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रांची छात्र आंदोलन: राहुल गांधी ने पुलिस कार्रवाई पर तोड़ी चुप्पी, कहा— ‘हम हिंसा के खिलाफ और छात्रों के साथ’

रांची छात्र आंदोलन: image source : ChatGPT
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रांची/नई दिल्ली:
झारखंड की राजधानी रांची में सरकारी परीक्षाओं में धांधली और नीति गत बदलावों की मांग को लेकर सड़कों पर उतरे युवाओं पर हुए लाठीचार्ज ने राज्य की राजनीति में उबाल ला दिया है। अभ्यर्थियों के उग्र प्रदर्शन और पुलिस द्वारा किए गए बल प्रयोग के बाद लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने इस पूरे घटनाक्रम पर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वे झारखंड के छात्रों के भविष्य और उनके अधिकारों के मुद्दे पर मौन नहीं रह सकते।
छात्रों के पक्ष में राहुल गांधी का बड़ा बयान
संसद परिसर में मीडियाकर्मियों से बातचीत करते हुए राहुल गांधी ने रांची की सड़कों पर हुए घटनाक्रम पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि युवाओं का आक्रोश और उनकी माँगें पूरी तरह जायज हैं, लेकिन किसी भी स्थिति में हिंसा को सही नहीं ठहराया जा सकता। राहुल गांधी ने जोर देकर कहा, “कांग्रेस पार्टी हर उस युवा और छात्र के साथ मजबूती से खड़ी है जो अपने न्यायपूर्ण अधिकारों के लिए शांतिपूर्ण ढंग से आवाज उठा रहा है। प्रशासन को संयम बरतने की सख्त जरूरत थी, क्योंकि युवाओं पर बल प्रयोग समस्या का समाधान नहीं है।”
उन्होंने राज्य सरकार और प्रशासनिक अधिकारियों से अपील की कि वे छात्रों के साथ तुरंत संवाद कायम करें और उनकी समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर हल करें।
क्या है रांची आंदोलन की मुख्य वजह?
पिछले कुछ दिनों से रांची में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हजारों छात्र परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, पेपर लीक की रोकथाम और लंबे समय से रुकी हुई भर्तियों की प्रक्रियाओं को गति देने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। आंदोलन तब हिंसक रूप ले बैठा जब मुख्यमंत्री आवास और राजभवन की ओर बढ़ रहे छात्रों को रोकने के लिए पुलिस को वॉटर कैनन और लाठीचार्ज का सहारा लेना पड़ा। इस झड़प में कई छात्र और पुलिसकर्मी घायल हुए हैं, जिसके बाद से पूरे शहर में तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है।
सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच बढ़ता घमासान
झारखंड में जहां एक ओर सत्तारूढ़ गठबंधन (JMM-कांग्रेस-RJD) पर प्रशासन के इस कड़े रुख को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं, वहीं राहुल गांधी के इस बयान को पार्टी के आंतरिक संतुलन और युवाओं के बीच अपनी छवि बनाए रखने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। दूसरी ओर, मुख्य विपक्षी दल भाजपा ने इसे राज्य सरकार का दमनकारी रवैया करार देते हुए मुख्यमंत्री के इस्तीफे और पूरे मामले की न्यायिक जांच की मांग की है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि छात्रों की मांगों पर जल्द ही ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह मुद्दा राज्य में एक बड़े राजनीतिक संकट का रूप ले सकता है।
आपकी क्या राय है?
रांची में छात्रों के प्रदर्शन पर पुलिस की कार्रवाई और राहुल गांधी के इस बयान पर आपका क्या नज़रिया है? क्या आपको लगता है कि विपक्षी और सत्ताधारी नेताओं के बयानों से परे छात्रों को वास्तव में त्वरित न्याय मिलेगा, या यह मुद्दा केवल बयानबाजी तक सीमित रह जाएगा? अपनी राय नीचे कमेंट में साझा करें।