick Commerce) बाजार में पिछले कुछ समय से चल रही ‘सुपरफास्ट डिलीवरी’ की होड़ पर आखिरकार ब्रेक लग गया है। Blinkit, Zepto और Swiggy Instamart जैसी दिग्गज कंपनियों को अब अपने विज्ञापनों और ब्रांडिंग से ’10 मिनट में डिलीवरी’ का वादा हटाना पड़ रहा है। सरकार की सख्ती और डिलीवरी पार्टनर्स की सुरक्षा को लेकर उठते सवालों के बाद, इस उद्योग को अपनी मार्केटिंग रणनीति में बड़ा बदलाव करने के लिए मजबूर होना पड़ा है।
क्या है पूरा मामला और विवाद की जड़?
क्विक कॉमर्स कंपनियों का बिजनेस मॉडल ‘डार्क स्टोर्स’ (Dark Stores) पर आधारित है, जहाँ से राइडर्स को 10-20 मिनट के भीतर सामान ग्राहक तक पहुँचाना होता है। हालांकि, यह सुविधा डिलीवरी पार्टनर्स के लिए एक ‘खतरा’ बन गई थी।
सुरक्षा का मुद्दा: दबाव में आकर राइडर्स को व्यस्त सड़कों पर तेज गाड़ी चलानी पड़ती थी, जिससे सड़क हादसों का खतरा बढ़ गया।
श्रमिकों का विरोध: 31 दिसंबर 2025 और नए साल के मौके पर डिलीवरी वर्कर्स की हड़ताल ने इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाया। वर्कर्स ने मांग की कि उन्हें मशीनों की तरह न देखा जाए और काम के अवास्तविक लक्ष्यों (Unrealistic Targets) को खत्म किया जाए।
सरकारी हस्तक्षेप: श्रम मंत्रालय ने कड़ा रुख अपनाते हुए कंपनियों को स्पष्ट किया कि ‘मार्केटिंग दावों से ऊपर सुरक्षा’ है। केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मंडाविया ने प्रमुख प्लेटफार्मों के अधिकारियों के साथ बैठक कर सुरक्षा मानकों में सुधार के निर्देश दिए।
कंपनियों ने कैसे बदला अपना रुख?
सरकार के हस्तक्षेप के बाद, Blinkit ने सबसे पहले अपनी टैगलाइन बदली। अब इनका फोकस “10 मिनट में डिलीवरी” के बजाय “30,000+ प्रोडक्ट्स की उपलब्धता” पर शिफ्ट हो गया है। Zepto और अन्य खिलाड़ियों ने भी अपने ऐप और विज्ञापनों से समय-सीमा वाले दावों को हटाना शुरू कर दिया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि हालांकि कंपनियों ने सार्वजनिक दावों को हटा दिया है, लेकिन बैकएंड एल्गोरिदम अभी भी तेज डिलीवरी को प्राथमिकता देते हैं।
क्या सिर्फ नाम बदलने से समस्या हल होगी?
भले ही ’10 मिनट’ का लेबल हट गया हो, लेकिन उद्योग जगत के सामने बड़ी चुनौतियां बरकरार हैं:
एल्गोरिदम का दबाव: कई राइडर्स का मानना है कि रेटिंग्स और देरी पर वेतन कटौती (Pay Cuts) जैसे सिस्टम अभी भी उन्हें जल्दीबाजी करने पर मजबूर करते हैं।
नए श्रम कानून: भारत के नए लेबर कोड्स अब गिग वर्कर्स (Gig Workers) को औपचारिक मान्यता दे रहे हैं। इसके तहत कंपनियों को अब बीमा, पेंशन और सामाजिक सुरक्षा के प्रति अधिक जवाबदेह बनाया जा रहा है।
बाजार की जंग: Blinkit (46% बाजार हिस्सेदारी), Swiggy Instamart (24%) और Zepto (22%) के बीच प्रतिस्पर्धा इतनी तेज है कि कंपनियां ग्राहकों को खोने के डर से अपनी गति कम करने में हिचकिचा रही हैं।
यह बदलाव स्पष्ट करता है कि अब भारतीय ई-कॉमर्स सेक्टर को ‘अंधाधुंध गति’ के बजाय ‘सतत विकास’ (Sustainable Growth) की ओर कदम बढ़ाने होंगे, जहाँ उपभोक्ता की सुविधा और डिलीवरी पार्टनर की जान—दोनों का संतुलन बना रहे।
10 मिनट की डिलीवरी का ‘दौड़’ खत्म: Blinkit और Zepto जैसी कंपनियों को क्यों बदलनी पड़ी अपनी रणनीति?









