देहरादून 10 जून सन 2026
प्रतिभा सिंह
सगंध पौध केंद्र (CAP) की ऐतिहासिक पहल; आज 10 जून को साझा किया गया वैश्विक संगोष्ठी का पूरा रोडमैप, आयात पर निर्भरता कम कर ग्लोबल हब बनेगा उत्तराखं
उत्तराखंड को औषधीय और सगंध पौधों (Aromatic & Medicinal Plants) के क्षेत्र में विश्व पटल पर स्थापित करने की दिशा में आज एक बड़ा मील का पत्थर पार कर लिया गया। सचिवालय स्थित मीडिया सेंटर में आज, 10 जून को दोपहर 12:30 बजे प्रदेश के माननीय कृषि एवं कृषक कल्याण मंत्री श्री गणेश जोशी की एक बेहद महत्वपूर्ण और सफल प्रेसवार्ता संपन्न हुई।
यह प्रेस कॉन्फ्रेंस सगंध पौध केंद्र (CAP), देहरादून द्वारा ‘दालचीनी’ विषय पर आयोजित होने वाली आगामी अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी एवं कार्यशाला (International Congress & Workshop) के संबंध में बुलाई गई थी। प्रेस वार्ता के दौरान कृषि मंत्री के साथ विभाग के आला अधिकारी और वरिष्ठ वैज्ञानिक भी मौजूद रहे, जिन्होंने इस वैश्विक आयोजन का पूरा खाका मीडिया के सामने रखा।
इस अंतरराष्ट्रीय कांग्रेस (संगोष्ठी) से उत्तराखंड में क्या बदल जाएगा?

आज हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में कृषि मंत्री गणेश जोशी ने स्पष्ट किया कि यह केवल एक संगोष्ठी नहीं है, बल्कि उत्तराखंड के ग्रामीण और पर्वतीय क्षेत्रों की आर्थिकी को बदलने वाला एक क्रांतिकारी कदम है। इस अंतरराष्ट्रीय कांग्रेस से राज्य में ये 4 बड़े बदलाव आने वाले हैं:
- विदेशी आयात पर निर्भरता होगी खत्म, भारत में लीडर बनेगा उत्तराखंड
वर्तमान में भारत अपनी जरूरत का एक बहुत बड़ा हिस्सा (लगभग 90% से अधिक दालचीनी) अन्य देशों से आयात (Import) करता है। इस अंतरराष्ट्रीय कांग्रेस के माध्यम से उत्तराखंड को देश का पहला प्रमुख ‘दालचीनी उत्पादक राज्य’ बनाने की नींव रखी जा रही है। इससे देश का पैसा बचेगा और उत्तराखंड आत्मनिर्भरता का प्रतीक बनेगा। - पहाड़ों में रुकेगा पलायन, स्थानीय स्तर पर मिलेगा बंपर रोजगार
पहाड़ी क्षेत्रों में पारंपरिक खेती के नुकसान और जंगली जानवरों के आतंक के कारण पलायन एक बड़ी समस्या है। दालचीनी की खेती की खास बात यह है कि इसे जंगली जानवर नुकसान नहीं पहुँचाते। इस कांग्रेस के बाद राज्य में विशेष ‘दालचीनी क्लस्टर’ बनाए जाएंगे, जिससे हजारों स्थानीय युवाओं और महिला स्वयं सहायता समूहों को सीधे अपने गांव में ही रोजगार मिलेगा। - हमारे किसानों को मिलेगी ‘ग्लोबल’ तकनीक और ट्रेनिंग
इस अंतरराष्ट्रीय महाकुंभ में दुनिया भर के नामी कृषि वैज्ञानिक, रिसर्चर्स और मसाला उद्योग (Spice Industry) के बड़े बिजनेसमैन जुट रहे हैं। इसका सीधा फायदा उत्तराखंड के छोटे किसानों को मिलेगा। उन्हें दालचीनी की हाईटेक फार्मिंग, कम समय में तैयार होने वाली किस्में, आधुनिक प्रोसेसिंग और वर्ल्ड-क्लास पैकेजिंग की मुफ्त ट्रेनिंग की राह खुलेगी। - बिचौलियों का खेल खत्म, सीधे वैश्विक बाजार (Global Market) से जुड़ाव
अब तक किसानों को अपनी फसल का सही दाम न मिलने की शिकायत रहती थी। इस अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला के जरिए सरकार देश-विदेश की बड़ी कंपनियों (बायर्स) को सीधे उत्तराखंड के किसानों के साथ एक मंच पर ला रही है। इससे ‘मार्केट लिंकेज’ मजबूत होगा और किसानों को उनकी उच्च गुणवत्ता वाली दालचीनी का सीधा वैश्विक दाम मिलेगा, जिससे उनकी आय कई गुना बढ़ जाएगी।
प्रेस वार्ता में कृषि मंत्री ने क्या कहा?
“उत्तराखंड की जलवायु और मिट्टी उच्च गुणवत्ता वाली दालचीनी की खेती के लिए भगवान का दिया हुआ वरदान है। सगंध पौध केंद्र (CAP) के वैज्ञानिकों की मेहनत और इस अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के जरिए हम अपने काश्तकारों को पारंपरिक खेती से आगे ले जाकर नकदी फसलों से समृद्ध बनाएंगे। हमारा लक्ष्य उत्तराखंड के हर पहाड़ी जिले में दालचीनी की खुशबू और उससे समृद्धि पहुँचाना है।”
— श्री गणेश जोशी, कृषि मंत्री, उत्तराखंड
इस सफल प्रेस वार्ता के संपन्न होने के बाद अब पूरे प्रदेश की नजरें इस भव्य अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी पर टिक गई हैं, जो आने वाले दिनों में उत्तराखंड के कृषि इतिहास में एक नया अध्याय लिखने जा रही है।










