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सुप्रीम कोर्ट से लेकर रेगुलेटरी अथॉरिटीज तक—नए फैसलों और गाइडलाइन्स का सीधा असर उद्योग पर

पावर और माइनिंग सेक्टर में बड़े बदलाव
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पावर और माइनिंग सेक्टर में बड़े बदलाव

नई दिल्ली | 14 अप्रैल 2026
Source: Gati-विधि April 2026 Briefing

पावर और माइनिंग सेक्टर से जुड़ी अहम कानूनी और नियामक अपडेट्स को लेकर “Gati-विधि” की अप्रैल 2026 एडिशन जारी हो गई है। इस रिपोर्ट में Supreme Court of India और विभिन्न नियामक संस्थाओं के हालिया फैसलों व गाइडलाइन्स को विस्तार से शामिल किया गया है, जो आने वाले समय में पूरे सेक्टर की दिशा तय कर सकते हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने टैरिफ निर्धारण में पॉलिसी इंसेंटिव्स को शामिल करने को लेकर महत्वपूर्ण फैसला दिया है। इससे बिजली उत्पादन कंपनियों के लिए राहत और स्पष्टता दोनों आने की संभावना है।

वहीं, Ministry of Coal (MoC) ने अंडरग्राउंड कोल गैसीफिकेशन के तहत माइनिंग प्लान्स के लिए नई गाइडलाइन्स जारी की हैं, जिससे कोयला उत्पादन के आधुनिक और पर्यावरण-अनुकूल तरीकों को बढ़ावा मिलेगा।

Central Electricity Regulatory Commission (CERC) ने रिन्यूएबल एनर्जी जेनरेटर्स के लिए DSM ‘X’ फैक्टर का ट्रेजेक्टरी निर्धारित किया है, जो ग्रिड मैनेजमेंट और पेनल्टी स्ट्रक्चर को प्रभावित करेगा।

इसके अलावा, Appellate Tribunal for Electricity (APTEL) ने दो अहम फैसले दिए हैं—

  • रिव्यू प्रोसीडिंग्स में कैरीइंग कॉस्ट की एंटाइटलमेंट को मान्यता दी गई
  • ट्रांसमिशन चार्जेज को फुल कॉन्ट्रैक्टेड कैपेसिटी पर लागू करने की पुष्टि की गई

राज्य स्तर पर भी कई बदलाव सामने आए हैं। Karnataka Electricity Regulatory Commission (KERC) ने कंपटीटिव बिडिंग के तहत ट्रांसमिशन लाइसेंसिंग के लिए ड्राफ्ट रेगुलेशन्स जारी किए हैं। वहीं, Telangana Electricity Regulatory Commission (TGERC) ने ToD टैरिफ में नाइट-टाइम रिबेट के दायरे को स्पष्ट किया है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि ये सभी अपडेट्स बिजली उत्पादकों, वितरण कंपनियों, नियामकों और अन्य बाजार प्रतिभागियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। इन बदलावों को समझकर ही सही रणनीति और निर्णय लेना संभव होगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की संरचित ब्रीफिंग उद्योग से जुड़े सभी स्टेकहोल्डर्स को तेजी से बदलते नियामक माहौल में सही दिशा देने में मदद करेगी।

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